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‘अब आर-पार की लड़ाई’: राजस्थान के शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; 18 जून से प्रदेशभर में होगा धरना
Sun, 10 May 2026 06:03 PM IST
हिमांशु सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु सिंह
Updated Sun, 10 May 2026 06:03 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान में शिक्षकों की मांगों को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। 18 जून से प्रदेश स्तरीय धरना शुरू होगा। संगठन ने स्थानांतरण, पदोन्नति, वेतन विसंगति और अवकाश कटौती सहित कई मुद्दों पर नाराजगी जताई है। पढ़ें पूरी खबर...
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18 जून से प्रदेशभर में होगा धरना
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों से जुड़े लंबित मामलों को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से मांगें उठाने और संवाद के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।
दरअसल, जयपुर में रविवार को आयोजित मीडिया से बातचीत में महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर हठधर्मिता, उदासीनता और तानाशाहीपूर्ण रवैये का आरोप लगाया। वहीं प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखेरा ने कहा कि सरकार के दो वर्ष से अधिक कार्यकाल के बावजूद शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
ये हैं महासंघ की प्रमुख मांगें
महासंघ ने जिन प्रमुख मांगों को उठाया है, उनमें शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, शिक्षकों की पदोन्नति, क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति, स्टाफिंग पैटर्न लागू करना, आरजीएचएस व्यवस्था को सुचारू रखना, वेतन विसंगतियां दूर करना और संविदा शिक्षकों को नियमित करना शामिल है।
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14 मई से शुरू होगा आंदोलन
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि आंदोलन के तहत 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तरीय प्रदर्शन और 10 जून को जयपुर संभाग में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना शुरू होगा। साथ ही मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव की भी चेतावनी दी गई है।
राज्य में मिल रहे कम अवकाश
महासंघ ने शिक्षा विभाग की 'नवाचार' आधारित नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इन फैसलों से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती को अव्यावहारिक बताते हुए महासंघ ने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी की गई है। संगठन के अनुसार जहां केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों में अधिक अवकाश दिए जा रहे हैं, वहीं प्रदेश के विद्यालयों में अवकाश घटाकर 35 दिन कर दिए गए हैं।
पदोन्नति पर अनियमितताओं के आरोप लगे
संगठन ने पदोन्नति और पदस्थापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। महासंघ का कहना है कि गृह जिलों में पद रिक्त होने के बावजूद शिक्षकों को अन्य जिलों में भेजा जा रहा है और काउंसलिंग प्रक्रिया में तय संख्या से कम पद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। पीएमश्री विद्यालयों की चयन प्रक्रिया पर भी महासंघ ने सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि चयन मानदंडों में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
ये भी पढ़ें- Jaipur News: आधी रात अफसरों के साथ सड़कों पर उतरे 2500 सफाईकर्मी, सुबह तक चमक उठीं शहर की गलियां
इसके अलावा महासंघ ने गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते दबाव पर भी चिंता जताई। संगठन के मुताबिक जनगणना, ऑनलाइन पोर्टल संचालन और अन्य प्रशासनिक कार्यों के कारण शिक्षक शिक्षण कार्य से दूर हो रहे हैं। कई विद्यालयों में सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने और तकनीकी समस्याओं के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने पर भी नाराजगी जताई गई। संघर्ष समिति के संयोजक संपत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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दरअसल, जयपुर में रविवार को आयोजित मीडिया से बातचीत में महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर हठधर्मिता, उदासीनता और तानाशाहीपूर्ण रवैये का आरोप लगाया। वहीं प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखेरा ने कहा कि सरकार के दो वर्ष से अधिक कार्यकाल के बावजूद शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
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ये हैं महासंघ की प्रमुख मांगें
महासंघ ने जिन प्रमुख मांगों को उठाया है, उनमें शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, शिक्षकों की पदोन्नति, क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति, स्टाफिंग पैटर्न लागू करना, आरजीएचएस व्यवस्था को सुचारू रखना, वेतन विसंगतियां दूर करना और संविदा शिक्षकों को नियमित करना शामिल है।
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14 मई से शुरू होगा आंदोलन
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि आंदोलन के तहत 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तरीय प्रदर्शन और 10 जून को जयपुर संभाग में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना शुरू होगा। साथ ही मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव की भी चेतावनी दी गई है।
राज्य में मिल रहे कम अवकाश
महासंघ ने शिक्षा विभाग की 'नवाचार' आधारित नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इन फैसलों से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती को अव्यावहारिक बताते हुए महासंघ ने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी की गई है। संगठन के अनुसार जहां केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों में अधिक अवकाश दिए जा रहे हैं, वहीं प्रदेश के विद्यालयों में अवकाश घटाकर 35 दिन कर दिए गए हैं।
पदोन्नति पर अनियमितताओं के आरोप लगे
संगठन ने पदोन्नति और पदस्थापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। महासंघ का कहना है कि गृह जिलों में पद रिक्त होने के बावजूद शिक्षकों को अन्य जिलों में भेजा जा रहा है और काउंसलिंग प्रक्रिया में तय संख्या से कम पद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। पीएमश्री विद्यालयों की चयन प्रक्रिया पर भी महासंघ ने सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि चयन मानदंडों में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
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इसके अलावा महासंघ ने गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते दबाव पर भी चिंता जताई। संगठन के मुताबिक जनगणना, ऑनलाइन पोर्टल संचालन और अन्य प्रशासनिक कार्यों के कारण शिक्षक शिक्षण कार्य से दूर हो रहे हैं। कई विद्यालयों में सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने और तकनीकी समस्याओं के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने पर भी नाराजगी जताई गई। संघर्ष समिति के संयोजक संपत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।