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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Jaipur News: On Janmashtami, the combined form of Ram-Krishna will be seen at Galta Ji Vaishnav Peeth

Janmashtami 2025: कान्हा संग तो राधा रानी, यहां कैसे मिला रुक्मिणीजी को स्थान, जानें गलता तीर्थ की अनूठी कहानी

Sat, 16 Aug 2025 07:18 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 16 Aug 2025 07:18 AM IST
सार

यहां 452 वर्ष पूर्व तुलसीदासजी ने यहां प्रवास कर अयोध्या कांड की रचना की थी। मंदिर की मूर्तियां श्यामल वर्ण की हैं और यह देश का एकमात्र मंदिर है जहां राम और कृष्ण का संयुक्त स्वरूप सीता और रुक्मिणी के साथ विराजमान है।

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Jaipur News: On Janmashtami, the combined form of Ram-Krishna will be seen at Galta Ji Vaishnav Peeth
श्रीकृष्ण राम रूप में, संग रुक्मिणी जी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर के उत्तर भारत की प्रमुख वैष्णव पीठ गलता जी में इस बार भी जन्माष्टमी महोत्सव पर भक्तों के लिए विशेष आकर्षण है। यहां भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराम के रूप में विराजमान हैं। एक हाथ में बांसुरी की मुद्रा और दूसरे में धनुष-बाण के साथ। सबसे खास बात यह है कि जहां अधिकतर मंदिरों में श्रीकृष्ण के साथ राधारानी विराजमान होती हैं, वहीं गलता जी में उनके साथ रुक्मिणीजी की प्रतिष्ठा हैं।

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इतिहास और महत्व
452 वर्ष पूर्व गोस्वामी तुलसीदासजी ने गलता तीर्थ में 3 वर्ष का प्रवास किया था। यहीं अयोध्या कांड की रचना की थी। वृंदावन यात्रा के दौरान श्रीकृष्ण के दर्शन कर उन्होंने प्रसिद्ध दोहा रचा...
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कहां-कहां छवि आज की, भले विराजे नाथ।
तुलसी मस्तक तब नवे, धनुषबाण लो हाथ।
कित मुरली कित चंद्रिका, कित गोपियन को साथ।
अपने जन के कारिणे श्रीकृष्ण भये रघुनाथ।


इस दोहे के भावानुसार, गलता पीठ के द्वितीय आचार्य कील्हदेवाचार्य महाराज ने भगवान विष्णु के संयुक्त रामगोपाल स्वरूप की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई, जिसमें श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों की विशेषताएं हैं।
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मूर्ति की विशेषता
मंदिर की मूर्तियां श्यामल वर्ण (काले पाषाण) की हैं, जैसा कि श्रीवैष्णव रामानुज संप्रदाय में परंपरागत रूप से होता है। यहां रामजी के स्वरूप के साथ मां सीता हैं, जबकि कृष्णजी के साथ रुक्मिणीजी का रूप विराजमान है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां राम और कृष्ण के संयुक्त खड़े स्वरूप के साथ सीता और रुक्मिणी के दर्शन होते हैं।

जन्माष्टमी का उत्सव
महोत्सव में भव्य शृंगार, कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन होगा। स्वामी राघवेंद्रदास महाराज ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन रामगोपाल और रुक्मिणीजी के अद्भुत दर्शन भक्तों को अलौकिक आनंद देंगे।

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