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राजस्थान: सीएम गहलोत ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- प्रशासनिक सेवा में संशोधन संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन
Sat, 22 Jan 2022 12:21 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 22 Jan 2022 12:21 PM IST
सार
सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि इन संशोधनों से लौहपुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ बताई गई सेवाएं भविष्य में कमजोर होंगी।
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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भारतीय प्रशासनिक सेवा(संवर्ग) नियम, 1954 के नियम 6 (संवर्ग अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में सीएम गहलोत ने कहा है कि प्रस्तावित संशोधन हमारे संविधान की सहकारी संघवाद की भावना को प्रभावित करने वाले हैं। इससे केंद्र एवं राज्य सरकारों के लिए निर्धारित संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन होगा और राज्य में पदस्थापित अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में निर्भय होकर एवं निष्ठापूर्वक कार्य करने की भावना में कमी आएगी।
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सरदार पटेल के भाषण की दिलाई याद
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में सीएम गहलोत ने देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा 10 अक्टूबर, 1949 को संविधान सभा में दिए गए भाषण की याद दिलाई। अखिल भारतीय सेवा पर हुई बहस के दौरान सरदार पटेल ने कहा था कि ‘‘यदि आप एक कुशल अखिल भारतीय सेवा चाहते हैं, तो मैं आपको सलाह देता हूं कि आप सेवाओं को खुलकर अभिव्यक्त होने का अवसर दें। यदि आप सेवाप्राप्तकर्ता हैं तो यह आपका कर्तव्य होगा कि आप अपने सचिव, मुख्य सचिव, या आपके अधीन काम करने वाली अन्य सेवाओं को बिना किसी डर या पक्षपात के अपनी राय व्यक्त करने दें। इसके अभाव में आपके पास अखंड भारत नहीं होगा। एक अच्छी अखिल भारतीय सेवा वह होगी जिसमें अपने मन की बात कहने की स्वतंत्रता है, जिसमें सुरक्षा की भावना है, जो अपनी बात पर अडिग रह सकें और जहां उनके अधिकार और विशेषाधिकार सुरक्षित हों।"
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संशोधन के बाद राज्य सरकार की नहीं रह जाएगी भूमिका
पत्र में कहा गया है कि इस संशोधन के बाद केन्द्र सरकार संबंधित अधिकारी को राज्य सरकार की सहमति के बिना ही अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर बुला सकेगी। हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने अखिल भारतीय सेवाओं की संकल्पना जन कल्याण तथा संघवाद की भावना को ध्यान में रखकर की थी। इस संशोधन से लौहपुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ बताई गई सेवाएं भविष्य में कमजोर होंगी। संशोधन के कारण संविधान द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति तथा जन कल्याण के लक्ष्यों को अर्जित करने के राज्यों के प्रयासों को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी।
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शहीदों के सम्मान मैं दो ज्योति से क्या परेशानी?: गहलोत
इस बीच अमर जवान ज्योति पर गहलोत ने कहा कि इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति को बुझाकर दो ज्योतियों को एक करने का औचित्य हर किसी की समझ से बाहर है। अगर शहीदों के सम्मान में दो अलग-अलग ज्योति जलती रहतीं तो मोदी सरकार को क्या परेशानी थी? 50 वर्षों से शहीदों को नमन कर रही अमर जवान ज्योति को बंद करना शहादत का अपमान है। यह इतिहास बदलने का प्रयास है, लेकिन मोदी सरकार को ये समझ लेना चाहिए कि ऐसे प्रयासों से इतिहास नहीं बदलता बल्कि महान कार्य कर स्वर्णिम इतिहास बनाना पड़ता है। अमर जवान ज्योति पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले सैनिकों की स्मृति थी। इसको बन्द कर 'मर्जर' का नाम देना, उस ज्योति की पवित्रता को कमतर करने का प्रयास है। बांग्लादेश युद्ध विजय के 50 वर्ष पूर्ण होने पर ऐसा कृत्य करना घोर निंदनीय है।