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लोकसभा में राजस्थान का 'कोटा', ओम बिड़ला बने अध्यक्ष

Wed, 19 Jun 2019 12:39 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, जयपुर
न्यूज डेस्क, जयपुर Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 19 Jun 2019 12:39 PM IST
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Om Birla: From Rajasthan student leader to Lok Sabha Speaker
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला - फोटो : PTI

राजस्थान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और कोटा-बूंदी संसदीय सीट से दूसरी बार सांसद बने ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया है। बिड़ला का लोकसभा अध्यक्ष बनना इसलिए भी तय था, क्योंकि कांग्रेस या विपक्ष की ओर से किसी सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया था। बिड़ला राजस्थान मूल से लोकसभा अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता हैं।

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इससे पहले दिसंबर 1984 में सीकर सांसद रहते हुए बलराम जाखड़ लोकसभा अध्यक्ष बने थे, लेकिन वे मूलत: पंजाब के निवासी थे। गौरतलब है कि पहली बार सांसद चुनकर शिवसेना के मनोहर जोशी 2002 में लोकसभा अध्यक्ष बने थे। हालांकि उनके पास महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहने का अनुभव भी था। जोशी ने टीडीपी के जीएमसी बालयोगी का स्थान लिया था। बालयोगी अध्यक्ष बनने वाले दूसरी बार के सांसद थे। 57 साल के बिड़ला लोकसभा चुनाव में कोटा से कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 2.5 लाख वोटों से हराकर दूसरी बार सांसद बने हैं।
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4 दिसंबर 1962 को जन्मे ओम बिड़ला पिछले 30 साल से संगठन में सक्रिय हैं। उन्होंने अब तक पांच चुनाव लड़े हैं और पांचों ही जीते हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और दूसरी बार सांसद बने हैं। वे 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनाव में कोटा-बूंदी सीट से पहली बार सांसद बने थे। इसके बाद अब 2019 में इसी सीट से सांसद बने हैं।
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इससे पहले 2003, 2008 और 2013 में कोटा से ही विधायक चुने गए थे। उन्होंने छात्रसंघ से राजनीति कॅरियर की शुरुआत की थी। इसके बाद 1992 से 97 तक प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे। बाद में राजस्थान और राष्ट्रीय स्तर पर कोऑपरेटिव मूवमेंट से भी जुड़े। बिड़ला 2003 में पहली बार कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल को हराकर विधायक चुने गए थे।

लोकसभा अध्यक्ष बनने की वजह

बिड़ला को संघ की पसंद माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह से भी उनके सीधे संबंध हैं। गुजरात व बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव तथा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के भी नजदीकी माने जाते हैं। शाह से रिश्ते उस वक्त मजबूत हुए जब यूपीए सरकार में शाह को गुजरात से बदर किया गया था।

राजस्थान के लिए संदेश

बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाया जाना राजस्थान की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इस फैसले से राजे के विरोधी खेमे को मजबूत किया गया है। बिड़ला वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकारों के समय दो बार विधायक थे, लेकिन राजे से रिश्तों में खटास के कारण उन्हें कभी मंत्री नहीं बनाया गया था।

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