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Rajasthan Budget 2025: सरकार की आर्थिक नीतियां विफल, अगले साल तक हर राजस्थानी पर एक लाख का कर्ज- टीकाराम जूली
Wed, 19 Feb 2025 05:56 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 19 Feb 2025 05:56 PM IST
सार
प्रदेश सरकार द्वारा आज पेश किए गए बजट को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने खोखली घोषणाओं का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा कि महंगाई को लेकर सरकार की कोई ठोस योजना नहीं है। प्रदेश में कर्ज की स्थिति को देखते हुए जल्दी ही प्रदेश के प्रति व्यक्ति पर एक लाख रुपये का कर्ज होगा।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे पूरी तरह विफल और कर्ज का बोझ बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल खोखली घोषणाओं का पुलिंदा है, जिसमें जनता को किसी तरह की वास्तविक राहत देने की कोई योजना नहीं है।
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राज्य पर बढ़ते कर्ज से हर नागरिक पर बढ़ेगा बोझ
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महज एक साल के शासन में राज्य पर एक लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज चढ़ गया है। यह कर्ज अगले वर्ष तक सात लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो जाएगा, जिससे हर नागरिक पर औसतन एक लाख रुपये का कर्ज बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार आर्थिक कुप्रबंधन का जीता-जागता उदाहरण है, जो केवल दिखावटी घोषणाएं कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
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जूली ने कहा कि पिछली बार न तो बजट पूर्व चर्चा में और न ही बजट के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री को मुख्यमंत्री के साथ बैठने का मौका दिया गया था। इस बार उन्हें मंच पर बैठाया तो गया, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इससे साफ पता चलता है कि भाजपा में केवल श्रेय लेने की राजनीति हो रही है और वित्त मंत्री की कोई स्वतंत्र भूमिका नहीं है।
महंगाई से राहत के लिए कोई ठोस योजना नहीं
टीकाराम जूली ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आम जनता इस समय महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है, लेकिन बजट में इस मुद्दे पर कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2023-24 के बजट में 19,000 करोड़ रुपये का महंगाई राहत पैकेज दिया था, जबकि भाजपा सरकार ने इस बार के बजट में महंगाई शब्द तक शामिल नहीं किया।
जूली ने कहा कि पिछली बार सरकार ने 10 संकल्प तय किए थे, लेकिन इस बार इन संकल्पों का भी बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार के पास कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है और यह सिर्फ दिखावे की घोषणाएं करने में लगी हुई है।
ERCP और रिफाइनरी परियोजना पर सवाल
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए 90% फंडिंग देने को तैयार है, तो राज्य सरकार को 9300 करोड़ रुपये देने की घोषणा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने इसे सरकार की ओर से जनता को गुमराह करने की कोशिश बताया।
उन्होंने पचपदरा रिफाइनरी परियोजना की देरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2024 तक इस रिफाइनरी से उत्पादन शुरू होना था, लेकिन अब इसे अगस्त 2025 तक टाल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की सुस्ती और निर्णय लेने में देरी के कारण इस परियोजना की लागत 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये हो गई है।
सरकारी संपत्तियों की बिक्री पर चिंता
जूली ने बजट में उल्लिखित "असेट मॉनेटाइजेशन" योजना पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार अब अपनी ही संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि आर्थिक स्थिति कितनी खराब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह बजट राजस्थान सरकार की कमजोर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जो अपने रोजमर्रा के खर्चों को चलाने के लिए अपनी संपत्तियां बेचने पर मजबूर हो गई है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में कमी पर आलोचना
जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हर साल 15% वृद्धि का प्रावधान किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इस नियम का पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पेंशन को 1322 रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए था, लेकिन इसे केवल 1250 रुपये किया गया, जो कि अन्यायपूर्ण और जनता के साथ छलावा है।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की लागत पर संदेह
टीकाराम जूली ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को लेकर भी सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस परियोजना की लागत 60,000 करोड़ रुपये बताई है, जबकि डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में इसकी लागत 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि आधे बजट में आखिर ये कैसी सड़कें बनाई जाएंगी और यह परियोजना किस तरह पूरी होगी।
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार के बजट को पूरी तरह विफल और भ्रामक बताते हुए कहा कि इसमें आमजन के लिए कोई ठोस राहत नहीं है। यह बजट केवल खोखली घोषणाओं और दिखावे की राजनीति पर आधारित है, जबकि हकीकत में राजस्थान की जनता को इससे कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अपने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करे और जनता को वास्तविक राहत देने के लिए ठोस योजनाएं बनाए।