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राजस्थान: दो दशक से मूलभूत सुविधाओं से वंचित 2,00 परिवार, हाई कोर्ट ने मांगा विस्तृत हलफनामा
Sun, 01 Nov 2026 08:08 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 01 Nov 2026 08:08 AM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की विनायक रेजीडेंसी में करीब 200 परिवारों को दो दशक से सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं नहीं मिलने पर जेडीए सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। निवासियों ने याचिका में जलभराव, सीवरेज ओवरफ्लो और गंदगी की समस्या उठाई है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय ने मांगा हलफनामा
- फोटो : ANI
विस्तार
राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के सचिव से शहर की पंजीकृत आवासीय कॉलोनी में दो दशक से सड़क और सीवरेज सुविधाएं उपलब्ध न कराने तथा विकास कार्यों की समय सीमा स्पष्ट न करने पर विस्तृत हलफनामा मांगा है।कोर्टविहार क्षेत्र में स्थित विनायक रेजीडेंसी सोसायटी के निवासियों की याचिका पर सुनवाई की। स्थानीय निवासी हीरालाल गोठवाल द्वारा दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश आनंद शर्मा की पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण के सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र मांगा है।
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प्राथमिक सुविधाओं को तरस रहे लोग
अदालत में निवासियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता सहित लगभग 200 परिवारों ने वर्ष 2005 में जेडीए से विधिवत नियमित ब्लॉक 61 से 67 में अपने मकान और फ्लैट खरीदे थे। इस नियमन को लगभग दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों को आज तक पक्की सड़क, सीवरेज लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। नागरिक वर्षों से इन प्राथमिक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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निविदा निरस्त करने पर प्राधिकरण सचिव से हलफनामा तलब
याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में नालियों और सीवरेज प्रणाली की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मानसूनी बारिश के दौरान मुख्य मार्ग का पानी बहकर आवासीय फ्लैटों तक भर जाता है। इससे पूरे क्षेत्र में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और निवासियों की आवाजाही ठप पड़ जाती है। सीवरेज टैंकों का पानी ओवरफ्लो होकर बहने से पूरे क्षेत्र में गंदगी और कीचड़ फैल जाता है, जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का अंदेशा बना रहता है।
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प्राथमिक सुविधाओं को तरस रहे लोग
अदालत में निवासियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता सहित लगभग 200 परिवारों ने वर्ष 2005 में जेडीए से विधिवत नियमित ब्लॉक 61 से 67 में अपने मकान और फ्लैट खरीदे थे। इस नियमन को लगभग दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों को आज तक पक्की सड़क, सीवरेज लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। नागरिक वर्षों से इन प्राथमिक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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निविदा निरस्त करने पर प्राधिकरण सचिव से हलफनामा तलब
याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में नालियों और सीवरेज प्रणाली की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मानसूनी बारिश के दौरान मुख्य मार्ग का पानी बहकर आवासीय फ्लैटों तक भर जाता है। इससे पूरे क्षेत्र में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और निवासियों की आवाजाही ठप पड़ जाती है। सीवरेज टैंकों का पानी ओवरफ्लो होकर बहने से पूरे क्षेत्र में गंदगी और कीचड़ फैल जाता है, जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का अंदेशा बना रहता है।