राजस्थान चुनाव: मतदान में 1 से 2 फीसदी उतार-चढ़ाव से चली जाती है सत्ता, इस बार क्या होगा
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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए बंपर 74.38 फीसदी वोटिंग हुई। पिछले चुनाव की तुलना में यह आधा फीसदी से कुछ ज्यादा है। राज्य के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि साल 1993 से साल 2013 तक के विधानसभा चुनावों में कभी एक फीसदी से कम तो कभी 3 से 4 फीसदी ज्यादा वोटिंग होने पर सरकारें बदल गईं हैं।
साल 1993 से लेकर साल 2013 तक पिछले 20 सालों के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालने पर जो तथ्य सामने आते हैं वो काफी दिलचस्प हैं। आकंड़ें बताते हैं कि सिर्फ एक से दो फीसदी कम या ज्यादा मतदान होने से भी राज्य में सत्ताधारी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा है।
साल 2013 में 2014 के लोकसभा चुनाव की बयार शुरू हो गई थी, इस वजह से मोदी लहर ने राजस्थान में मतदान में 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि इससे पहले हुए चार चुनावों में ऐसा पाया गया कि कि कभी एक फीसदी कम तो कभी तीन से चार फीसदी ज्यादा मतदान होने पर राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया।
1993 का चुनाव
3.5 फीसदी मतदान बढ़ा, भाजपा- 95 सीटें
राज्य में राष्ट्रपति शासन था। विधानसभा चुनाव में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 60.59 फीसदी मतदान हुआ। भाजपा के वोट शेयर पहली बार 13 फीसदी बढ़े। भाजपा को 38.60 फीसदी वोट और 95 सीटें मिलीं। कांग्रेस विपक्ष में बैठी उसे 76 सीटें मिलीं।
1998 का चुनाव
3 फीसदी मतदान बढ़ा, कांग्रेस- 153 सीटें
भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी की वजह से वोटिंग में 3 फीसदी का इजाफा हुआ। कांग्रेस ने अब तक की सबसे ज्यादा 153 सीटें जीतीं। कांग्रेस के खाते में 77 सीटों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भाजपा 62 सीटों के नुकसान के साथ 95 में से सिर्फ 33 सीटें ही बचा पाई।
2003 का चुनाव
4 फीसदी मतदान बढ़ा, भाजपा- 120 सीटें
कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता विरोध लहर के कारण लगभग 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 67.18 फीसदी मतदान हुआ। भाजपा ने 87 सीटें के फायदे के साथ 120 सीटें जीतीं। कांग्रेस 97 सीटों के नुकसान के साथ 56 सीटें जीत पाई।
2008 का चुनाव
1 फीसदी कम मतदान हुआ, कांग्रेस- 96 सीटें
इस साल पिछले चुनाव की तुलना में करीब एक फीसदी कम यानी 66.49 फीसदी मतदान हुआ। भाजपा को सीटें मिलीं, 42 सीटों का नुकसान हुआ। कांग्रेस ने 30 सीटों के फायदे के साथ 96 सीटें जीतीं।
2013 का चुनाव
9 फीसदी मतदान बढ़ा, भाजपा- 163 सीटें
भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था। मोदी लहर के कारण राज्य में पहली बार 9 फीसदी के इजाफे के साथ मतदान 66 से 75 फीसदी हो गया। भाजपा को 163 सीटों पर जीत हासिल हुई। जबकि कांग्रेस को महज 21 सीटें मिल पाई।