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Rajasthan: 5000 साल तक गूंजेगा चंबल रिवर फ्रंट का घंटा, 8 किमी दूर तक सुनाई देगी आवाज, ढलाई में बने 5 रिकॉर्ड
Mon, 21 Aug 2023 12:38 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Mon, 21 Aug 2023 12:38 PM IST
सार
कोटा में चंबल रिवर फ्रंट पर लगने वाले घंटे की ढलाई पूरी हो चुकी है। 79 हजार किलो के इस घंटे की गूंज आठ किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी। यह घंटा पांच हजार साल तक सुरक्षित रहेगा।
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कोटा में 79 हजार किलो के घंटे को ढाला गया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोटा में मूर्त रूप ले चुके वर्ल्ड हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट में नित-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। जैसे-जैसे इसके लोकार्पण की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे इसमें नए वर्ल्ड रिकॉर्ड शामिल हो रहे हैं। चंबल रिवर फ्रंट के लिए बनाए गए घंटे के निर्माण के दौरान भी पांच नए विश्व कीर्तिमान बने हैं।
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79 हजार किलो वजनी घंटे की ढलाई (कास्टिंग) का काम पूरा हो चुका है। इस घंटे को बनाने में 13 धातुओं के मिश्रण का इस्तेमाल हुआ है। यह सिंगल पीस कास्टिंग (बिना जोड़) वाला घंटा कुछ दिनों बाद चंबल रिवर फ्रंट की शोभा बढ़ाएगा। इसका व्यास 8.5मीटर है और ऊंचाई 9.25 मीटर। इसे बनाने वाले कास्टिंग इंजीनियर का दावा है की इसकी आवाज 8 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी। चीन और रूस में बने घंटे इससे भी बड़े हैं। ये उन दोनों घंटों से मजबूत है। मजबूती की वजह से ही इसका वजन 79 हजार किलो तक पहुंचा है। पहले तय हुआ था कि इसे 57 हजार किलो का ही बनाया जाए।
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3000 डिग्री सेल्सियस पर पिघलाया
प्रोजेक्ट इंजीनियर देवेंद्र आर्य का कहना है कि घंटे की ढलाई के लिए पहले धातुओं को 3000 डिग्री सेल्सियस पर पिघलाया गया। ग्रीन सिलिका सैंड से बने विशेष सांचे में विशेष पात्रों की मदद से पिघली धातुओं के मिश्रण को डाला गया। इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भट्टी का तापमान तीन से चार हजार डिग्री सेल्सियस मेंटेन करना अपने आप में बड़ी बात है। इसके लिए गुजरात से 35 भट्टियां मंगवाई गई। भट्टियों को जलाकर मॉल्ड बॉक्स में धातुओं का मिश्रण डालने से पहले इसका तापमान 400 डिग्री तक ले जाया गया। इस तापमान पर भट्टी को सेट करना आवश्यक था। भट्टी का तापमान 400 डिग्री पर सेट नहीं होता तो घंटे का 3डी डिजाइन नहीं बन पाता। 4- 5 दिन से भट्टियों को चालू करने के प्रयास हो रहे थे। कास्टिंग की प्रोसेस 16 अगस्त को करनी थी लेकिन चंबल के कारण नमी थी और यह परेशान कर रही थी।
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1200 का स्टाफ कार्यरत
प्रोजेक्ट इंजीनियर आर्य के अनुसार इस कार्य में 200 एक्सपर्ट और 1000 कर्मचारी दिन-रात लगे हैं। एक हजार कर्मचारियों ने सालभर 10 अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम किया है। 200 कर्मचारियों ने पिछले 40 घंटे नॉन-स्टॉप मेहनत कर इस कीर्तिमान को स्थापित किया है। इस कार्य के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। भट्टी वाले शेड में एक विशेष प्रकार की ड्रेस पहनने के बाद ही प्रवेश दिया जाता था। कास्टिंग वाले दिन कर्मचारियों को 10 किलो ग्लूकोज और गुड का पानी पीने को दिया गया ताकि हीट का असर उन पर कम से कम हो। इस कार्य में अब तक 65 हजार लीटर डीजल और 600 एलपीजी सिलेंडरों को उपयोग में लिए जा चुका है।
पांच विश्व कीर्तिमान:-
- ज्वाइंट लेस चेन (इन एज कास्ट कंडीशन) घंटा बजाने के लिए बनाई गई चेन जॉइंट लेस है। बिना जोड़ के बनाई गई यह दुनिया की सबसे लंबी चेन है। करीब 6 मीटर लंबी और 425 किलो वजनी है।
- सबसे बड़ा 3डी फाइबर प्रोडक्टः घंटा बनाने से पहले बनाई गई 3 डी फाइबर डिजाइन भी अब तक की सबसे बड़ी फाइबर डिजाइन है।
- विश्व का सबसे ऊंचा जर्मन हैंगर(फैब्रिक कोटेड): घंटी के निर्माण के लिए 75 फीट ऊंची अस्थाई फैक्ट्री का निर्माण किया गया। जर्मन हैंगर एक अस्थाई स्ट्रक्चर होता है जिसे निर्माण के बाद हटा दिया जाता है।
- 35 ऑयल फायर्ड फर्नेस वर्किंग अंडर वन रूफ: एक छत के नीचे 35 भट्टियों को जलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड।
- विश्व का सबसे बड़ा ग्रीन सिलिका सैंड मॉल्ड: ग्रीन सिलिका एक तरह की मिट्टी होती है, जो गर्म होने के बाद पत्थर बन जाती है। इस घंटे के निर्माण में 2200 टन ग्रीन सिलिका सैंड का उपयोग किया है।