भरतपुर-धौलपुर के जाटों को नहीं मिलेगा आरक्षण
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राजस्थान उच्च न्यायालय ने भरतपुर और धौलपुर के जाटों को केन्द्र की सरकारी नौकरियों के बाद अब राज्य की सरकारी नौकरियों से भी बाहर कर दिया है।
न्यायालय ने ओबीसी आयोग को सभी ओबीसी जातियों को लेकर फिर से समीक्षा करने को कहा है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि आयोग चार महीने में रिपोर्ट बनाकर तय करे कि किसे आरक्षण की जरूरत है और किसे नहीं।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला दिया। डेढ़ दशक से भी अधिक समय से चल रहे जाट आरक्षण मामले की सुनवाई एक महीने से लगातार चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट जाएंगे जाट
फैसले पर जाट नेताओं का कहना है कि वे इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। गौरतलब है कि पहले भरतपुर और धौलपुर के जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण नहीं था।
लेकिन पिछली यूपीए सरकार ने केबिनेट की बैठक में इन दोनों जिलों के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड राज्य के जाटों को भी शामिल किया था। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने 19 मार्च 2015 को कैबिनेट फैसले को ही रद्द कर दिया था।