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Rajasthan Assembly Elections 2018: राजस्थान के रण में कांग्रेस की जीत की 5 सबसे बड़ी वजहें 

Wed, 12 Dec 2018 01:18 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Dec 2018 01:18 PM IST
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Rajasthan assembly election results 2018: Rise of congress in Rajasthan
सचिन पायलट और अशोक गहलोत - फोटो : ANI
राजस्थान में कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी करते हुए भाजपा हार झेलने पर मजबूर कर दिया। युवा सचिन पायलट और अनुभवी अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस ने 5 साल बाद सत्ता में वापसी की। अब कांग्रेस में सीएम पद के दावेदार को लेकर माथापच्ची का दौर चल रहा है। बहरहाल, जानते हैं कि कांग्रेस को  किन 5 वजहों से यहां जीत मिली।  
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सत्ता विरोधी रुझान 

राजस्थान में इस बार सत्ता विरोधी रुझान चरम पर था। जमीनी हालात की बात करें तो अधिकतर लोगों का कहना था कि वसुंधरा राजे उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। हालांकि, लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी से शिकायत नहीं थी, वह स्वभाविक पसंद बनकर उभरे। लेकिन वसुंधरा राजे से लोग नाराज दिखे। अमर उजाला के चुनावी रथ के दौरे में भी बातचीत के दौरान लोगों ने ऐसा ही कहा। बातचीत में साफ पता चला कि अधिकतर जनता वसुंधरा से नाराज है। मतदाताओं के इसी रुख ने कांग्रेस की वापसी में बड़ी भूमिका निभाई। 
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गहलोत-सचिन की जोड़ी 

अशोक गहलोत और सचिन पायलट की जोड़ी ने इस बार कांग्रेस के लिए जीत का आधार तैयार किया। कांग्रेस हाईकमान को भी इसका श्रेय जाना चाहिए कि उसने अनुभवी और युवा नेता की जोड़ी को चुनाव की कमान सौंपी। लोगों से बातचीत में पता चला कि गहलोत के लिए अधिकतर लोगों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही और सचिन को भी लोग पसंद करते हैं। सचिन पायलट को तो पहली बार विधानसभा चुनाव में उतारा गया था। दोनों ही सीएम पद के दावेदार भी हैं। 
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किसानों की नाराजगी 

इस बार चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने किसानों से उनका कर्ज माफ करने का वादा किया। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर किसानों से किया वादा पूरा होगा। पंजाब में कांग्रेस सरकार ने इस तरह का फैसला भी लिया था। लगता है कि कांग्रेस का ये वादा किसानों को पसंद आया और उन्होंने कांग्रेस को वोट देकर आजमाने का फैसला किया। 

नाराज जाट-राजपूत वोटर 

इस बार राजपूत वोटर भी वसुंधरा सरकार से खासा नाराज दिखा। राजपूत बहुल इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों की हार इसकी इसकी तस्दीक भी करती है। राजपूतों की नाराजगी की वजहों राजमहल भूमि विवाद, पद्मावत विवाद, आनंदपाल मुठभेड़ कांड जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। कई राजपूत संगठनों ने वसुंधरा सरकार के खिलाफ विरोध का एलान पहले ही कर दिया था। इसके अलावा जाट नेता हनुमान बेनीवाल ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया। वह खींवसर से 17 हजार मतों से जीते साथ ही उनकी पार्टी के दूसरे विधायक ने भी जीत हासिल की। वसुंधरा इन्हें मनाने में पूरी तरह नाकाम रहीं। इसकी नतीजा हार के रूप में सामने आया। 


सियासी परंपरा 

कांग्रेस की जीत की एक वजह यहां की सियासी परंपरा भी कही जा सकती है। राज्य में 1993 के बाद से कभी भी किसी पार्टी की लगातार दो बार सरकार नहीं रही है। 2013 में भाजपा ने वसुंधरा राजे के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत हासिल किया था। तब तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने काम भी अच्छा किया था और कांग्रेस के खिलाफ कोई माहौल भी नहीं था, बावजूद इसके कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब 2018 में कांग्रेस ने उसी अंदाज में वापसी करते हुए सियासी परंपरा को बरकरार रखा। 

 
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