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राजस्थान: विदेशी महिला बनकर 22 लाख की साइबर ठगी, गुरुग्राम से आरोपी गिरफ्तार

Fri, 09 Oct 2026 05:27 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 09 Oct 2026 05:27 PM IST
सार

फेसबुक पर विदेशी महिला बनकर दोस्ती, विदेश में नौकरी का झांसा और फर्जी कस्टम दस्तावेजों से जयपुर निवासी से 22 लाख रुपये ठगे। पुलिस ने गुरुग्राम से एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

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Jaipur Man Duped of Rs 22 Lakh in Job Scam, Accused Arrested in Gurugram
वसीम हुसैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेसबुक पर विदेशी महिला बनकर दोस्ती करना, विदेश में नौकरी दिलाने और भारत आने का झांसा देना और फिर कस्टम शुल्क व अन्य सरकारी औपचारिकताओं के नाम पर लाखों रुपये ऐंठना। जयपुर के एक व्यक्ति के साथ हुई 22 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में राजस्थान पुलिस ने एक आरोपी को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने तीन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम लेने और उसे दूसरे खातों में पहुंचाने के लिए किया। इन खातों में पीड़ित से ठगे गए करीब 4.12 लाख रुपये आए थे।

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राजस्थान पुलिस के सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (R4C) ने यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी वसीम हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस अब ठगी की रकम के लेन-देन और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है।

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फेसबुक पर विदेशी महिला बनकर फंसाया

पुलिस के अनुसार, जयपुर निवासी परिवादी ने शिकायत में बताया कि 3 मई 2024 को फेसबुक पर उसकी बातचीत दिओंन मार्ले नाम की महिला से शुरू हुई। महिला ने खुद को अमेरिका का निवासी और इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में अकाउंटेंट बताया। बातचीत के दौरान उसने परिवादी के बेटे को विदेश में नौकरी दिलाने और खुद भारत आने का भरोसा दिया।

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इसके बाद कथित महिला और उसके साथियों ने कस्टम शुल्क, मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट, आयकर, लाउंजिंग चार्ज और विदेशी मुद्रा को भारतीय खाते में ट्रांसफर करने जैसी अलग-अलग वजह बताकर पैसे मांगने शुरू कर दिए। भरोसा जीतने के लिए व्हाट्सऐप पर फर्जी पासपोर्ट, एयर टिकट, विदेशी बैंक की रसीद, मास्टर कार्ड और कस्टम व आयकर विभाग से जुड़े जाली दस्तावेज भी भेजे गए।


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सरकारी अधिकारी बनकर भी मांगे पैसे

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग लोगों और सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर फोन पर परिवादी से बात करते थे। वे खुद को कस्टम और अन्य विभागों का अधिकारी बताकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाते रहे। इस तरह परिवादी से कुल 22 लाख रुपये ठग लिए गए।

जब पीड़ित ने आगे पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसके घर का पता होने की बात कहकर जान से मारने की धमकी दी। इसके जरिए उसे डराकर दोबारा रकम जमा करवाने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, गिरोह सोशल मीडिया के जरिए खास तौर पर बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोगों को निशाना बनाता था।

कमीशन के लालच में खुलवाए बैंक खाते

पुलिस की जांच के मुताबिक, वसीम हुसैन ने अपने तीन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम हासिल करने और उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया। इन खातों में पीड़ित से ठगे गए करीब 4.12 लाख रुपये आए। इसके बाद रकम दूसरे खातों में भेजी गई या एटीएम के जरिए निकाली गई।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने चचेरे भाइयों मुर्सद हुसैन और अर्सद हुसैन के कहने पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए थे। आरोप है कि उसने खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल सिम भी उन्हें सौंप दिए। इसके बदले उसे 70 हजार रुपये कमीशन देने का लालच दिया गया था। पुलिस अब इन खातों के इस्तेमाल और अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस

पुलिस टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। आरोपी के बैंक खातों और मोबाइल फोन से जुड़े विवरणों की जांच के बाद उसकी लोकेशन पर नजर रखी गई। इसके आधार पर पुलिस ने गुरुग्राम में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया।

उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन और सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी एवं पुलिस उप अधीक्षक गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई की। टीम में पुलिस निरीक्षक अजय कुमार शर्मा, कांस्टेबल सुभाष कुमार, भीवाराम और कांस्टेबल चालक सुबेसिंह शामिल रहे।

पुलिस अब व्हाट्सऐप और टेलीग्राम रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन की मनी ट्रेल का विश्लेषण कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाना है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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