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Rajasthan JLF: जावेद अख्तर ने हिंदू-मुस्लिम पर कही ऐसी बात, खिलखिला उठी जेएलफ की महफिल, जानिए क्या बोले
Sat, 01 Feb 2025 04:39 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 01 Feb 2025 04:39 PM IST
सार
पांच दिवसीय जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) का आगाज गुरुवार हो गया। पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे गीतांजलिश्री मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने अपनी नई किताब का विमोचन किया।
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जेलएफ फेस्टिवल में जावेद अख्तर और अभिनेता अतुल तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुनियाभर में पहचान बना चुके जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) का आगाज गुरुवार राजधानी जयपुर में हुआ। पांच दिवसीय ये फेस्टिवल तीन फरवरी तक होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित किया जाएगा। आज से जेएलएफ का 18वां एडिशन शुरू हो गया। फेस्टिवल के पहले दिन पहुंचे हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार व साहित्यकार-गीतकार जावेद अख्तर की नई किताब "सीपियां" का विमोचन सुधामूर्ति ने किया। इस दौरान जावेद अख्तर ने ज्ञान सीपियां सेशन में मातृभाषा पर जोर दिया। जावेद अख्तर ने युवा पीढ़ी को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी से वास्ता रखने की सलाह दी। इस दौरान जावेद अख्तर ने कवि और कविता से जुड़ा हिंदू-मुस्लिम पर व्यंगात्मक जवाब दिया।
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दरअसल कार्यक्रम के दौरान गीतांजलिश्री मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने राम रहीम दास के एक बहुत पुराने दोहे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच सौ साल पहले का दोहा है, लेकिन ये हम सबकी लाइफ का रहनुमा है। "रहिमन मुश्किल आ पड़ी, टेढ़े दोऊ काम... सीधे से जग न मिले, उलटे मिले न राम" इस दौरान साथ बैठे अभिनेता अतुल तिवारी, जोकि जावेद अख्तर के पुराने मित्र भी हैं, उन्होंने हौसला अफ़ज़ाई करते हुए बीच में बोलते हुए कहा कि राम की बात एक मुस्लिम कवि कह रहा है। ये बड़ी बात है... इस पर जावेद अख्तर ने भी हंसते हुए जवाब दिया कि भाई कवि... कवि होता है... बेचारे जो शायरी नहीं कर पाते वो लोग होते हैं हिंदू-मुसलमान। जावेद के इस अंदाज पर पूरी महफिल हंसी-ठहाकों से गूंज उठी। उन्होंने कहा कि कविता तो प्यार की भाषा है।
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खुद पर ऐतबार नहीं तो दूसरे की तारीफ मुश्किल
कार्यक्रम के दौरान अकबर और रहमान पर चर्चा चलती रही। तभी एक कवि को दूसरे कवि की तारीफ करने पर ऐतराज की बात पर जावेद अख्तर ने कहा कि 'जिसको अपने ही होने पर शक है वो दूसरे की क्या तारीफ करेगा।' जावेद अख्तर ने कहा कि तारीफ वह कर सकता है, जिसके मन में शांति है, जिनको खुद पर ऐतबार है, जिनको खुद पर ऐतबार नहीं वह दूसरे की तारीफ नहीं कर सकता।
मातृभाषा से भी जुड़े रहना चाहिए
जेएलएफ कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने अपनी नई किताब "सीपियां" का विमोचन किया। ये किताब दोहों पर आधारित है और सुधामूर्ति ने इसका विमोचन किया। करते हुए कहा है कि आज की पीढ़ी को अंग्रेजी से वास्ता रखना चाहिए पर अपनी मातृभाषा से भी जुड़े रहना चाहिए। अगर आप अपनी मातृभाषा से नहीं जुड़े हैं तो यह मान लीजिए कि आपने पेड़ को तना और साखें तो दे दी, मगर जड़ों से उसको महरूम रख दिया है।
600 स्पीकर्स शामिल
जेएलएफ का ये 18वां एडिशन है और इस साल दुनियाभर से इसमें 600 स्पीकर्स शामिल हो रहे हैं। इस साहित्यिक मंच पर कई लेखकों की बुक भी लॉन्च होगी।