Rajasthan News: पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के आवास पर ईडी की रेड, पीएसीएल घोटाले में जुड़ा नाम
पीएसीएल कंपनी पर सेबी ने 2014 में अवैध निवेश योजनाएं चलाने के आरोप में कार्रवाई की थी। कंपनी ने 5.85 करोड़ निवेशकों से 49,100 करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी, जिसमें से राजस्थान के 28 लाख निवेशकों से 2850 करोड़ की पूंजी ली गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोढ़ा कमेटी इस मामले की निगरानी कर रही है।
विस्तार
राजस्थान की राजनीति में हड़कंप मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के जयपुर स्थित आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई बहुचर्चित 2850 करोड़ रुपये के पीएसीएल घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है। खाचरियावास पर आरोप है कि पीएसीएल घोटाले की रकम में से करीब 30 करोड़ रुपये की राशि उनके पास पहुंची थी। इसी सिलसिले में ईडी की टीमें उनके ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
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#WATCH | Jaipur: On ED raid at his residence, Congress leader Pratap Singh Khachariyawas says, "Today they have come here to conduct searches and raids; they can do it. I am going to cooperate with them. ED is doing its work, and I will do my work. I believe the BJP should not do… pic.twitter.com/tAbvZvWbBO
— ANI (@ANI) April 15, 2025
गौरतलब है कि पीएसीएल (PACL) कंपनी पर सेबी ने 22 अगस्त 2014 को अवैध निवेश योजनाएं चलाने के आरोप में कार्रवाई करते हुए उसके सारे कारोबार बंद करवा दिए थे। इसके बाद कंपनी के खिलाफ देशभर में केस दर्ज हुए। सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, पीएसीएल ने देशभर में करीब 5.85 करोड़ लोगों से 49,100 करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी, जिसमें से अकेले राजस्थान के 28 लाख निवेशकों से करीब 2850 करोड़ की पूंजी जमा की गई थी।
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पीएसीएल की संपत्तियों को जब्त कर निवेशकों को भुगतान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। सेबी के अनुसार कंपनी के पास 1.86 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां मौजूद हैं, जो निवेशकों की रकम से करीब चार गुना अधिक है। मालूम हो कि इस घोटाले का सबसे पहला केस साल 2011 में जयपुर के चौमू थाने में दर्ज किया गया था। इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, कर्नाटक, पंजाब, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में मामले दर्ज किए गए। फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और प्रताप सिंह खाचरियावास से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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