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राजस्थान विधानसभा चुनाव: यहां जमकर भुनाया जा रहा है राम मंदिर मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Nov 2018 07:41 PM IST
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में राम मंदिर मुद्दा जमकर गूंज रहा है। भाजपा के नेता राम मंदिर मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं। इधर, कांग्रेस के नेता आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा को चुनावों में राम मंदिर मुद्दा याद आ जाता है। राजस्थान में हाल ही दो दिवसीय दौरे पर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी धर्मसभा में अपने भाषण में राम मंदिर पर बोला, जिससे ये मुद्दा और गरमा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा कभी भी खुलकर नहीं बोलती, लेकिन ये पार्टी मुसलमानों को अपना वोट बैंक नहीं मानती, जबकि कांग्रेस ने नेता जानते हैं कि नब्बे प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता इनकी पार्टी का समर्थन करते हैं। इन हालातों में भाजपा राम मंदिर मुद्दे को जोर-शोर से भुनाकर हिंदू वोटों को आकर्षित करना चाहती है।
आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 2011 में अल्पसंख्यक आबादी 11.4 प्रतिशत थी और राजनीतिक दल मानते हैं कि अब ये आबादी बढ़कर 13 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। प्रदेश के जयपुर, नागौर, सीकर, चुरू, बाड़मेर, झुंझुनूं, जैसलमेर, भरतपुर, अलवर, अजमेर और टोंक जिले में 13 से 16 प्रतिशत तक अल्पसंख्यक आबादी है। जोधपुर, कोटा, सवाईमाधोपुर, उदयपुर जैसे कुछ जिलों में भी मुसलमान 10 से 12 प्रतिशत तक हैं। राजस्थान की मुसलमान आबादी में मेव, कायमखानी, दाउदी बोहरा, खानजादे, सिन्धी आदि अच्छी संख्या में हैं। शेखावाटी के सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिलों में कायमखानी और मेवात व मत्स्यनगर के अलवर व भरतपुर जिले के क्षेत्रों में मेव रहते है। इधर, बाड़मेर-जैसलमेर में सिन्धी मुसलमान और उदयपुर में दाउदी बोहरा अच्छी संख्या में रहते हैं। हालांकि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए मुस्लिम आबादी बहुत प्रभावशाली भूमिका नहीं निभाती है, लेकिन करीब 40-50 सीटों पर मुख्य दो उम्मीदवार की हार-जीत तय करने में इनका योगदान जरूर होता है।
कांग्रेस पर भाजपा ऐसे साध रही है निशाना
चुनावी सरगर्मियों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जलौर स्थित मलकेश्वर मठ में कहा था कि इस दीपावली पर देश व दुनिया अद्भुत नजारा देखेगी। इस दिन भगवान राम के नाम का दीपक जलाने के साथ भव्य व शुभ कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि दीपावली के अवसर पर सभी राम नाम का दीपक अपने घर में जरूर जलाएं, जिससे भविष्य के होने वाले कार्यों में कोई विघ्न न पड़े। फिर, केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने भी कहा कि कांग्रेस को यह जरूर बताना चाहिए कि वह राम जन्म भूमि पर राम मंदिर चाहती है या नहीं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर भाजपा के लिए कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है, बल्कि यह तो देश व आस्था का मुद्दा है। जावड़ेकर ने कांग्रेस पर बदनाम करने का आरोप लगाया। देश में राम मंदिर की लड़ाई पांच सौ सालों से चली आ रही है। जब चुनाव नहीं होते थे, तब भी इस देश के लोगों ने राम मंदिर के लिए लड़ाई लड़ी।
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कांग्रेस भी कर रही पलटवार
