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राजस्थान: सरकार ने बजट से बाहर जुटाए 9,410 करोड़, CAG रिपोर्ट में कर्ज छिपाने का खुलासा
Wed, 26 Aug 2026 06:43 AM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Wed, 26 Aug 2026 06:43 AM IST
सार
राजस्थान सरकार ने 2024-25 में बजट से बाहर सरकारी संस्थाओं के जरिए 9,410 करोड़ रुपये जुटाए। CAG रिपोर्ट में ऑफ-बजट उधारी, लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र और सरकारी धन से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए गए।
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राजस्थान सचिवालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान सरकार ने 2024-25 के बजट में बजट से बाहर लिए गए कर्ज का कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन जांच में सामने आया कि सरकार ने अलग-अलग सरकारी कंपनियों, निगमों और दूसरी संस्थाओं के जरिए 9,410 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाया। यह खुलासा आज में विधानसभा सत्र के दौरान सदन में रखी गई सीएजी की स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया कि कर्ज की यह रकम सरकार के बजट में सीधे दिखाई नहीं दी। अलग-अलग संस्थाओं के नाम पर कर्ज लिया गया और उसे सरकार की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया गया। यह जानकारी विभिन्न सरकारी संस्थाओं से मिली जानकारी और कर्ज से जुड़े आदेशों की जांच के बाद सामने आई।
बजट में कर्ज नहीं बताया, लेकिन रकम जुटाई
सरकार ने 2024-25 के बजट में ऑफ-बजट बॉरोइंग की कोई जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद महालेखाकार ने सरकारी कंपनियों, निगमों और अन्य संस्थाओं से मिली जानकारी तथा विभागों के कर्ज से जुड़े आदेशों की जांच की। इसमें 9,410 करोड़ रुपये की ऐसी उधारी का पता चला, जो बजट के बाहर की गई थी। आसान भाषा में समझें तो सरकार ने खुद बजट में कर्ज दिखाने के बजाय सरकारी संस्थाओं के जरिए पैसा उधार लिया। इससे सरकार की वास्तविक देनदारी बजट में पूरी तरह नजर नहीं आती।
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सीएजी में हर महीने संधारित किए जाने वाले राज्य सरकार के स्टेट अकाउंट्स में यह भी सामने आया है कि जुलाई 2026 तक राजस्थान में सरकारी बोर्ड-निगम और कंपनियों पर कुल कर्ज 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। इनमें सबसे ज्यादा कर्ज बिजली कंपनियों ने लिया है। बिजली कंपनियों पर कर्ज की यह रकम करीब 94 हजार करोड़ रुपए के पार चली गई है।
427 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब भी नहीं
सरकारी विभागों ने 2010-11 से 2023-24 के बीच खर्च किए गए 427.33 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं कराया। ऐसे कुल 449 यूसी 31 मार्च 2025 तक लंबित थे। यूसी से यह पता चलता है कि सरकार से मिली राशि का इस्तेमाल किस काम में किया गया। समय पर यूसी नहीं मिलने से सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है। वहीं 31 मार्च 2025 तक 75 पीडी खाते दो साल से निष्क्रिय पड़े थे। इनमें 17.18 करोड़ रुपये जमा थे। इनमें 23 खातों में पिछले दो साल से कोई राशि नहीं थी।
पंचायतों व जिला परिषदों का फंड खर्च ही नहीं
वहीं जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर निकायों के फंड में भी बड़ी रकम खर्च होने का इंतजार कर रही थी। 2024-25 के अंत में जिला परिषद फंड में 1,718.34 करोड़, पंचायत समिति फंड में 1,912.68 करोड़ और नगर निकाय फंड में 1,514.39 करोड़ रुपये बचे हुए थे।
सरकारी पैसे की हेराफेरी के 765 मामले
रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक सरकारी धन के गबन, हेराफेरी, चोरी और नुकसान से जुड़े 765 मामले लंबित थे। इनमें 333 मामले गबन या हेराफेरी और 432 मामले चोरी या सरकारी धन के नुकसान से जुड़े थे। इन मामलों में कुल 152.08 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि कर्ज की यह रकम सरकार के बजट में सीधे दिखाई नहीं दी। अलग-अलग संस्थाओं के नाम पर कर्ज लिया गया और उसे सरकार की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया गया। यह जानकारी विभिन्न सरकारी संस्थाओं से मिली जानकारी और कर्ज से जुड़े आदेशों की जांच के बाद सामने आई।
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बजट में कर्ज नहीं बताया, लेकिन रकम जुटाई
सरकार ने 2024-25 के बजट में ऑफ-बजट बॉरोइंग की कोई जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद महालेखाकार ने सरकारी कंपनियों, निगमों और अन्य संस्थाओं से मिली जानकारी तथा विभागों के कर्ज से जुड़े आदेशों की जांच की। इसमें 9,410 करोड़ रुपये की ऐसी उधारी का पता चला, जो बजट के बाहर की गई थी। आसान भाषा में समझें तो सरकार ने खुद बजट में कर्ज दिखाने के बजाय सरकारी संस्थाओं के जरिए पैसा उधार लिया। इससे सरकार की वास्तविक देनदारी बजट में पूरी तरह नजर नहीं आती।
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सीएजी में हर महीने संधारित किए जाने वाले राज्य सरकार के स्टेट अकाउंट्स में यह भी सामने आया है कि जुलाई 2026 तक राजस्थान में सरकारी बोर्ड-निगम और कंपनियों पर कुल कर्ज 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। इनमें सबसे ज्यादा कर्ज बिजली कंपनियों ने लिया है। बिजली कंपनियों पर कर्ज की यह रकम करीब 94 हजार करोड़ रुपए के पार चली गई है।
427 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब भी नहीं
सरकारी विभागों ने 2010-11 से 2023-24 के बीच खर्च किए गए 427.33 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं कराया। ऐसे कुल 449 यूसी 31 मार्च 2025 तक लंबित थे। यूसी से यह पता चलता है कि सरकार से मिली राशि का इस्तेमाल किस काम में किया गया। समय पर यूसी नहीं मिलने से सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है। वहीं 31 मार्च 2025 तक 75 पीडी खाते दो साल से निष्क्रिय पड़े थे। इनमें 17.18 करोड़ रुपये जमा थे। इनमें 23 खातों में पिछले दो साल से कोई राशि नहीं थी।
पंचायतों व जिला परिषदों का फंड खर्च ही नहीं
वहीं जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर निकायों के फंड में भी बड़ी रकम खर्च होने का इंतजार कर रही थी। 2024-25 के अंत में जिला परिषद फंड में 1,718.34 करोड़, पंचायत समिति फंड में 1,912.68 करोड़ और नगर निकाय फंड में 1,514.39 करोड़ रुपये बचे हुए थे।
सरकारी पैसे की हेराफेरी के 765 मामले
रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक सरकारी धन के गबन, हेराफेरी, चोरी और नुकसान से जुड़े 765 मामले लंबित थे। इनमें 333 मामले गबन या हेराफेरी और 432 मामले चोरी या सरकारी धन के नुकसान से जुड़े थे। इन मामलों में कुल 152.08 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।