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कुशलगढ़ नगर पालिका: भाजपा के सामने बड़ी चुनौती, कांग्रेस का दांव और बीएपी की एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला
Sat, 29 Aug 2026 07:03 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
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Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 07:03 PM IST
सार
Rajasthan News: कुशलगढ़ नगरपालिका चुनाव में भाजपा के सामने अपना बोर्ड बचाने की चुनौती है। कांग्रेस ने पुराने भाजपाई पार्षद को साथ लेकर रणनीति मजबूत की है, जबकि BAP की एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
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नगर पालिका कुशलगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ नगरपालिका के लिए मतदान दूसरे चरण में 11 सितंबर को होगा। इस बार यहां अध्यक्ष का पद ओबीसी पुरुष के लिए आरक्षित है। दो बार से कुशलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है, किंतु पालिका अध्यक्ष भाजपा का बना है। इस बार भारत आदिवासी पार्टी भी चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। इससे त्रिकोणीय मुकाबले में सभी दलों के सामने चुनौती रहेगी।
8,841 मतदाता तय करेंगे कुशलगढ़ का सियासी भविष्य
कुशलगढ़ नगर पालिका में चुनाव 11 सितंबर को होंगे। नगर पालिका क्षेत्र में कुल 8,841 मतदाता हैं, जिनमें 4,260 पुरुष और 4,578 महिला मतदाता शामिल हैं। वहीं, करीब 3,700 युवा मतदाता भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं और वर्तमान में भाजपा का बोर्ड है।
वर्तमान बोर्ड के आंकड़ों की बात करें तो 20 वार्डों में भाजपा के 15 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के दो और तीन पार्षद निर्दलीय हैं। ऐसे में नगर पालिका में भाजपा का स्पष्ट बहुमत है। हालांकि, इस बार वार्डों के आरक्षण ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
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आरक्षण ने बदले सियासी समीकरण
कुशलगढ़ नगर पालिका के 20 वार्डों में से सात वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण की स्थिति देखें तो अनुसूचित जाति के लिए दो वार्ड आरक्षित हैं, जिनमें एक वार्ड महिला के लिए है। अनुसूचित जनजाति के तीन वार्डों में एक वार्ड महिला के लिए आरक्षित है।
इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चार वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जिनमें 2 वार्ड महिलाओं के लिए हैं। सामान्य वर्ग के 11 वार्डों में से चार वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इस तरह कुल सात वार्डों में महिला प्रत्याशियों के लिए आरक्षण लागू होगा। आरक्षण के चलते कई मौजूदा पार्षदों के वार्डों में चुनावी समीकरण बदलने की संभावना है।
समीकरण किस करवट बैठ रहा है?
पिछले चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला था। इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद दल-बदल का दौर चल रहा है। दो बार भाजपा से जीते पार्षद दिनेश परिहार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्हें इस बार टिकट नहीं मिलने का डर है, जबकि चर्चा है कि कांग्रेस ने बहुमत मिलने पर उन्हें अध्यक्ष बनाने का वादा किया है। इस बार चुनाव मैदान में बीएपी भी दम दिखाने को तैयार है। इससे त्रिकोणीय मुकाबला होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को बोर्ड बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।
आरक्षण के हिसाब से क्या परिवर्तन करने पड़ रहे हैं
वार्डों के पुनर्गठन के बाद जनसंख्या के अनुसार कुछ वार्डों में आरक्षण को लेकर उलझन की स्थिति बनी, किंतु दलों ने अपने जनाधार को देखते हुए प्रत्याशी तय करने की नीति बनाई है। कई वार्डों में आरक्षण के अनुसार स्थानीय दावेदारों को मौका देने की मांग भी उठ रही है। बता दें कि 2019 में भाजपा, 2015 में भाजपा, 2010 में कांग्रेस, 2005 में कांग्रेस और 2000 में कांग्रेस का बोर्ड रहा।
