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Rajasthan: मंत्रियों की अपील ठुकराकर अड़े संत और आंदोलनकारी, क्यों सुलग उठा खेजड़ी बचाओ महाआंदोलन? जानें सबकुछ

Thu, 05 Feb 2026 06:40 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/बीकानेर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 05 Feb 2026 06:40 PM IST
सार

Rajasthan: राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई पर लोग क्यों अड़े हैं? कई सारे संत अनशन पर क्यों बैठे हैं? आंशिक रोक से नाराजगी क्यों बढ़ी है? वसुंधरा राजे ने खेजड़ी और बिश्नोई समाज को लेकर क्या कहा? आइये जानते हैं। 

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Rajasthan news  ‘Save Khejri’ Mega Movement Erupt Saints and Protesters Stand Firm news in hindi
खेजड़ी को लेकर आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब महज पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आस्था, पहचान और विकास मॉडल पर सीधी टक्कर बन चुका है। पश्चिमी राजस्थान में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के नाम पर खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई के आरोपों ने बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों को सड़क पर ला खड़ा किया है। आंदोलनकारी पूरे प्रदेश में खेजड़ी कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार फिलहाल आंशिक रोक और मौखिक आश्वासनों तक सीमित नजर आ रही है। यही टकराव सरकार और आंदोलनकारियों को आमने-सामने ले आया है। जहां एक ओर विकास की दलील है, तो दूसरी ओर मरुस्थल की जीवनरेखा मानी जाने वाली खेजड़ी और उससे जुड़ी 363 शहीदों की विरासत।

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लेकिन सवाल यह है कि आखिर खेजड़ी पर इतना बवाल क्यों हो रहा है? क्या पश्चिमी राजस्थान में विकास के नाम पर राज्य वृक्ष की अंधाधुंध कटाई हो रही है? मामले को लेकर वसुंधरा राजे ने क्या कहा? आंशिक आदेश, मौखिक आश्वासन और पूरे राजस्थान में प्रतिबंध की मांग इन्हीं सवालों के बीच सरकार और आंदोलनकारी आमने-सामने खड़े हैं। आइये जानते हैं विस्तार से
 

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प्रदर्शन हो क्यों रहा है?
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में पश्चिमी राजस्थान के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स हैं। राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' कहा जाता है, लेकिन आंदोलनकारियों का गंभीर आरोप है कि बीकानेर संभाग में विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई जगहों पर इन पेड़ों को काटकर सबूत मिटाने के उद्देश्य से रात के अंधेरे में जमीन में गाड़ देने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसी अवैध कटाई'ने बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों के सब्र का बांध तोड़ दिया। 

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363 संतों ने अनिश्चितकालीन धरना क्यों शुरू किया?
इसी कड़ी में बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेता नजर आया। सोमवार को हुए महापड़ाव ने साफ संकेत दे दिया है कि यह आंदोलन लंबे समय तक चल सकता है। बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लेकर आंदोलन को मजबूती दी है। इस बीच आंदोलन को नया मोड़ तब मिला जब 363 संतों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। संत आंखों पर पट्टी बांधकर धरने पर बैठे हैं, जिससे आंदोलन की गंभीरता और संवेदनशीलता और बढ़ गई है। 

पढ़ें: खेजड़ी बचाने के लिए कलेक्टर कार्यालय के गेट पर चढ़ें प्रदर्शनकारी, बोले- हमारे सब्र का बांध टूट गया

चौथे दिन आंदोलन ने और जोर पकड़ा
खेजड़ी बचाओ आंदोलन ने चौथे दिन भी जोर पकड़ा। आंदोलनकारियों की आमरण अनशन की मांग पर सरकार की ओर से जोधपुर और बीकानेर संभाग में ही कटाई पर रोक का आदेश जारी होने से प्रदर्शनकारी भड़क गए। वे पूरे राजस्थान में खेजड़ी कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर अड़े हैं। गुरुवार को कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई अनशन स्थल (बिश्नोई धर्मशाला) पहुंचे। मंत्री ने मंच से अनशन तोड़ने की अपील की और लिखित आश्वासन देने का वादा किया। उन्होंने कहा, अनशन तोड़ दीजिए, हम लिखकर दे देंगे। अमृता देवी का बलिदान हम नहीं भूलेंगे।


