फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jodhpur News ›   RJ HC Platinum Jubilee: PM Modi said- National unity is the foundation stone of our judicial system

RJ High Court Platinum Jubilee: प्रधानमंत्री मोदी ने फिर किया ‘सेक्युलर सिविल कोड’ का जिक्र, कही ये बात

Sun, 25 Aug 2024 06:17 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जोधपुर/राजस्थान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जोधपुर/राजस्थान Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sun, 25 Aug 2024 06:17 PM IST
सार

Rajasthan High Court Platinum Jubilee: राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के प्लेटिनम जुबली समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जोधपुर में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने हाईकोर्ट संग्रहालय का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।

विज्ञापन
RJ HC Platinum Jubilee: PM Modi said- National unity is the foundation stone of our judicial system
जोधपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर रविवार को जोधपुर हाईकोर्ट में प्लेटिनम जुबली समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पीएम मोदी ने राजस्थान हाईकोर्ट म्यूजियम का उद्घाटन भी किया। उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू करने, आर्टिकल 370, सीएए को समाप्त करने के लिए सरकार की तरफ से किए गए कामों का जिक्र किया।

विज्ञापन


विज्ञापन


प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों लाल किले से जिस 'सेक्युलर सिविल कोड' का जिक्र किया था, उसे आज इस कार्यक्रम में फिर दोहराया। मोदी बोले…मैंने 15 अगस्त को लाल किले से 'सेक्युलर सिविल कोड' की बात की। इस मुद्दे पर भले ही कोई सरकार पहली बार इतनी मुखर हुई हो, लेकिन हमारी ज्यूडिशरी दशकों से इसकी वकालत करती आई है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का उदाहरण, देश के सैंवधानिक एकीकरण का उदाहरण…सीएए जैसे कानूनों का उदाहरण हमारे सामाने हैं। ऐसे मुद्दों पर राष्ट्र हित में स्वाभाविक न्याय क्या कहता है, यह हमारी अदालतों के निर्णय से पूरी तरह से स्पष्ट होता रहा है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे मुद्दों पर अनेक बार ऐसे विषयों पर राष्ट्र प्रथम जैसे विषयों को सशक्त किया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


‘बीएनएस ने को कोलोनियल माइंडसेट से आजाद करवाया’
पीएम ने कहा क आजादी के इतने दशक बाद गुलामी की मानसिकता से उबरते हुए देश ने इंडियन पिनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहित को एडॉप्ट किया है। दंड की जगह न्याय…यह भारतीय चिंतन का आधार भी है। भारतीय न्याय संहिता हमारे देश को कोलोनियल माइंडसेट से आजाद करवाती है।  बीते एक दशक में हमारा देश तेजी से बदला है। कभी हम 10 साल पहले 10वें पायदान से उपर उठकर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। आज देश के सपने भी बड़े हैं और देश वासियों की आकांक्षाएं भी बड़ी हैं। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाएं। जस्टिस फार ऑल इसके लिए उतना ही जरूरी है। 

आईटी रेवोल्यूशन से न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया
मोदी ने देश में आईटी रेवोल्यूशन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा…आईटी रेवोल्यूशन से कितना बड़ा बदला हो सकता है। हमारी ई-कोर्ट्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। नेशनल ज्यूडिशल डेटा ग्रिड से 26 करोड़ से ज्यादा मुकद्मों की जानकारी एक सेंट्रलाइज प्लेटफार्म पर जुड़ चुकी है। पूरे देश की 3 हजार से ज्यादा कोर्ट 12 हजार से ज्यादा जेलें वीडियो कॉनकॉल से जुड़ गई हैं। मुझे खुशी कि राजस्थान भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। पेपरलेस कोर्ट, समन के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्विस कोई सामान्य बदलाव नहीं है। 


'चक्कर' शब्द बोलकर पीएम ने कहा... बुरा मत मानना...
पीएम ने कहा कि हमारे यहां कोर्ट के आगे…बुरा मत मानना…चक्कर शब्द मंडेटरी हो गया था। 
इस दौरान प्रधानमंत्री बोलते हुए अचानक रुके… फिर कहा कि 'बुरा मत मानना…हमारे यहां कोर्ट के आगे 'चक्कर' शब्द मंडेटरी हो गया था। कोर्ट का चक्कर, मुकदमें का चक्कर, जिसमें फंस गए तो कब निकलेंगे पता नहीं। आज उस चक्कर शब्द को खत्म करने के लिए देश ने प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके लिए लगातार हमें अपनी न्यायिक व्यवस्था में रिफार्म करना है।' उन्होंने कहा कि आज देश में कम खर्चीले वैकल्पिक डिस्प्यूट मैकेनिज्म की व्यवस्था देश में ईज ऑफ लिविंग के साथ ही ईज ऑफ जस्टिस को भी बढ़ावा देगी। कानूनों में बदलाव करके नए प्रावधान जोड़कर सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। न्याय पालिका के सहयोग से यह व्यवस्थाएं और ज्यादा सशक्त होगी।

आईटी इंटिग्रेशन -गरीब के सशक्तिकरण का ट्राइड एंड टस्टेड फार्मूला 
देश के जो भी आईटी सिस्टम अलग-अलग काम कर रहे हैं उन सभी का इंटिग्रेशन हो। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतें एक साथ जुड़कर काम करें। राजस्थान के सभी जिला कोर्ट में इस इंटिग्रेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आज के भारत में गरीब के सशक्तिकरण का ट्राइड एंड टस्टेड फार्मूला बन रहा है। सरकार इसके लिए दिशा नाम के इनोवेटिव सोल्यूशन को भी बढ़ावा दे रही है। हमारे लॉ स्टूडेंट्स इस अभियान में हमारी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा देश में स्थानीय भाषाओं में लीगल डॉक्यूमेंट्स और जजमेंट्स लोगों को मिल सके इसके लिए भी काम होने हैं। हमारे सुप्रीम कोर्ट ने इसकी शुरुआत की है। एक सॉफ्टवेयर बना है जिससे लोगों को 18 भाषाओं में ज्यूडिशल डॉक्यूमेंट मिल सकते हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी कोर्ट्स ईज ऑफ जस्टिस को इसी तरह प्राथमिकता देती रहेगी। हम जिस विकसित भारत का स्वप्न लेकर आगे बढ़ रहे हैं उसमें हर किसी के लिए सुलभ, सरल और सहज न्याय की गारंटी हो…यह बहुत जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed