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Rajasthan: वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्राओं से सियासत में गरमाहट, कहीं कुछ बड़ा तो नहीं होने जा रहा!
Sat, 08 Feb 2025 07:22 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 08 Feb 2025 07:22 PM IST
सार
राजस्थान की सियासत में गरमाहट आ गई है। इस बार कारण हैं वसुंधरा राजे। पूर्व सीएम राजे की क्षेत्रवार धार्मिक और सामाजिक यात्राओं ने हलचल मचा दी है। आखिर वसुंधरा अचानक धार्मिक और सामाजिक यात्राएं क्यों कर रही हैं? ये चर्चा का विषय बन गया है।
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वसुंधरा राजे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे छह फरवरी को शेखावटी में थीं। यहां उन्होंने चार से पांच घंटे बिताए और माता की पूजा अर्चना की। दौरा सियासी नहीं था। उनके आने की खबर कम ही लोगों को थी। यहां तक की बीजेपी की स्थानीय इकाई और नेताओं की इसकी भनक नहीं लगी।
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बता दें कि यात्रा को छुपाने की वजह से राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है। सब इस यात्रा का मकसद जानना चाहते हैं, पर कोई भी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहा है। सभी कारणों पर अनुमान लगा रहे हैं। वसुंधरा की राजनीतिक शैली को जानने वाले राजनीतिक पंडित बता रहे हैं कि जब मैडम कोई बड़ा काम करना चाहती हैं तो माता से जुड़े पीठों पर जाती हैं। शांकभरी माता के यहां वसुंधरा राजे की यात्रा गुप्त नवरात्र के अंतिम दिन हुई है। पंडित बोल रहे हैं, गुप्त नवरात्र की पूजा-पाठ को गुप्त ही रखने की परंपरा है, तब मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मेवाड़ में श्रीनाथ जी समेत कई मंदिरों में गईं वसुंधरा
शेखावटी के बाद वसुंधरा राजे मेवाड़ के बड़े मंदिरों में भी गईं। हालांकि, यहां के दौरे की जानकारी सभी को थी। यहां पर वे कार्यकर्ताओं समेत बीजेपी के बड़े नेताओं से भी मिली। उन्होंने श्रीनाथजी, श्री द्वारकाधीश, चारभुजानाथ और एकलिंगजी के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी से देश में खुशहाली और बहू निहारिका के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। यहां पर वसुंधरा राजे ने दिल्ली चुनाव पर बीजेपी की जीत का दावा किया था, जो सही भी साबित हुआ। वसुंधरा ने मंदिर में गोस्वामी नेमिष से मुलाकात कर बोला कि मंदिर में मैंने तो मेरी अरदास ठाकुरजी के समक्ष रख दी है, अब आप पैरवी करके मुराद पूरी करवाएं।
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मारवाड़ में दौरे पर क्या है, फिर से सीएम बनने की कहानी?
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री का बयान और वसुंधरा राजे की इसी इलाके में एक प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां पर कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में अविनाश गहलोत बोल रहे हैं कि हमारी सरकार तो पर्ची से ही चल रही है। विपक्ष ने इस पर हंगामा खड़ा कर दिया। फिर इसी इलाके में वसुंधरा राजे के दौरे के समय एक बीजेपी कार्यकर्ता ने उनसे कहा कि मैडम आप दोबारा सीएम बन जाओ। वसुंधरा राजे ने बीजेपी नेता की इस बात का जवाब दिया और कहा, मेरे हाथ में है क्या?
अब इसके भी राजनीति मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि वसुंधरा राजे ने सीएम बनने से साफ-साफ इनकार नहीं किया है। ये सुनकर कार्यकर्ता अनिल ने कहा कि आपके ही हाथ में है। उसकी यह बात सुनकर वसुंधरा राजे मुस्कुराने लगीं। यहां वसुंधरा राजे का जोरदार स्वागत किया गया। हालांकि, यहां राजे एक शादी समारोह में भी शामिल हुईं थी। राजे का सीएम बनने से इनकार नहीं करना राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय अभी भी बना हुआ है।
चर्चाओं में क्यों हैं वसुंधरा राजे
राजस्थान में वसुंधरा राजे एक बार फिर से चर्चाओं में हैं। बीते दिनों पीएम मोदी का मंच हो या बीजेपी संगठन की अहम बैठकें, राजे की मौजूदगी राजस्थान की सियासत को बड़ा संदेश दे रही है। रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने प्रदेश बीजेपी कार्यालय में संगठन और सरकार दोनों की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक कक्ष से बाहर आई एक तस्वीर ऐसी थी, जिस पर सबकी नजरें ठिठकीं। ये तस्वीर वसुंधरा राजे की थी, जो इस बैठक का हिस्सा थीं। बैठक में वे मुस्कुराती हुई नजर आईं। राजे सरीखे मंझे हुए राजनेता तस्वीरों के जरिए संदेश देने की रिवायत को भली-भांति जानते हैं। अब इन तस्वीरों के साथ सवाल भी खड़े हो रहे हैं। करीब एक साल के अज्ञातवास से वसुंधरा राजे का बाहर आना और संगठन में उनकी बढ़ती सक्रियता के क्या मायने हैं? क्या राजे को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी?