 

फलोदी विधायक के बयान पर क्यों भड़के आंदोलनकारी?
हालांकि, संतों और आंदोलनकारियों ने बिना लिखित आश्वासन के अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया। जब मंत्री बोल रहे थे, तभी संत सरजूदास ने बीच में टोकते हुए कहा, इधर-उधर की बात न करें, सीधे बताएं लिखित में देंगे या नहीं। मंत्री ने फिर आश्वासन दोहराया, लेकिन आंदोलनकारी अड़े रहे। इस दौरान फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई ने भी अनशन तोड़ने की अपील की, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और कहा कि आश्वासन लिखित में दिया जाए। पब्बाराम के एक बयान यदि किसी की जान को नुकसान हुआ, तो आपका, हमारा और सभी का मुंह खराब होगा, से लोग और भड़क गए। उन्होंने उन्हें बैठ जाने को कहा। पर्यावरण संघर्ष समिति के नेता परसराम विश्नोई ने बताया कि अनशन खत्म नहीं हुआ है। संतों की भावना है कि पूरे राजस्थान में रोक लगनी चाहिए। जो ऑर्डर आया, वह अधूरा था। अब आमरण अनशन जारी है।

कई संतों की बिगड़ी तबीयत
बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर आयोजित महापड़ाव को अब 72 घंटे से अधिक समय बीत चुका है। संत समाज का अनशन लगातार जारी है। शुरुआत में 363 संत अनशन पर बैठे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो गई है। इस दौरान तीन संतों की तबीयत बिगड़ गई है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अनशन स्थल विष्णुई धर्मशाला में ही अस्थायी अस्पताल बनाया गया है, जहां संतों की नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है। इधर, राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई बीकानेर पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही विश्नोई समाज के प्रतिनिधियों के साथ सरकार की बातचीत हो सकती है। साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते समय खेजड़ी संरक्षण को लेकर कोई अहम घोषणा कर सकते हैं। हालांकि समाज का साफ कहना है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा।

वसुंधरा का मिला समर्थन
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राज्य वृक्ष खेजड़ी की सुरक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर राजस्थानी लोकोक्ति सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण लिखते हुए पर्यावरण संरक्षण की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। राजे का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है, जब बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण कानून की मांग को लेकर सैकड़ों पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे हैं। वसुंधरा राजे ने अपने पोस्ट में खेजड़ी को केवल पेड़ नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति से जुड़ा देववृक्ष बताया। उन्होंने लिखा कि 'खेजड़ी राजस्थान की पहचान है, जिसे सदियों से पूजा जाता रहा है और जिसकी रक्षा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।' उनके इस ट्वीट से विश्नोई समाज और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के आंदोलन को बड़ी राजनीतिक ताकत मिली है।

खेजड़ी क्यों है इतनी अहम? 
खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ मानी जाती है। बिश्नोई समाज के लिए खेजड़ी का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। ऐतिहासिक रूप से खेजड़ी संरक्षण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने की परंपरा इसी समाज से जुड़ी रही है। यही कारण है कि खेजड़ी के कटान का मुद्दा सामने आते ही आंदोलन ने भावनात्मक और सामाजिक रूप से व्यापक समर्थन हासिल कर लिया।

क्या बोले सीएम भजनलाल?
इस बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का आक्रामक और राजनीतिक रूप से तीखा जवाब दिया। उन्होंने खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण के लिए जल्द कानून लाने की घोषणा की और विपक्ष को “पांच साल बनाम दो साल” के प्रदर्शन की खुली बहस की चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता के आरोप भी लगाए। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि राजस्थान की पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी कि राज्य की “कल्पवृक्ष” के संरक्षण के लिए कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है। पिछले वर्ष अगस्त में बीकानेर, फलोदी, जोधपुर और नागौर से पर्यावरण संत मुझसे मिले थे। उसके बाद मैंने अधिकारियों को कानून का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए। प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसे विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। 
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