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राजस्थान: आरएमएससीएल की लापरवाही से सरकारी अस्पतालों में गहराया दवा संकट, मरीजों को दी गईं अमानक दवाएं

Tue, 13 Oct 2026 02:40 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Tue, 13 Oct 2026 02:40 PM IST
सार

राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड में दवा खरीद और गुणवत्ता जांच से जुड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, रेट कॉन्ट्रैक्ट समय पर नहीं होने से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और स्थानीय स्तर पर महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं।

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Rajasthan Government Hospitals Medicine Shortage RMSCL Audit Report 131 Substandard
आरएमएससीएल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) में पिछले डेढ़ से दो साल में हुई भारी अनियमितताओं के कारण प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट गहरा गया है। दवा खरीद के टेंडर और गुणवत्ता जांच को लेकर कॉरपोरेशन में बड़े पैमाने पर लापरवाही हुई है। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी एजेंसी ने एक-एक साल तक नए रेट कॉन्ट्रैक्ट नहीं किए। इस कारण सरकारी अस्पतालों को दवा आपूर्ति बाधित हुई और अस्पतालों ने स्थानीय स्तर पर औने-पौने दामों में दवाओं की जमकर खरीद की, जिससे राज्य को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ।
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टेंडर प्रक्रिया में देरी और वित्तीय नुकसान
रेट कॉन्ट्रैक्ट समय पर न होने से अस्पतालों में दवाओं की किल्लत उत्पन्न हो गई। आरएमएससीएल की इस ढिलाई के कारण अस्पतालों को स्थानीय स्तर पर अधिक दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ीं। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर खरीदी गई इन दवाओं की गुणवत्ता जांच भी नहीं करवाई। ऑडिट रिपोर्ट के कई पैराग्राफ में यह तथ्य सामने आया है कि कॉरपोरेशन ने नए रेट कॉन्ट्रैक्ट करने में एक-एक साल की देरी की। इस लापरवाही के कारण मुफ्त मिलने वाली दवाओं की सप्लाई रुक गई और स्थानीय स्तर पर मनमाने तरीके से खरीदारी करके वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
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नियमों की अनदेखी से गहराया संकट
ऑडिट रिपोर्ट में दवा खरीद की प्रक्रिया में राजस्थान पारदर्शिता लोक उपापन (आरटीपीपी) नियमों के उल्लंघन को रेखांकित किया गया है। आरटीपीपी नियम में स्पष्ट प्रावधान है कि वर्तमान रेट कॉन्ट्रैक्ट खत्म होते ही नए रेट कॉन्ट्रैक्ट प्रभावी होने चाहिए, ताकि दोनों के बीच कोई समय अंतराल न रहे। यदि किसी कारणवश नया रेट कॉन्ट्रैक्ट समय पर तैयार नहीं हो पाता, तो कॉरपोरेशन मौजूदा रेट कॉन्ट्रैक्ट को उन्हीं कीमतों, नियमों और शर्तों पर अधिकतम तीन महीने के लिए बढ़ा सकता है। इसके लिए कॉरपोरेशन को पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार में कीमतें गिरी न हों, लेकिन एजेंसी ने इन प्रावधानों की अनदेखी की।
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अमानक दवाओं की आपूर्ति से बढ़ा जोखिम
ऑडिट रिपोर्ट ने आरएमएससीएल की स्टोरेज व्यवस्था और गुणवत्ता जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच के दौरान दवाओं के 131 ऐसे बैच मिले, जिन्हें क्वालिटी कंट्रोल विंग ने पहले ही नॉन-स्टैंडर्ड यानी अमानक घोषित कर दिया था। इसके बावजूद सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों ने इन अमानक दवाओं को मरीजों में बांटकर उनका उपभोग करवा दिया। कॉरपोरेशन और स्वास्थ्य विभाग ने टेस्ट में फेल हुई दवाओं के उपभोग पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई। गुणवत्ता जांच में विफल रही दवाओं का मरीजों द्वारा उपभोग किया जाना मरीजों की जान को सीधे जोखिम में डालता है और यह पूरी गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को विफल करता है।
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