{"_id":"6540a536a25659bc8b05ddf0","slug":"karwa-chauth-2023-when-will-karva-chauth-moon-be-visible-in-jaipur-2023-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karwa Chauth Moon Time: 'गुलाबी नगरी' में कब नजर आएगा चांद, यहां जानें सही समय और मुहूर्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karwa Chauth Moon Time: 'गुलाबी नगरी' में कब नजर आएगा चांद, यहां जानें सही समय और मुहूर्त
Wed, 01 Nov 2023 03:26 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 01 Nov 2023 03:26 PM IST
सार
Jaipur Karwa Chauth Chand Kab Nikalenga: करवा चौथ का व्रत इस बार 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाओं ने तैयारियां भी शुरू कर दी है। साड़ी और शॉपिंग समेत सभी तैयारी पूरी हो गई। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है।
विज्ञापन
करवा चौथ का पर्व
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक नवंबर यानी आज पूरे देश में करवा चौथ का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। अगर हम बात करें राजस्थान की तो यहां भी महिलाएं अपने पतियों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसके साथ ही रात्रि में चंद्रमा को देखकर पति से आशीर्वाद लेती हैं।
विज्ञापन
बता दें कि करवा चौथ की पूजा इस बार एक नवंबर को पांच पांच बजकर 44 मिनट से शाम सात बजकर दो मिनट तक की जा सकेगी। इसके साथ ही राजधानी जयपुर में इस बार रात के आठ बजकर 19 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
विज्ञापन
इधर, ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्तूबर मंगलवार को रात नौ बजकर 30 मिनट से शुरू होकर एक नवंबर को रात नौ बजकर 19 मिनट तक है। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, करवा चौथ्र का व्रत एक नवंबर बुधवार को रखा जाएगा। करवा चौथ की पूजा एक नवंबर को पांच पांच बजकर 44 मिनट से शाम सात बजकर दो मिनट तक की जा सकती है।
विज्ञापन
क्यों मनाया जाता है करवा चौथ पर्व
ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत शादीशुदा महिलाएं करती हैं। ये व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सुहाग की कामना के लिए रखती हैं।
करवा पर चांद क्यों देखते हैं
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश का सिर जब धड़ से अलग हुआ था तो उनका सिर चंद्रलोक चला गया था। चंद्रलोक में गणेश जी का सिर होने के कारण चतुर्थी यानि करवा चौथ के दिन गणेश जी की पूजा के बाद चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। इसके साथ ही करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा करने से रोग, कष्ट और पाप मिट जाते हैं। चंद्रमा को शीतलता और प्रेम आदि का भी प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द में वृद्धि करता है।