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Rajasthan News : एसआई भर्ती जांच में कुछ छिपा रही है सरकार, यदि कुछ गलत हुआ है तो भर्ती रद्द करे, बोले जूली
Fri, 10 Jan 2025 10:01 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 10 Jan 2025 10:01 AM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट में सब-इंस्पेक्टर पेपर लीक पर सुनवाई के दौरान ट्रेनी इंस्पेक्टरों को पोस्टिंग देने पर रोक के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पेपर लीक पर चल रही है सुनवाई के बीच आरोपी सब-इंस्पेक्टरों को पोस्टिंग देना आश्चर्यजनक है। एक तरफ तो मुख्यमंत्री और पूरी सरकार दावा करती है कि सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था परन्तु इस भर्ती को रद्द नहीं किया जा रहा है।
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राजस्थान
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान रीट परीक्षा के लेवल 1 पेपर के आउट होने की सूचना पुलिस को मिली। उस समय भी पुलिस ने कहा था कि पेपर महज कुछ लोगों तक ही पहुंचा है परन्तु सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की दृष्टि से पेपर रद्द किया गया एवं पद बढ़ाकर नई भर्ती निकाली गई। इस भर्ती को समय पर पूरा कर करीब 50,000 अध्यापकों को नियुक्ति दी गई थी। यदि सब-इंस्पेक्टर परीक्षा में वास्तव में कोई गड़बड़ी है तो सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए इसे रद्द करना चाहिए।
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जूली ने कहा कि ऐसा लगता है लोकसभा चुनाव से पहले केवल माहौल बनाने के लिए सब-इंस्पेक्टर पेपर लीक का हो-हल्ला भाजपा ने मचाया और अब अदालत में माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा पूछे जाने के बावजूद सरकार किसी भी सख्त कार्रवाई की बजाय बहानेबाजी कर रही है। मंत्री किरोड़ीलाल मीणा कह रहे हैं कि मंत्रमंडलीय समिति द्वारा भी भर्ती रद्द करने की सिफारिश की गई है परन्तु मुख्यमंत्री इस पर फैसला नहीं कर रहे हैं। यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो युवा इस भर्ती को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी जेल में बन्द कर दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि इस सरकार को बताना चाहिए कि यदि पेपर लीक हुआ है तो पेपर को रद्द करने में क्या आपत्ति है? इस पेपर लीक के मुख्य आरोपी पूर्व RPSC सदस्य की नियुक्ति भी भाजपा सरकार के समय ही हुई थी। इसलिए यह भी संभव है कि इस जांच में कुछ ना कुछ ऐसे तथ्य आए हों, जिससे सरकार और भाजपा असहज है और उन्हें जनता के सामने रखना नहीं चाहती। युवाओं के साथ न्याय के लिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वो इस परीक्षा को रद्द करेगी या इस पर केवल राजनीति ही करेगी।