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RJ Election Results: कांग्रेस के दावों में दम, राजस्थान में हासिल की बढ़त, जानें भाजपा के पिछड़ने की पांच वजह

Tue, 04 Jun 2024 11:35 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 04 Jun 2024 11:35 AM IST
सार

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुरू से ही कई सीटों पर जीत का दम भर रहे थे। चुनाव परिणाम सामने आते ही उनके दावे लगभग सही साबित होते दिख रहे हैं।

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Rajasthan Election Result 2024 Exit Poll Estimates Failed in Rajasthan Know Full Details in Hindi
राजस्थान में भाजपा पिछड़ी, कांग्रेस ने हांसिल की बढ़त।। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनावों को लेकर राजस्थान में एग्जिट पोल के अनुमान फेल साबित हुए। दोपहर 11:00 तक की स्थिति के अनुसार राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस+12 और भाजपा 11 पर आगे चल रही है। सीकर, नागौर और बांसवाड़ा सीटों पर कांग्रेस ने एलाइंस किया था। इन तीनों सीटों पर कांग्रेस के एलाइंस पार्टनर लीड लिए हुए हैं।

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कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की अगुवाई में राजस्थान में कांग्रेस और गठबंधन 12 सीटें जीतती दिख रही है।
 
केंद्रीय आला कमान के साथ वीसी में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार को उन सीटों के नाम गिनवाए थे, जिन पर वे जीत का दावा कर रहे हैं। आज जो रुझान आ रहे हैं वो इन दावों के अनुसार लगभग सही साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा था- चूरू, झुंझुनू, बाड़मेर, दौसा, भरतपुर, टोंक-सवाई माधोपुर, करौली-धौलपुर, नागौर, सीकर, बांसवाड़ा सहित 11-12 सीट कांग्रेस जीत रही है।
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जानिए भाजपा के पिछड़ने के पांच कारण

चुनाव प्रबंधन में चूक
पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर फोकस कर दिया गया था। इसलिए पहले चरण में भाजपा का वर्कर उतना एक्टिव नहीं हुआ। इसकी वजह से यहां पहले चरण में वोटिंग बहुत कम रही।
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कोई बदलाव नजर नहीं आए
राजस्थान में सत्ता परिवर्तन होने के बाद भी अहम प्रशासनिक पदों पर कोई बदलाव नजर नहीं आए। जिन मुद्दों को लेकर भाजपा ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का विरोध किया, उन पर एक्शन नहीं ले पाए। पेपर लीक मामले में कुछ गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन यह सब छोटे स्तर पर थीं। जल जीवन मिशन, सरकारी दफ्तरों में कैश और गोल्ड जैसे बड़े मुद्दे चुनावों से आगे बढ़े नहीं। सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा खुद इन मामलों पर कार्रवाई के लिए चिट्ठियां लिखते रहे।

जातिगत गोलबंदी नहीं तोड़ पाए
चुनावों से पहले ही कई जातियों की नाराजगी खुलकर सरकार के सामने आ चुकी थी। एडमिनिस्ट्रेटिव स्तर पर ही कुछ फैसले लेकर इनको खत्म किया जा सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। खास तौर पर कुछ जातियों को टारगेट कर तबादले करने की सूचियां सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं लेकिन स्टेट लीडरशिप और संगठन के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कुछ खास नहीं किया गया।

बागियों को भी नहीं साध पाए
लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा ने बागियों को मनाने के लिए कई दौर की बैठक कीं, लेकिन उसमें पूरी तरह विफल ही नजर आए। रविंद्र सिंह भाटी से सीएम भजनलाल शर्मा ने मुलाकात की, लेकिन बाड़मेर में भाटी निर्दलीय खड़े हुए और सबसे ज्यादा भाजपा को उसका नुकसान हुआ।

कांग्रेस के नेताओं की एंट्री से भाजपा में नाराजगी
लोकसभा चुनावों के बीच राजस्थान में करीब 200 से ज्यादा छोटे और बड़े कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल किया गया। इससे पार्टी में अंदरखाने नाराजगी पनपी और साथ कांग्रेस से आए ज्यादातर नेताओं की फील्ड में कोई सक्रियता भी नजर नहीं आई।


टिकट काटने में हिचकिचाहट
पहले चरण में भाजपा ने अपने कई सांसदों के टिकट काटे, लेकिन दूसरे चरण में पार्टी की हिचकिचाहट साफ देखने को मिली। एंटी इनकम्बेंसी और विधानसभा चुनाव हारने वाले नेताओं को रिपीट किया गया।

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