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राजस्थान: गीता के श्लोक से राहुल गांधी पर गजेन्द्र सिंह शेखावत का निशाना, बोले- जनादेश का सम्मान करे विपक्ष

Sat, 10 Oct 2026 04:31 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Sat, 10 Oct 2026 04:31 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने गीता के श्लोक के जरिए धर्म, कर्तव्य और व्यवस्था की रक्षा का संदेश देते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। शेखावत ने विपक्ष से केवल विरोध की राजनीति करने के बजाय जनता के सामने वैकल्पिक नीतियां और समाधान रखने की अपील की।
 

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Shekhawat Targets Opposition, Says Democracy Cannot Run Through Anarchy, Mandate Must Be Respected
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक ‘परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे’ का उल्लेख करते हुए धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और व्यवस्था की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय, कर्तव्य, लोककल्याण और व्यवस्था की रक्षा भी धर्म का हिस्सा है।
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भगवान राम के प्रसंग से समझाया धर्म और कर्तव्य का महत्व
शेखावत ने कहा कि जब महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों ने विघ्न डालना शुरू किया, तब भगवान श्रीराम ने आगे बढ़कर धर्म की रक्षा की। यह प्रसंग बताता है कि जब कोई शक्ति व्यवस्था और लोककल्याण के मार्ग में बाधा बनती है, तो उसका दृढ़ता से सामना करना आवश्यक होता है। धर्म की रक्षा का अर्थ अन्याय और अव्यवस्था के सामने समर्पण करना नहीं, बल्कि मर्यादा और कर्तव्य के साथ उनका प्रतिकार करना है।
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राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है। राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर व्यवस्था को बाधित करना और जनता के निर्णय की अवहेलना करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हो सकता।
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उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल सरकार का विरोध करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विपक्ष को जनता के सामने वैकल्पिक नीतियां, कार्यक्रम और समाधान भी प्रस्तुत करने चाहिए। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर जनता का निर्णय होता है और हर राजनीतिक दल को उसका सम्मान करना चाहिए।

विकास और सुशासन को राजनीति का केंद्र बनाने की बात
शेखावत ने कहा कि देश की जनता विकास, सुशासन और स्थिरता चाहती है। ऐसे में राजनीति का केंद्र राष्ट्रहित और जनकल्याण होना चाहिए, न कि प्रत्येक विषय पर टकराव की स्थिति पैदा करना। उन्होंने विपक्ष की कथित नकारात्मक राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल विरोध के लिए विरोध करने से न देश का भला होता है और न ही जनता की समस्याओं का समाधान निकलता है।


मतभेद हों, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादा बनी रहे
उन्होंने कहा कि देश को ऐसी राजनीतिक संस्कृति की जरूरत है, जहां विचारों का संघर्ष हो, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता न हो। मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनादेश के प्रति सम्मान भी बना रहना चाहिए। भारतीय संस्कृति का संदेश धर्म की स्थापना, अन्याय के प्रतिकार और लोककल्याण के लिए कर्तव्यपालन का है। इसी भावना के अनुरूप प्रत्येक राजनीतिक दल को लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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