कांग्रेस भी राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा पर यह कहते हुए खूब वार कर रही है कि भाजपा सरकारों ने राम मंदिर के लिए कुछ भी नहीं किया। कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि चुनाव में राम मंदिर कांग्रेस का मुद्दा नहीं है। ये चुनाव में उठाए जाने वाले भाजपा के मुद्दे हैं। इन मुद्दों के जरिए भाजपा भावनाएं भड़काकर समाजों या समुदायों को लड़वाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुद्दे लोगों को जोड़ने वाले हैं, तोड़ने वाले नहीं। कांग्रेस जाति-धर्म के आधार पर चुनाव नहीं लड़ती। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को राम मंदिर याद आ जाता है। भाजपा का राम पर भरोसा केवल वोट पाने के लिए ही है। राम मंदिर के लिए भाजपा ने कुछ भी नहीं किया है।
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आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 2011 में अल्पसंख्यक आबादी 11.4 प्रतिशत थी और राजनीतिक दल मानते हैं कि अब ये आबादी बढ़कर 13 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। प्रदेश के जयपुर, नागौर, सीकर, चुरू, बाड़मेर, झुंझुनूं, जैसलमेर, भरतपुर, अलवर, अजमेर और टोंक जिले में 13 से 16 प्रतिशत तक अल्पसंख्यक आबादी है। जोधपुर, कोटा, सवाईमाधोपुर, उदयपुर जैसे कुछ जिलों में भी मुसलमान 10 से 12 प्रतिशत तक हैं। राजस्थान की मुसलमान आबादी में मेव, कायमखानी, दाउदी बोहरा, खानजादे, सिन्धी आदि अच्छी संख्या में हैं। शेखावाटी के सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिलों में कायमखानी और मेवात व मत्स्यनगर के अलवर व भरतपुर जिले के क्षेत्रों में मेव रहते है। इधर, बाड़मेर-जैसलमेर में सिन्धी मुसलमान और उदयपुर में दाउदी बोहरा अच्छी संख्या में रहते हैं। हालांकि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए मुस्लिम आबादी बहुत प्रभावशाली भूमिका नहीं निभाती है, लेकिन करीब 40-50 सीटों पर मुख्य दो उम्मीदवार की हार-जीत तय करने में इनका योगदान जरूर होता है।
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कांग्रेस पर भाजपा ऐसे साध रही है निशाना
चुनावी सरगर्मियों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जलौर स्थित मलकेश्वर मठ में कहा था कि इस दीपावली पर देश व दुनिया अद्भुत नजारा देखेगी। इस दिन भगवान राम के नाम का दीपक जलाने के साथ भव्य व शुभ कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि दीपावली के अवसर पर सभी राम नाम का दीपक अपने घर में जरूर जलाएं, जिससे भविष्य के होने वाले कार्यों में कोई विघ्न न पड़े। फिर, केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने भी कहा कि कांग्रेस को यह जरूर बताना चाहिए कि वह राम जन्म भूमि पर राम मंदिर चाहती है या नहीं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर भाजपा के लिए कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है, बल्कि यह तो देश व आस्था का मुद्दा है। जावड़ेकर ने कांग्रेस पर बदनाम करने का आरोप लगाया। देश में राम मंदिर की लड़ाई पांच सौ सालों से चली आ रही है। जब चुनाव नहीं होते थे, तब भी इस देश के लोगों ने राम मंदिर के लिए लड़ाई लड़ी।
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कांग्रेस भी कर रही पलटवार
कांग्रेस भी राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा पर यह कहते हुए खूब वार कर रही है कि भाजपा सरकारों ने राम मंदिर के लिए कुछ भी नहीं किया। कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि चुनाव में राम मंदिर कांग्रेस का मुद्दा नहीं है। ये चुनाव में उठाए जाने वाले भाजपा के मुद्दे हैं। इन मुद्दों के जरिए भाजपा भावनाएं भड़काकर समाजों या समुदायों को लड़वाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुद्दे लोगों को जोड़ने वाले हैं, तोड़ने वाले नहीं। कांग्रेस जाति-धर्म के आधार पर चुनाव नहीं लड़ती। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को राम मंदिर याद आ जाता है। भाजपा का राम पर भरोसा केवल वोट पाने के लिए ही है। राम मंदिर के लिए भाजपा ने कुछ भी नहीं किया है।