जानकारी के मुताबिक, संगठनात्मक समीक्षा की औपचारिक बैठक के इतर राजे और बीएल संतोष की अलग से बातचीत भी हुई। इससे पहले वसुंधरा राजे की तस्वीर पीएम हाउस से आई थी, जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वन-टू-वन मिलती नजर आईं। यह मुलाकात तब और भी ज्यादा चर्चाओं में आई, जब राजस्थान के प्रदेश प्रभारी ने राजे की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई इस तस्वीर को रिट्वीट करते हुए लिखा, बहुत-बहुत शुभकामनाएं व हार्दिक बधाइयां वसुंधरा राजे जी...। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चाएं तेज हो गईं कि राजे को राजस्थान अथवा राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
राजे को तरजीह क्यों दी जा रही
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई राजे को तरजीह दी जा रही है और ऐसा है तो क्यों दी जा रही है? क्योंकि मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं का बीजेपी में पुनर्वास नहीं हो पाया। वहीं, राजस्थान में विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव व उसके बाद हाल में हुए उपचुनाव में पूरी तरह साइडलाइन रहीं राजे को अचानक क्यूं पूछा जाने लगा है। चर्चाएं हैं कि उन्हें पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसी चर्चा है कि राजस्थान में संगठन और सरकार की डिलीवरी नहीं है। रविवार को बीएल संतोष ने प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को कड़ी फटकार लगाते हुए यह तक कहा कि आप अभी भी पाली जिलाध्यक्ष की तरह काम करते नजर आ रहे हैं। सरकार के स्तर पर भी कुछ कमियां नजर आ रही हैं या पार्टी में कुछ असंतोष पनप रहा है? इन सब को साधने के लिए बीजेपी के पास राजस्थान में फिलहाल राजे से बेहतर कोई नेता नहीं है।
वसुंधरा सक्रिय होती हैं तो फायदा किसे
वसुंधरा राजे सक्रिय होती हैं तो इसका फायदा सीएम भजनलाल को भी मिलेगा। वे पहली बार के सीएम हैं। सरकार में उनका अनुभव कम है और वरिष्ठों को साधने की चुनौती भी बड़ी है। ऐसे में यदि राजे का समर्थन उन्हें मिलता है तो निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
राजस्थान के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों की इस पर राय
वरिष्ठ पत्रकार मनीष गोधा ने कहा कि वैसे तो आजकल बीजेपी में क्या होता है इसका अंदाजा तो लग नहीं सकता, जिस तरह से वसुंधरा राजे बीजेपी के कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग ले रही हैं और बड़ी मीटिंग्स में सक्रियता दिख रही हैं। उसे देखकर लगता है कि राजे अपनी सक्रियता बढ़ना चाह रही हैं। उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि शायद बीजेपी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर देना चाहती है।
राजे का बीजेपी से जुड़ाव पारंपरिक
वरिष्ठ पत्रकार नारायण बाहरेठ बोले कि बीजेपी वुमन एम्पावरमेंट की बात कर रही है। इनके पास उत्तर भारत में बड़े जनाधार वाली दो महिला नेता थीं। वे दोनों एक्स सीएम हैं। इनमें एक वसुंधरा राजे हैं और दूसरी उमा भारती। लंबे असरे से इन्हें मुख्य धारा में नहीं रखा गया। ऐसे में बीजेपी को लगा होगा कि पार्टी में इनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। वसुंधरा राजे की बात करें तो उनका बीजेपी से जुड़ाव पारंपरिक भी है, क्योंकि बीजेपी के गठन में उनकी मां विजयाराजे की अहम भूमिका रही थी।