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Rajasthan: जहां की कलेक्टर टीना डाबी हैं, वहां की गर्भवती महिलाओं को इस वजह से हो रही परेशानी
Sun, 21 May 2023 01:57 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sun, 21 May 2023 01:57 PM IST
सार
जैसलमेर के जिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सोनोग्राफी सेंटर पिछले तीन महीने से ताले में कैद है। अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं होने से प्रसुताओं सहित मरीजों को रोजाना हजारों रुपये खर्च कर बाहर से सोनोग्राफी करवानी पड़ रही है।
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कलेक्टर टीना डाबी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राज्य सरकार मुफ्त इलाज तथा मुफ्त जांचों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है और इसे मॉडल के रूप में पूरे देश में प्रस्तुत कर रही है। लेकिन धरातल पर कई खामियां ऐसी हैं, जिसकी वजह से निशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। जैसलमेर के सबसे बड़े राजकीय जवाहर अस्पताल में हालात यह है कि सोनोग्राफी की मशीन सही है, लेकिन सोनोग्राफी करने वाला कोई नहीं है।
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फरवरी में रेडियोलॉजिस्ट सेवानिवृत हो गए, उसके बाद से सोनोग्राफी कक्ष बंद है। पूर्व में 40 से 50 सोनोग्राफी रोजाना होती थी। वहीं, 20 से 30 महिलाओं को नंबर नहीं आने के कारण बाहर से करवानी पड़ती थी या फिर अगले दिन नंबर लगाना पड़ता था। वर्तमान में स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास आने वाली महिलाओं की ओपीडी 150 के करीब है, जिनमें से 60 से 70 प्रसूताओं की पर्ची पर सोनोग्राफी की जांच लिखी जा रही है। अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने के कारण मजबूरन इन महिलाओं को बाहर से महंगे दामों में सोनोग्राफी करवानी पड़ रही है।
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निशुल्क इलाज की खुल रही पोल...
एक तरफ सरकार कहती है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को निशुल्क योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। पर्ची से लेकर इलाज तक मरीज का एक रुपया भी नहीं लगना चाहिए। समय-समय पर चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण कर निशुल्क योजनाओं का जायजा भी लेते हैं। लेकिन जवाहर अस्पताल में बाहर से सोनोग्राफी हो रही है। वहीं, चिकित्सक भी बाहर की जांचें देख रहे हैं। महिलाओं के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन चिकित्सा विभाग और सरकार को निशुल्क सेवाएं जारी रखने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्त करनी चाहिए या फिर किसी चिकित्सक को इसका कोर्स करवाना चाहिए, ताकि सोनोग्राफी की सुविधा अस्पताल में ही मिलती रहे।
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एक जांच पर खर्च हो रहे 800 से 1200 रुपये...
बाजार में सोनोग्राफी की रेट 800 से 1200 रुपये के बीच है। ऐसे में प्रतिदिन 70 से अधिक सोनोग्राफी बाहर हो रही है। औसतन करीब 70 हजार रुपये की सोनोग्राफी अस्पताल से बाहर हो रही है। ऐसे में निजी लैब वाले चांदी कूट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली महिलाओं को आर्थिक संकट के बावजूद बाजार से जांच करवानी पड़ रही है। चिकित्सकों के 'अनुसार एक प्रसूता को नौ महीने में कम से कम तीन बार सोनोग्राफी करवानी पड़ती है। जटिल होने की स्थिति में कई बार चार से पांच भी सोनोग्राफी करवानी पड़ती है।
सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे...
सरकार भले ही फ्री स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकारी सिस्टम में ही खामियां है। जब मशीनों को ऑपरेट करने वाला ही नहीं होगा तो फ्री सेवाएं कहां से मिलेगी। फरवरी में कर्मचारी सेवानिवृत हो गया। करीब ढाई महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने यहां पर दूसरा रेडियोलॉजिस्ट नहीं लगाया है, तो यह फ्री सुविधाएं किस काम की। सोनोग्राफी करने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ को ही अलग से ट्रेनिंग दी जा सकती है। पूर्व में लगा कर्मचारी भी प्रोफेशनल रेडियोलॉजिस्ट नहीं था, उसके भी सोनोग्राफी का 18 महीने का कोर्स किया हुआ था।