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कुचेरा चेयरमैन चुनाव से पहले एसीबी की एंट्री: मिर्धा समेत तत्कालीन अधिकारियों पर केस दर्ज, बढ़ी सियासी गर्मी
Sat, 19 Sep 2026 09:11 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
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Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 09:11 PM IST
सार
कुचेरा नगर पालिका में चेयरमैन चुनाव से पहले करीब सात साल पुराने परिवाद पर एसीबी में मुकदमा दर्ज होने का मामला सामने आया है। एसीबी दस्तावेजों में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा समेत तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज हैं।
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पुलिस ने होटल पर चस्पाया नोटिस
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
नागौर की कुचेरा नगर पालिका में चेयरमैन चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। चेयरमैन की कुर्सी को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच करीब सात साल पुराने एक परिवाद पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी में मुकदमा दर्ज होने का मामला सामने आया है। एसीबी की ओर से साझा किए गए दस्तावेजों में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा समेत नगर पालिका के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज हैं।
दस्तावेज के अनुसार, शिकायतकर्ता शैतान राम टाक की ओर से नगर पालिका कुचेरा में वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुए विभिन्न विकास कार्यों और ठेकों को लेकर परिवाद पेश किया गया था। परिवाद संख्या 167/2018 दिनांक 4 मई 2018 को दर्ज होने का उल्लेख दस्तावेज में है।
किस-किस के नाम दर्ज?
एसीबी के दस्तावेज में आरोपी विवरण के तौर पर तत्कालीन पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी रामरतन, पिन्टूलाल और उम्मेदसिंह, तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता कमलेश फुलफागर और नरेंद्र सिंह जाटव समेत अन्य के नाम दर्ज हैं।दस्तावेज में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं और धारा 120-B IPC के तहत अपराध प्रथम दृष्टया पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
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सफाई ठेकों में अनियमितता के आरोप
परिवाद में नगर पालिका द्वारा सफाई और घर-घर कचरा संग्रहण के लिए अलग-अलग फर्मों को दिए गए ठेकों पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार फर्मों द्वारा कार्यरत कर्मचारियों का बीमा और पीएफ नहीं कराया गया। साथ ही, दस्तावेजों में दर्ज कर्मचारियों और मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में कथित अंतर का भी आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता ने कुछ फर्मों को तत्कालीन चेयरमैन से जुड़े लोगों की फर्म बताते हुए ठेकों के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए थे।
सड़क और नाली निर्माण भी जांच के दायरे में
परिवाद में कुचेरा के विभिन्न वार्डों में कराए गए सड़क, नाली और नाला निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ कार्यों में निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया और निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़कें एवं नालियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा, शिकायत में निर्माण सामग्री की आपूर्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, बाद में पैचवर्क के नाम पर राशि खर्च किए जाने का भी दावा किया गया।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
मामले में नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत की गई थी। परिवाद में आरोप लगाया गया कि टेंडर की विज्ञप्तियां बड़े समाचार पत्रों के बजाय छोटे समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई जाती थीं, जिससे आम लोगों तक टेंडर की जानकारी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सके। शिकायतकर्ता ने इसे कथित तौर पर चुनिंदा लोगों को ठेके देने से जोड़ते हुए जांच की मांग की थी।
ये भी पढ़ें- झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की फिर बिगड़ी तबीयत, सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती
आरटीआई से शुरू हुई जानकारी की मांग
दस्तावेज में बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने 29 दिसंबर 2017 को RTI के तहत नगर पालिका से विभिन्न कार्यों और टेंडरों से संबंधित जानकारी मांगी थी। जानकारी नहीं मिलने पर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, जयपुर के समक्ष द्वितीय अपील दायर किए जाने का भी उल्लेख है। दस्तावेज में अपील संख्या SA 6425/2018 दर्ज होने की बात कही गई है। इसके बाद वर्ष 2015 से 2018 के बीच जारी कार्यादेशों का अध्ययन किए जाने पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया संकेत मिलने का उल्लेख ACB दस्तावेज में किया गया है।
धारा 17A के तहत पूर्वानुमोदन का उल्लेख
दस्तावेज में 18 सितंबर 2026 के पत्र के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत पूर्वानुमोदन प्राप्त होने का उल्लेख है। इसके बाद संबंधित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने की बात दस्तावेज में दर्ज है। हालांकि, एफआईआर में दर्ज आरोपों को अभी अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
चुनाव से पहले एसीबी की एंट्री ने बढ़ाई सियासी गर्मी
कुचेरा में चेयरमैन चुनाव से पहले यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नगर पालिका में सत्ता को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। पार्षदों की लामबंदी, कथित अपहरण की शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर पहले से ही सियासी बयानबाजी जारी है। कांग्रेस नेता मनीष मिर्धा ने भाजपा पर जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं करने और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले सामने आ रहे घटनाक्रमों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, इन राजनीतिक आरोपों पर भाजपा का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
तेजपाल मिर्धा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में
इधर, तेजपाल मिर्धा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने लिखा- जिस दिन जवाब देना शुरू कर दिया हमने, यकीन मानिए। आपके लिए हर सवाल सहना मुश्किल हो जाएगा। कुचेरा में अब चेयरमैन की कुर्सी की लड़ाई केवल संख्या बल तक सीमित नहीं रह गई है। पुराने एसीबी मामले, पार्षदों से जुड़े विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। अब निगाहें चेयरमैन चुनाव की वोटिंग पर हैं, जहां यह तय होगा कि कुचेरा नगर पालिका की सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ जाती है।
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दस्तावेज के अनुसार, शिकायतकर्ता शैतान राम टाक की ओर से नगर पालिका कुचेरा में वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुए विभिन्न विकास कार्यों और ठेकों को लेकर परिवाद पेश किया गया था। परिवाद संख्या 167/2018 दिनांक 4 मई 2018 को दर्ज होने का उल्लेख दस्तावेज में है।
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किस-किस के नाम दर्ज?
