{"_id":"6a92947d8a747cc33102476d","slug":"rajasthan-civic-polls-bjp-leader-rakesh-bhati-joins-congress-in-state-president-madan-rathore-s-home-district-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीजेपी को बड़ा झटका: प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गढ़ में पूर्व सभापति भाटी ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीजेपी को बड़ा झटका: प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गढ़ में पूर्व सभापति भाटी ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामा
Sat, 29 Aug 2026 01:45 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Sat, 29 Aug 2026 01:45 PM IST
सार
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में पार्टी को झटका लगा है। कद्दावर नेता राकेश भाटी ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया, निकाय चुनाव से पहले समीकरण बदले।
विज्ञापन
पाली के पूर्व सभापति ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस ज्वाइन की
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगामी नगर निगम चुनाव से ठीक पहले मारवाड़ की सियासत में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। नगर परिषद के पूर्व सभापति, निवर्तमान महापौर के पति और सांसद प्रतिनिधि रह चुके राकेश भाटी ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वार रूम में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाटी को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।
इस दौरान पाली से कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निंबाड़ा और चुनाव पर्यवेक्षक हेम सिंह शेखावत सहित पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।
यह भी पढें- सीकर में तड़के भीषण अग्निकांड: दो ई-व्हीकल शोरूम में 40 वाहन जलकर खाक; 3.5 करोड़ तक नुकसान का अनुमान
विज्ञापन
मदन राठौड़ के गृह जिले में सेंध, इसलिए बढ़ी चर्चा
राकेश भाटी के भाजपा छोड़ने को स्थानीय राजनीति में महज एक नेता का दलबदल नहीं माना जा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव है। भाटी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली से आते हैं और घांची समाज से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले राठौड़ के गृह क्षेत्र में उनके ही समाज के प्रभावशाली नेता का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पाली नगर निगम चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल भाटी के पाला बदलने से कांग्रेस को भाजपा के स्थानीय समीकरणों को चुनौती देने का मौका जरूर मिला है।
नगर निकाय की राजनीति में परिवार की मजबूत पकड़
राकेश भाटी का परिवार पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी निवर्तमान महापौर रही हैं। इसके चलते भाटी परिवार का नगर निकाय स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच मजबूत नेटवर्क माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस में उनकी एंट्री को पार्टी के लिए सिर्फ एक चेहरे का जुड़ना नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और समर्थकों के एक हिस्से को अपने साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नगर निगम चुनाव से कुछ समय पहले हुए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नया नैरेटिव खड़ा करने का मौका दिया है।
भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का कांग्रेस उठा सकती है फायदा
पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से गुटबाजी और टिकट को लेकर असंतोष की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में राकेश भाटी का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए चुनौती इसलिए भी है कि उनके साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राजनीतिक दिशा क्या रहती है। कांग्रेस अब इस दलबदल को चुनावी रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी की कोशिश होगी कि भाटी के स्थानीय संपर्क और राजनीतिक प्रभाव को नगर निगम चुनाव में वोटों में तब्दील किया जाए। दूसरी तरफ भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह अपने संगठन को एकजुट रखे और संभावित असंतोष को चुनाव से पहले नियंत्रित करे।
भीमराज भाटी-राकेश भाटी की जोड़ी से कांग्रेस को उम्मीद
राकेश भाटी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पाली विधायक भीमराज भाटी के साथ उनकी राजनीतिक जुगलबंदी को भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने अब चुनौती इस नई राजनीतिक ताकत को वार्ड स्तर तक पहुंचाने की होगी। अगर भाटी अपने पुराने समर्थकों और स्थानीय नेटवर्क को कांग्रेस के साथ जोड़ने में सफल रहे तो इसका सीधा असर नगर निगम के कई वार्डों के समीकरण पर पड़ सकता है। हालांकि निकाय चुनाव में अंतिम फैसला टिकट वितरण, उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और वार्डवार जातीय-सामाजिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
पाली में नगर निगम चुनाव से पहले यह घटनाक्रम भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह जिला होने के कारण यहां का राजनीतिक प्रदर्शन संगठन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी रहेगा।
विज्ञापन
इस दौरान पाली से कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निंबाड़ा और चुनाव पर्यवेक्षक हेम सिंह शेखावत सहित पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।
विज्ञापन
यह भी पढें- सीकर में तड़के भीषण अग्निकांड: दो ई-व्हीकल शोरूम में 40 वाहन जलकर खाक; 3.5 करोड़ तक नुकसान का अनुमान
विज्ञापन
मदन राठौड़ के गृह जिले में सेंध, इसलिए बढ़ी चर्चा
राकेश भाटी के भाजपा छोड़ने को स्थानीय राजनीति में महज एक नेता का दलबदल नहीं माना जा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव है। भाटी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली से आते हैं और घांची समाज से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले राठौड़ के गृह क्षेत्र में उनके ही समाज के प्रभावशाली नेता का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पाली नगर निगम चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल भाटी के पाला बदलने से कांग्रेस को भाजपा के स्थानीय समीकरणों को चुनौती देने का मौका जरूर मिला है।
नगर निकाय की राजनीति में परिवार की मजबूत पकड़
राकेश भाटी का परिवार पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी निवर्तमान महापौर रही हैं। इसके चलते भाटी परिवार का नगर निकाय स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच मजबूत नेटवर्क माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस में उनकी एंट्री को पार्टी के लिए सिर्फ एक चेहरे का जुड़ना नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और समर्थकों के एक हिस्से को अपने साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नगर निगम चुनाव से कुछ समय पहले हुए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नया नैरेटिव खड़ा करने का मौका दिया है।
भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का कांग्रेस उठा सकती है फायदा
पाली की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से गुटबाजी और टिकट को लेकर असंतोष की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में राकेश भाटी का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए चुनौती इसलिए भी है कि उनके साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राजनीतिक दिशा क्या रहती है। कांग्रेस अब इस दलबदल को चुनावी रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी की कोशिश होगी कि भाटी के स्थानीय संपर्क और राजनीतिक प्रभाव को नगर निगम चुनाव में वोटों में तब्दील किया जाए। दूसरी तरफ भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह अपने संगठन को एकजुट रखे और संभावित असंतोष को चुनाव से पहले नियंत्रित करे।
भीमराज भाटी-राकेश भाटी की जोड़ी से कांग्रेस को उम्मीद
राकेश भाटी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पाली विधायक भीमराज भाटी के साथ उनकी राजनीतिक जुगलबंदी को भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने अब चुनौती इस नई राजनीतिक ताकत को वार्ड स्तर तक पहुंचाने की होगी। अगर भाटी अपने पुराने समर्थकों और स्थानीय नेटवर्क को कांग्रेस के साथ जोड़ने में सफल रहे तो इसका सीधा असर नगर निगम के कई वार्डों के समीकरण पर पड़ सकता है। हालांकि निकाय चुनाव में अंतिम फैसला टिकट वितरण, उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और वार्डवार जातीय-सामाजिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
पाली में नगर निगम चुनाव से पहले यह घटनाक्रम भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह जिला होने के कारण यहां का राजनीतिक प्रदर्शन संगठन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी रहेगा।