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Rajasthan Politics: राहुल भी पायलट के सब्र के मुरीद, क्या 26 महीने पद से दूर रहने के बाद अब मिलेगी जिम्मेदारी?
सार
Rajasthan Political Crisis: जुलाई 2020 से पायलट सिर्फ विधायक की भूमिका में हैं। अब उनकी भूमिका तय होनी है, लेकिन गहलोत गुट उनके सीएम बनने के विरोध में खड़ा हो गया है। इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि पायलट के जिस सब्र के राहुल गांधी भी मुरीद हैं, वह कब तक बना रहेगा।
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सचिन पायलट का हो रहा विरोध।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
Rajasthan Political Crisis: 22 जून को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली में एआईसीसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी अफसरों द्वारा उनसे की गई पूछताछ का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा- आखिरी दिन ईडी के अफसरों ने मुझसे पूछा कि आपने सभी सवालों के जवाब दिए, इतना पेशेंस (सब्र) कहां से आता है? मैंने उनसे कहा, यह तो नहीं बता सकता।
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राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पूछा, जानते हैं सब्र कहां से आया? उन्होंने कहा, 2004 से पार्टी में काम कर रहा हूं। सब्र नहीं आएगा तो क्या आएगा? इस बात को पार्टी का हर नेता समझता है। देखो सचिन पायलट जी सब्र से बैठे हैं। राहुल गांधी को यह बात कहे हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है और पायलट भी लगातार सब्र रखे हुए हैं, लेकिन यह कब तक रहेगा अब ये सवाल उठने लगा है।
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करीब 26 महीने यानी दो साल और दो महीने से सचिन पायलट सब्र रखे हुए हैं। इसके बाद भी पायलट की वफादारी पर सवाल उठ रहे हैं। अशोक गहलोत गुट के कुछ नेता उन पर लगातार हमला कर रहे हैं। बीते दिन यानी मंगलवार को अनुशासनहीनता पर नोटिस मिलने के बाद मंत्री महेश जोशी ने कहा, हम कांग्रेस के वफादार हैं, पहले भी इस बात को साबित कर चुके हैं, जरूरत पड़ी तो फिर साबित करेंगे। यह उन्हें करना चाहिए जिन पर सवाल उठ रहे हैं। बिना नाम लिए जोशी ने पायलट पर निशाना साधा। इससे पहले भी गहलोत गुट साफ कह चुका है कि संकट के समय साथ देने वाले 102 विधायकों में से ही किसी को सीएम बनाया जाए। यानी विधायक पायलट के मुख्यमंत्री बनने के खिलाफ हैं।
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2018 में गहलोत को सीएम और पायलट डिप्टी सीएम बनाया गया था। इस दौरान राहुल यह तस्वीरे ट्वीट की थी।
- फोटो : सोशल मीडिया
कब तक गद्दार का तमगा बर्दाश्त कर पाएंगे पायलट?
जुलाई 2020 से पायलट और उनके गुट के विधायकों को गद्दार बताने को कोशिश की जा रही है। खुद सीएम अशोक गहलोत भी कई बार अपने भाषण और बयान में सरकार पर आए संकट को याद कर चुके हैं। अब एक बार फिर पायलट को गद्दार साबित करने कि कोशिश की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि पायलट इसे कब तक बर्दाश्त कर पाएंगे। कहीं उनका वह सब्र जवाब न दे जाए जिसकी राहुल गांधी ने तारीफ की थी।
पायलट गहलोत की अदावत पुरानी
2018 के विधानसभा चुनाव से चली आ रही अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अदावत ने जुलाई 2020 में सियासी मोड़ ले लिया था। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे। पायलट की इस बगावत के सरकार गिराने की साजिश माना गया था। हालांकि, गहलोत सरकार बचाने में सफल हो गए थे। 14 जुलाई 2020 को सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष से हटा दिया गया था। उनके साथ उनके समर्थक नेताओं और विधायकों को भी पदों से हटाया गया था।
अगस्त 2020 में पायलट गुट की मांगों को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। जिसके आधार पर नवंबर महीने में मंत्रिमंडल में फेरबदल कर पायलट समर्थकों को कैबिनेट में जगह दी। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों में भी समर्थकों को जगह दी गई, लेकिन पायलट सिर्फ विधायक की भूमिका में रहे। अब उनकी भूमिका तय होनी है, लेकिन गहलोत गुट उनके सीएम बनने के विरोध में खड़ा हो गया है। इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि पायलट के जिस सब्र के राहुल गांधी भी मुरीद हैं, वह कब तक बना रहेगा।
जुलाई 2020 से पायलट और उनके गुट के विधायकों को गद्दार बताने को कोशिश की जा रही है। खुद सीएम अशोक गहलोत भी कई बार अपने भाषण और बयान में सरकार पर आए संकट को याद कर चुके हैं। अब एक बार फिर पायलट को गद्दार साबित करने कि कोशिश की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि पायलट इसे कब तक बर्दाश्त कर पाएंगे। कहीं उनका वह सब्र जवाब न दे जाए जिसकी राहुल गांधी ने तारीफ की थी।
पायलट गहलोत की अदावत पुरानी
2018 के विधानसभा चुनाव से चली आ रही अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अदावत ने जुलाई 2020 में सियासी मोड़ ले लिया था। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ मानेसर चले गए थे। पायलट की इस बगावत के सरकार गिराने की साजिश माना गया था। हालांकि, गहलोत सरकार बचाने में सफल हो गए थे। 14 जुलाई 2020 को सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष से हटा दिया गया था। उनके साथ उनके समर्थक नेताओं और विधायकों को भी पदों से हटाया गया था।
अगस्त 2020 में पायलट गुट की मांगों को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। जिसके आधार पर नवंबर महीने में मंत्रिमंडल में फेरबदल कर पायलट समर्थकों को कैबिनेट में जगह दी। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों में भी समर्थकों को जगह दी गई, लेकिन पायलट सिर्फ विधायक की भूमिका में रहे। अब उनकी भूमिका तय होनी है, लेकिन गहलोत गुट उनके सीएम बनने के विरोध में खड़ा हो गया है। इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि पायलट के जिस सब्र के राहुल गांधी भी मुरीद हैं, वह कब तक बना रहेगा।
पायलट ने साधी है चुप्पी
सचिन पायलट इस समय वेट एंड वॉच की स्थिति में है और अपनी छवि को लेकर भी सतर्क हैं। कल यानी मंगलवार को एक समाचार एजेंसी ने पायलट की सोनिया गांधी से बात करने की खबर चलाई। पायलट ने इसका तुरंत खंडन किया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि 'मुझे डर है कि झूठी खबर रिपोर्ट की जा रही है'। इससे साफ लग रहा है कि पायलट फिलहाल कांग्रेस आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
सचिन पायलट इस समय वेट एंड वॉच की स्थिति में है और अपनी छवि को लेकर भी सतर्क हैं। कल यानी मंगलवार को एक समाचार एजेंसी ने पायलट की सोनिया गांधी से बात करने की खबर चलाई। पायलट ने इसका तुरंत खंडन किया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि 'मुझे डर है कि झूठी खबर रिपोर्ट की जा रही है'। इससे साफ लग रहा है कि पायलट फिलहाल कांग्रेस आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।