एसीबी के दस्तावेज में आरोपी विवरण के तौर पर तत्कालीन पालिकाध्यक्ष तेजपाल मिर्धा, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी रामरतन, पिन्टूलाल और उम्मेदसिंह, तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता कमलेश फुलफागर और नरेंद्र सिंह जाटव समेत अन्य के नाम दर्ज हैं।दस्तावेज में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं और धारा 120-B IPC के तहत अपराध प्रथम दृष्टया पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
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सफाई ठेकों में अनियमितता के आरोप
परिवाद में नगर पालिका द्वारा सफाई और घर-घर कचरा संग्रहण के लिए अलग-अलग फर्मों को दिए गए ठेकों पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार फर्मों द्वारा कार्यरत कर्मचारियों का बीमा और पीएफ नहीं कराया गया। साथ ही, दस्तावेजों में दर्ज कर्मचारियों और मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में कथित अंतर का भी आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता ने कुछ फर्मों को तत्कालीन चेयरमैन से जुड़े लोगों की फर्म बताते हुए ठेकों के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए थे।
सड़क और नाली निर्माण भी जांच के दायरे में
परिवाद में कुचेरा के विभिन्न वार्डों में कराए गए सड़क, नाली और नाला निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ कार्यों में निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया और निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़कें एवं नालियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा, शिकायत में निर्माण सामग्री की आपूर्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, बाद में पैचवर्क के नाम पर राशि खर्च किए जाने का भी दावा किया गया।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
मामले में नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत की गई थी। परिवाद में आरोप लगाया गया कि टेंडर की विज्ञप्तियां बड़े समाचार पत्रों के बजाय छोटे समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई जाती थीं, जिससे आम लोगों तक टेंडर की जानकारी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सके। शिकायतकर्ता ने इसे कथित तौर पर चुनिंदा लोगों को ठेके देने से जोड़ते हुए जांच की मांग की थी।
ये भी पढ़ें- झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की फिर बिगड़ी तबीयत, सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती
आरटीआई से शुरू हुई जानकारी की मांग
दस्तावेज में बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने 29 दिसंबर 2017 को RTI के तहत नगर पालिका से विभिन्न कार्यों और टेंडरों से संबंधित जानकारी मांगी थी। जानकारी नहीं मिलने पर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, जयपुर के समक्ष द्वितीय अपील दायर किए जाने का भी उल्लेख है। दस्तावेज में अपील संख्या SA 6425/2018 दर्ज होने की बात कही गई है। इसके बाद वर्ष 2015 से 2018 के बीच जारी कार्यादेशों का अध्ययन किए जाने पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया संकेत मिलने का उल्लेख ACB दस्तावेज में किया गया है।
धारा 17A के तहत पूर्वानुमोदन का उल्लेख
दस्तावेज में 18 सितंबर 2026 के पत्र के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत पूर्वानुमोदन प्राप्त होने का उल्लेख है। इसके बाद संबंधित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने की बात दस्तावेज में दर्ज है। हालांकि, एफआईआर में दर्ज आरोपों को अभी अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
चुनाव से पहले एसीबी की एंट्री ने बढ़ाई सियासी गर्मी
कुचेरा में चेयरमैन चुनाव से पहले यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नगर पालिका में सत्ता को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। पार्षदों की लामबंदी, कथित अपहरण की शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर पहले से ही सियासी बयानबाजी जारी है। कांग्रेस नेता मनीष मिर्धा ने भाजपा पर जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं करने और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले सामने आ रहे घटनाक्रमों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, इन राजनीतिक आरोपों पर भाजपा का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
तेजपाल मिर्धा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में
इधर, तेजपाल मिर्धा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने लिखा- जिस दिन जवाब देना शुरू कर दिया हमने, यकीन मानिए। आपके लिए हर सवाल सहना मुश्किल हो जाएगा। कुचेरा में अब चेयरमैन की कुर्सी की लड़ाई केवल संख्या बल तक सीमित नहीं रह गई है। पुराने एसीबी मामले, पार्षदों से जुड़े विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। अब निगाहें चेयरमैन चुनाव की वोटिंग पर हैं, जहां यह तय होगा कि कुचेरा नगर पालिका की सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ जाती है।