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Rajasthan News: डिजिफेस्ट में बोले सहवाग- ‘नो फियर, नो लिमिट्स’ साहस, जोखिम और टीम वर्क से ही मिलती है सफलता

Mon, 05 Jan 2026 05:50 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 05 Jan 2026 05:50 PM IST
सार

जेईसीसी में चल रहे राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट के दूसरे दिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि बिना साहस और जोखिम के सफलता संभव नहीं है।
 

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Rajasthan News: At DigiFest, Sehwag Says ‘No Fear, No Limits’; Courage, Risk and Teamwork Lead to Success
डिजिफेस्ट में पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 के दूसरे दिन सोमवार को मुख्य हॉल में आयोजित फायरसाइड चैट दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रही। इस सत्र में पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने खेल, स्टार्टअप, निवेश, नेतृत्व और टीमवर्क जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।

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‘नो फियर, नो लिमिट्स : लेसन्स फ्रॉम द वर्ल्ड्स मोस्ट एग्रेसिव ओपनर’ विषय पर आयोजित इस संवाद में सहवाग ने कहा कि साहस और जोखिम लेने की क्षमता के बिना न तो खेल में और न ही जीवन में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रामक सोच और आत्मविश्वास ही किसी खिलाड़ी या उद्यमी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
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टाई ग्लोबल के कन्वीनर महावीर प्रताप शर्मा के साथ संवाद करते हुए सहवाग ने कहा कि भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही समय पर प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें तराशने और उचित मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट, स्टार्टअप या निवेश, हर क्षेत्र में जोखिम लेना जरूरी है लेकिन यह जोखिम समझदारी और संतुलन के साथ लिया जाना चाहिए।
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टीम वर्क और नेतृत्व पर बात करते हुए सहवाग ने कहा कि किसी भी संगठन या टीम की सफलता विश्वास और आपसी सहयोग पर निर्भर करती है। हर कंपनी को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखना चाहिए और सकारात्मक कार्यस्थल संस्कृति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आलोचना से डरने के बजाय अपने प्रदर्शन के जरिए उसका जवाब देना चाहिए।

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आईपीएल के प्रभाव का उल्लेख करते हुए सहवाग ने कहा कि इस लीग के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों का नजरिया बदला है और स्लेजिंग जैसी प्रवृत्तियां कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत का दौर शुरू हो चुका है, हालांकि टेस्ट और वनडे क्रिकेट आज भी मजबूत आधार बने हुए हैं। भविष्य को लेकर उन्होंने संभावना जताई कि टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट का चलन भी बढ़ सकता है।


स्टार्टअप और निवेश के संदर्भ में सहवाग ने युवाओं को सलाह दी कि बिना जोखिम लिए प्रगति संभव नहीं है। सही निवेशक चुनना और सही समय पर फैसला लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप संस्कृति युवाओं को नवाचार और जोखिम लेने की सोच सिखाती है।

अन्य खेलों पर बात करते हुए सहवाग ने कहा कि क्रिकेट के अलावा हॉकी जैसे खेलों में खिलाड़ियों को अभी भी पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। हर खेल में निवेश बढ़ने से खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता मिलेगी और देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा।

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