यह भी पढ़ें: सोनिया की किताब पर घमासान: राजस्थान भाजपा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल, जानें गजेंद्र सिंह शेखावत ने क्या कहा
नगर निकाय के मुख्य समीकरण
शहर में खस्ताहाल सड़कें, पेयजल और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं। गत बोर्ड में पालिका ने दो-दो अध्यक्ष देखे हैं। वहीं 31 साल से सामान्य पुरुष अध्यक्ष के लिए लॉटरी नहीं आने का भी लोगों में मलाल है। इस बार चुनाव में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है, वहीं भाजपा अपना कब्जा बनाए रखने को आतुर है।
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8,841 मतदाता तय करेंगे कुशलगढ़ का सियासी भविष्य
कुशलगढ़ नगर पालिका में चुनाव 11 सितंबर को होंगे। नगर पालिका क्षेत्र में कुल 8,841 मतदाता हैं, जिनमें 4,260 पुरुष और 4,578 महिला मतदाता शामिल हैं। वहीं, करीब 3,700 युवा मतदाता भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं और वर्तमान में भाजपा का बोर्ड है।
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वर्तमान बोर्ड के आंकड़ों की बात करें तो 20 वार्डों में भाजपा के 15 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के दो और तीन पार्षद निर्दलीय हैं। ऐसे में नगर पालिका में भाजपा का स्पष्ट बहुमत है। हालांकि, इस बार वार्डों के आरक्षण ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
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आरक्षण ने बदले सियासी समीकरण
कुशलगढ़ नगर पालिका के 20 वार्डों में से सात वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण की स्थिति देखें तो अनुसूचित जाति के लिए दो वार्ड आरक्षित हैं, जिनमें एक वार्ड महिला के लिए है। अनुसूचित जनजाति के तीन वार्डों में एक वार्ड महिला के लिए आरक्षित है।
इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चार वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जिनमें 2 वार्ड महिलाओं के लिए हैं। सामान्य वर्ग के 11 वार्डों में से चार वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इस तरह कुल सात वार्डों में महिला प्रत्याशियों के लिए आरक्षण लागू होगा। आरक्षण के चलते कई मौजूदा पार्षदों के वार्डों में चुनावी समीकरण बदलने की संभावना है।
समीकरण किस करवट बैठ रहा है?
पिछले चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला था। इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद दल-बदल का दौर चल रहा है। दो बार भाजपा से जीते पार्षद दिनेश परिहार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्हें इस बार टिकट नहीं मिलने का डर है, जबकि चर्चा है कि कांग्रेस ने बहुमत मिलने पर उन्हें अध्यक्ष बनाने का वादा किया है। इस बार चुनाव मैदान में बीएपी भी दम दिखाने को तैयार है। इससे त्रिकोणीय मुकाबला होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को बोर्ड बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।
आरक्षण के हिसाब से क्या परिवर्तन करने पड़ रहे हैं
वार्डों के पुनर्गठन के बाद जनसंख्या के अनुसार कुछ वार्डों में आरक्षण को लेकर उलझन की स्थिति बनी, किंतु दलों ने अपने जनाधार को देखते हुए प्रत्याशी तय करने की नीति बनाई है। कई वार्डों में आरक्षण के अनुसार स्थानीय दावेदारों को मौका देने की मांग भी उठ रही है। बता दें कि 2019 में भाजपा, 2015 में भाजपा, 2010 में कांग्रेस, 2005 में कांग्रेस और 2000 में कांग्रेस का बोर्ड रहा।
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नगर निकाय के मुख्य समीकरण
शहर में खस्ताहाल सड़कें, पेयजल और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं। गत बोर्ड में पालिका ने दो-दो अध्यक्ष देखे हैं। वहीं 31 साल से सामान्य पुरुष अध्यक्ष के लिए लॉटरी नहीं आने का भी लोगों में मलाल है। इस बार चुनाव में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है, वहीं भाजपा अपना कब्जा बनाए रखने को आतुर है।