राजस्थान: जेल में ब्रांडेड कपड़े, मोबाइल और गैंगस्टरों का नेटवर्क! बंदी की किताब से अजमेर जेल पर उठे बड़े सवाल
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हार्डकोर बंदी योगेश चारणवासी की जनवरी 2026 में ऑनलाइन प्रकाशित किताब ‘जेल में ब्रांडेड कफन’ चर्चा में है। किताब में जेल के अंदर गैंगस्टरों के कथित प्रभाव, मोबाइल फोन के इस्तेमाल, ब्रांडेड कपड़े-जूते पहुंचने और जेल के अंदर से बाहर आपराधिक नेटवर्क चलाए जाने जैसे गंभीर दावे किए गए हैं।
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अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हार्डकोर बंदी योगेश चारणवासी की जनवरी 2026 में ऑनलाइन प्रकाशित किताब ‘जेल में ब्रांडेड कफन’ ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झुंझुनूं निवासी चारणवासी ने अपनी किताब में जेल के अंदर गैंगस्टरों के कथित प्रभाव, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और जेल से बाहर आपराधिक नेटवर्क चलने को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। हालांकि, जेल प्रशासन ने किताब में किए गए इन दावों की पुष्टि से इनकार किया है।
जेल में ब्रांडेड कपड़े और जूते पहुंचने का दावा
किताब में दावा किया गया है कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद जेल में बंद कुख्यात अपराधियों तक ब्रांडेड कपड़े और जूते पहुंचते हैं। चारणवासी ने एक प्रहरी पर एक लाख रुपये लेकर मोबाइल फोन उपलब्ध कराने का सीधा आरोप भी लगाया है। उसके मुताबिक, गैंगस्टर जेल के अंदर मोबाइल फोन के जरिए अपनी प्रेमिकाओं और दूसरे लोगों से बातचीत करते हैं। किताब में यह भी दावा किया गया है कि मोबाइल फोन के जरिए जेल के अंदर से ही बाहर चल रहे अपराध के नेटवर्क को संचालित किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जेल प्रशासन ने भी इन दावों को सही नहीं माना है।
लॉरेंस बिश्नोई समेत कुख्यात बंदियों का जिक्र
किताब में साल 2021 के दौरान इसी जेल में बंद रहे कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भी जिक्र है। चारणवासी का दावा है कि लॉरेंस बिश्नोई से मुलाकात करने के लिए कुछ बंदियों ने करीब 20 दिन तक भूख हड़ताल की थी। चारणवासी ने किताब में अलग-अलग आपराधिक गिरोहों के बीच कथित संबंधों और उनके नेटवर्क को लेकर भी विस्तार से लिखा है। उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।
एकांत सेल में लिखी डायरी से तैयार हुई किताब
चारणवासी को 6 जून 2020 को झुंझुनूं जेल से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया था। यहां उसे एकांत सेल में रखा गया। उसके अनुसार, इसी दौरान उसने जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए कागज और पेन पर नियमित रूप से डायरी लिखना शुरू किया। बाद में इसी डायरी और लिखी गई सामग्री को उसने किताब का रूप दिया। चारणवासी का दावा है कि ‘जेल में ब्रांडेड कफन’ में राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश की जेलों में उसके अनुभव भी शामिल हैं।
इसी जेल में हुई थी डकैत जगन गुर्जर की हत्या
अजमेर की यह हाई सिक्योरिटी जेल पहले भी एक बड़ी वारदात को लेकर चर्चा में रही है। इसी कारागार में 29 जून को कैदी विष्णु जाट ने कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। अब बंदी की किताब ऑनलाइन प्रकाशित होने का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन भी सवालों के घेरे में है। हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि बंदी की किताब ऑनलाइन प्रकाशित होने की जानकारी प्रशासन के संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह जानकारी नहीं है कि किताब प्रकाशित करने की अनुमति किसने दी और इसकी पांडुलिपि जेल से कब और कैसे बाहर गई।
अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि जेल में सामान्य प्रक्रिया के तहत बंदियों को पढ़ाई-लिखाई के लिए कागज, कॉपी, पेन और किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। अब प्रशासन इस बात की जानकारी जुटा रहा है कि बंदी की लिखी सामग्री जेल से बाहर कैसे पहुंची और ऑनलाइन प्रकाशित कैसे हुई।