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'हमें सख्त आदेश पारित करने के लिए मजबूर मत कीजिए': पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट नाराज, जमकर लगाई फटकार

Wed, 15 Jul 2026 07:16 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 15 Jul 2026 07:16 PM IST
सार

31 जुलाई तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने के आदेश की पालना नहीं करने पर हाईकोर्ट नेमुख्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव को गुरुवार को किया तलब कर लिया है-

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High Court Summons Rajasthan SEC Chief Over Local Body Poll Delay
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव तय समय सीमा के भीतर नहीं कराए जाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार, राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि यदि राज्य चुनाव आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है तो हाईकोर्ट किसी अन्य व्यक्ति को चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपने पर विचार करेगा।

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खंडपीठ ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हमें सख्त आदेश पारित करने के लिए मजबूर मत कीजिए।" अदालत ने राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। मौखिक टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें हटाकर सक्षम अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
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अदालत ने अपने पूर्व आदेशों का पालन नहीं होने को गंभीर माना और राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह तथा राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव को गुरुवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
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सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार अदालत के आदेशों की अवहेलना नहीं कर रही है, लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण आरक्षण का वर्गीकरण पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने अदालत को बताया कि आयोग ने 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। इसी आधार पर सरकार ने चुनाव टालने के लिए अंतिम अवसर देने का अनुरोध किया।

इस पर याचिकाकर्ता एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट अपने 22 मई के आदेश में पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि ओबीसी आयोग समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है तो चुनाव उसकी प्रतीक्षा में नहीं रोके जा सकते। इसके बावजूद राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो अदालत के आदेशों की अवमानना है।


वहीं, दूसरे याचिकाकर्ता गिर्राज सिंह देवंदा की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने दलील दी कि सरकार का चुनाव स्थगित करने संबंधी प्रार्थना पत्र सुनवाई योग्य ही नहीं है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 243(क) का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव कराना राज्य चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और आयोग अपने दायित्व के निर्वहन में विफल रहा है।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 15 अप्रैल तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था। बाद में राज्य सरकार के अनुरोध पर अदालत ने समय बढ़ाते हुए 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने के आदेश दिए थे। साथ ही ओबीसी आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे। निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद न तो आयोग ने रिपोर्ट सौंपी और न ही चुनाव प्रक्रिया पूरी हो सकी। इसी पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाया है।

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