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Rajasthan: जयपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, औद्योगिक विकास की संभावनाओं को लेकर अपनी राय प्रकट की

Sun, 23 Feb 2025 07:33 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 23 Feb 2025 07:33 PM IST
सार

Rajasthan: केंद्रीय मंत्री मांडविया ने बताया कि सरकार ने 'मेड इन इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाएं शुरू की हैं। अब विदेशों से उपकरण और दवाइयां आयात करने की बजाय देश में ही उनका निर्माण हो रहा है, जिससे सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं।

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Union Minister Mandaviya expressed his opinion on the possibilities of industrial development
मनसुख मांडविया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने राजस्थान में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को लेकर अपनी राय प्रकट की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश के औद्योगिक विकास के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने दिल्ली में हुई बैठक के दौरान प्रदेश में फर्टिलाइजर निर्माण और सिरेमिक उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा की थी।

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मांडविया ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और बेरोजगारी की दर विकसित देशों के समान स्तर पर आ गई है। रविवार को अपने एक दिवसीय जयपुर दौरे के दौरान उन्होंने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के बीच केंद्रीय बजट को लेकर अपनी बात रखी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में बजट के उद्देश्यों और विकसित भारत को लेकर अपनी राय साझा की।

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राजस्थान में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में रॉक फॉस्फेट का सबसे बड़ा भंडार है, जिसे फर्टिलाइजर निर्माण में उपयोग किया जा सकता है। मांडविया ने बताया कि जब वे फर्टिलाइजर मंत्री थे, तब माइनिंग विभाग के सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली में मुलाकात के दौरान इस पर चर्चा की और सुझाव दिया कि राजस्थान में ही फर्टिलाइजर का निर्माण हो, जिससे इसका देश में उपयोग होने के साथ-साथ निर्यात भी किया जा सके।

इसके अलावा, राजस्थान से गुजरात के मौरवी में स्थित देश की सबसे बड़ी सिरेमिक इंडस्ट्री को कच्चा माल भेजा जाता है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि यदि यह उद्योग राजस्थान में स्थापित हो जाए, तो यहां उपलब्ध कच्चे माल का समुचित उपयोग हो सकेगा। मांडविया ने मुख्यमंत्री की इस सक्रिय सोच की सराहना की।

रोजगार के अवसरों में वृद्धि, बेरोजगारी में कमी

मांडविया ने बताया कि वर्तमान में भारत में बेरोजगारी दर 3.2% है, जबकि यूपीए शासन के दौरान यह 6% थी। महंगाई दर भी पहले 6% थी, जो अब कम हो गई है। युवाओं की बेरोजगारी दर पहले 17-18% थी, जो अब घटकर 10% रह गई है। इससे स्पष्ट है कि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

महिलाओं के रोजगार के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। पहले केवल 28% महिलाएं कार्यरत थीं, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर 56% हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच केवल 4 करोड़ रोजगार सृजित हुए थे, जबकि 2014 से 2024 के बीच 17 करोड़ नए रोजगार उत्पन्न हुए हैं। पिछले एक दशक में 8 करोड़ लोग ईपीएफओ में पंजीकृत हुए हैं।

देश का तेजी से विकास

मांडविया ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देश में बड़े बदलाव आए हैं और नए भारत का निर्माण हो रहा है। पहले बजट केवल घोषणाओं का माध्यम होता था, लेकिन 2014 के बाद से बजट में भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने गुलामी के प्रतीक चिन्हों को छोड़ने और राष्ट्र की समृद्ध विरासत को सहेजने पर भी जोर दिया है।

मध्यम वर्ग को राहत

मांडविया ने कहा कि सरकार का बजट केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकल्पों को पूरा करने का जरिया है। पहले सरकारें 1200 घोषणाएं करती थीं, लेकिन वे धरातल पर नहीं उतरती थीं। वर्तमान सरकार ने समावेशी और सर्वस्पर्शी विकास को प्राथमिकता दी है।

मध्यम वर्ग की सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए पिछले दस वर्षों में टैक्स में कोई वृद्धि नहीं की गई है। जीएसटी लागू होने से टैक्स स्लैब कम हुए हैं, जिससे सरकार की आय बढ़ी है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च किया जा रहा है। वर्तमान में 11 लाख करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जा रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 15 लाख करोड़ रुपये करने की योजना है। राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार

मांडविया ने बताया कि इनकम टैक्स में 12 लाख रुपये तक की छूट देकर मध्यम वर्ग को राहत दी गई है। एमएसएमई और कुटीर उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। 60 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की गई है। राजस्थान में हर साल 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज इस योजना के तहत किया जा रहा है। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। सरकार का बजट एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रहा है। बजट बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा मजबूत हो रही है और लोगों का आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च कम हो रहा है।

गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य

मांडविया ने बताया कि सरकार ने 'मेड इन इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाएं शुरू की हैं। अब विदेशों से उपकरण और दवाइयां आयात करने की बजाय देश में ही उनका निर्माण हो रहा है, जिससे सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं। कृषि और शिक्षा क्षेत्रों में भी बजट बढ़ाया गया है।

यह बजट दीर्घकालिक दृष्टि के साथ तैयार किया गया है, जिसमें एक वर्ष की कार्ययोजना और रोडमैप शामिल है। देश में एक स्थिर और स्वच्छ आर्थिक तंत्र का निर्माण किया जा रहा है, और अगले वर्ष तक गरीबी को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। समावेशी विकास को तेज करने और निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिए ठोस योजनाएं बनाई जा रही हैं। बजट की घोषणा जनवरी में की जाती है, फरवरी-मार्च में इसे अंतिम रूप दिया जाता है और अप्रैल से इसका क्रियान्वयन शुरू हो जाता है, जिससे विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

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