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राजस्थान: सचिन और गहलोत के बीच विवाद होगा दरकिनार, प्रदेश में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के लिए कांग्रेस ने बनाई ये रणनीति

Mon, 01 Nov 2021 05:44 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Mon, 01 Nov 2021 05:44 PM IST
सार

पंजाब, उत्तर प्रदेश और गुजरात के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजस्थान के बड़े नेताओं को कांग्रेस पार्टी अहम जिम्मेदारी सौंप रही है। हाल ही में राजस्थान के दो बड़े मंत्रियों को दो अहम चुनावी राज्यों का प्रभार सौंपा गया है। इनमें गहलोत सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वहीं चिकित्सा और शिक्षा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को गुजरात विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है...

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Rajasthan: Chief Minister Ashok Gehlot may have to expand the cabinet soon
सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट की मुलाकात - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जल्दी ही मंत्रिमंडल विस्तार करना पड़ सकता है। कांग्रेस हाईकमान ने जिस तरह गहलोत सरकार के मंत्रियों को कुछ राज्यों में आगामी चुनावों की ज़िम्मेदारी सौंपी है, उससे ये संकेत मिल रहे हैं। अभी तक गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार को टालते रहे हैं। सियासी जानकार मानते हैं कि इसके पीछे मुख्यमंत्री गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चलने वाली सियासी जंग है। इन दोनों नेताओं की सुलह कराकर आलाकमान ने मामला शांत तो कर दिया था, लेकिन पायलट खेमा मंत्रिमंडल विस्तार में अबतक उतनी जगह नहीं हासिल कर सका है। लेकिन अब कांग्रेस ने राजस्थान के दिग्गज नेता और गहलोत सरकार में मंत्री हरीश चौधरी और डॉ. रघु शर्मा को अहम जिम्मेदारी सौंपकर मंत्रिमंडल विस्तार करने का रास्ता खोल दिया है।

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चुनावी राज्यों की जिम्मेदारियां मिलने के बाद इन मंत्रियों ने पार्टी हाईकमान से एक ही पद पर रहने की मंशा भी जता दी है। शीर्ष नेतृत्व ने भी नेताओं को मंत्री पद छोड़कर अपने प्रभार वाले राज्यों में सक्रिय रहने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस हाईकमान का ये पैंतरा सीएम गहलोत और उनके विरोधी गुटों के बीच चल रही खींचतान को खत्म करने की कोशिश मानी जा रही है। जाहिर है कि अब मुख्यमंत्री को मंत्रिमंडल विस्तार करना ही पड़ेगा।  

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पंजाब और राजस्थान की दी जिम्मेदारी

पंजाब, उत्तर प्रदेश और गुजरात के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजस्थान के बड़े नेताओं को कांग्रेस पार्टी अहम जिम्मेदारी सौंप रही है। हाल ही में राजस्थान के दो बड़े मंत्रियों को दो अहम चुनावी राज्यों का प्रभार सौंपा गया है। इनमें गहलोत सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वहीं चिकित्सा और शिक्षा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को गुजरात विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी राजस्थान के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर और जुबेर खान यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी के साथ चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह असम का प्रभार देख रहे हैं। इसके अलावा उदयपुर से ताल्लुक रखने वाले और पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं। जबकि मोहन प्रकाश और कुलदीप इन्दौरा भी राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारियां देख रहे हैं।

खुल सकता है मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आने वाले दिनों में राजस्थान के नेताओं के हिस्से और भी अहम जिम्मेदारियां आ सकती हैं। पार्टी के कुछ और नेताओं को विभिन्न राज्यों में बड़ी जिम्मेदारियां मिलने के संकेत मिल रहे हैं। इस बीच चुनाव प्रभार पाने वाले राजस्थान के दोनों मंत्रियों हरीश चौधरी और डॉ.रघु शर्मा ने पार्टी आलाकमान से मिलकर एक पद छोड़ने की गुजारिश की है। ये संकेत मिल रहे हैं कि हाईकमान ने भी दोनों नेताओं को मंत्री पद छोड़कर अपने प्रभार वाले राज्यों में सक्रिय रहने को कहा है।

पार्टी नेतृत्व से मिलने के बाद हरीश चौधरी ने मीडिया से कहा था कि वे एक व्यक्ति एक पद के विचार में भरोसा करते हैं। वह पार्टी द्वारा दी गई नई जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से पूरी करना चाहते हैं। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राज्य के कांग्रेस प्रभारी और मुख्यमंत्री को भी वह अपनी मर्जी बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री पद से इस्तीफे को लेकर वह किसी विवाद या अटकलों को हवा नहीं देना चाहते हैं।

'एक व्यक्ति, एक पद' के फॉर्मूले पर काम

अमर उजाला से बातचीत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राशिद किदवई बताते हैं कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार लंबे समय से अटका हुआ है। ये देरी इसलिए हो रही है कि गहलोत पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमे के लोगों को अपने मंत्रिमंडल में ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते हैं। इस बीच हाईकमान ने नई रणनीति अपनाते हुए सीएम गहलोत के खास और महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों को चुनावी राज्यों का प्रभारी बना दिया है। इस नीति के तहत उन लोगों को बाध्य किया रहा है कि आप चुनावी राज्यों की तरफ ज्यादा फोकस करें और राज्यों में कांग्रेस को जीत दिलाकर सरकार बनाने की कोशिश करें, भले ही मंत्री पद की जिम्मेदारी क्यों न छोड़नी पड़े। इसमें गहलोत को भी कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि अगर मंत्री अपना पद छोड़ेंगे तो उन्हें वे जिम्मेदारी किसी अन्य को देनी होगी। ऐसे में गहलोत की मंत्रिमंडल विस्तार टालने की जिद्द अब ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी।



जानकारी के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल करने को तैयार हो गए हैं। इस बारे में 27 अक्तूबर की रात जयपुर में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और सीएम अशोक गहलोत के बीच लंबी चर्चा हुई। गुरुवार को भी फिर दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, पार्टी आलाकमान की मंशा के अनुरूप सीएम दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव के बाद सभी मंत्रियों के इस्तीफे लेंगे और फिर मंत्रिमंडल का पुनर्गठन किया जाएगा। नवंबर के पहले सप्ताह से राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने को लेकर भी माकन व सीएम गहलोत के बीच सहमति बनी है। मंत्रिमंडल विस्तार पर जब स्थानीय मीडिया ने माकन से पूछा तो उन्होंने बस इतना कहा कि 'जल्द'। सचिन पायलट खेमे को लेकर उन्होंने कहा था कि यहां सब एक हैं और कोई खेमा नहीं है।

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