मंदिर ड्रेस कोड विवाद: राजधानी जयपुर के झारखंड महादेव मंदिर में लगा बैनर, मर्यादित वस्त्र पहनकर आने के निर्देश
जयपुर के झारखंड महादेव मंदिर में ड्रेस कोड लागू करने के लिए लगाया गया बैनर। छोटे कपड़ों में पहुंचीं महिलाओं को बाहर से करने पड़ेंगे दर्शन। मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहनकर आने के निर्देश दिए गए हैं।
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राजस्थान के मंदिरों में अब छोटे कपड़े पहनकर जाने वाली महिलाओं की एंट्री पर सवाल उठने लगे हैं। भीलवाड़ा और उदयपुर के बाद अब जयपुर में भी एक मंदिर के बाहर पोस्टर लगा दिया गया है। हाफ पैंट, छोटे कपड़े पहनकर आने वाले बाहर से ही दर्शन का लाभ प्राप्त करें। उदयपुर के सबसे बड़े जगदीश मंदिर के बाद अब राजधानी जयपुर के वैशाली नगर स्थित झारखंड महादेव मंदिर में भी ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। यहां हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, कटी-फटी जीन्स, फ्रॉक आदि जैसे कपड़ों में एंट्री नहीं मिलेगी। मंदिर परिसर के मेन गेट पर ही मंदिर प्रशासन द्वारा इस तरीके का एक पोस्टर चिपकाया गया है। जो चर्चा विषय बना हुआ है।
पोस्टर में ये लिखा
- सभी महिलाएं एवं पुरुष मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहनकर ही आएं।
- छोटे वस्त्र-हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाईट सूट, कटे-फटे जीन्स, फ्रॉक आदि पहन कर आने पर बाहर से ही दर्शन करने का लाभ प्राप्त करें।
- हम आशा करते हैं कि आप भारतीय संस्कृति को बड़े सुचारू रूप से धारण करने में सहयोग करेंगे।
जंगल और झाड़ की वजह से इस मंदिर का नाम झारखंड महादेव रखा गया
मान्यता है कि झारखंड महादेव स्वयंभू हैं। इसका मतलब होता है कि जो स्वयं से प्रकट हुए हैं। शिवलिंग कितना पुराना है, इसके बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर बताया जाता है कि 1918 में सेठ बब्बू जी माहेश्वरी ने गुरु गोविंद नाथ जी के आशीर्वाद से करवाया था। झारखंड महादेव नाम के पीछे का रहस्य यह है कि पहले यहां घने जंगल हुआ करते थे। उस घने जंगल और झाड़ की वजह से इस मंदिर का नाम झारखंड महादेव रखा गया। राजस्थान के मंदिरों में पहली बार छोटे कपड़ों पर रोक नहीं लगाई है। कुछ दिन पहले उदयपुर के जगदीश मंदिर में शॉर्ट टी शर्ट, शॉर्ट जींस, बरमुंडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश शर्मा ने कहा है कि हमने पोस्टर लगाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। कम से कम आने वाली जनरेशन को सही ज्ञान देने के लिए और भारतीय संस्कृति को समझाने के लिए आज हिंदू धर्म और संस्कृति को बचाने की जरूरत है। जो मंदिर हैं, आस्था का प्रतीक हैं। मंदिर में जो लोग जाते हैं वस्त्र तो पूरे पहन के मर्यादा के हिसाब से ही जाएं। यह कोई पर्यटक स्थल नहीं है। कोई पिकनिक स्थल नहीं है। यह मंदिर है। मंदिर में तो भगवान के दर पर आ रहे हो मर्यादा के अनुकूल जो कपड़े बनते हैं वही वस्त्र पहन कर आएं।
यह सबसे अच्छी पहल है। हमारे यहां तो दर्शनार्थियों ने पहले पहल की है इस चीज की है। हमारे ट्रस्ट ने निर्णय लिया है। दर्शनार्थियों की इच्छा है हम भी यहां बैनर लगा देते हैं। आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति का कोई नॉलेज नहीं है। उनको पता भी नहीं है हमें कहां किस वस्त्र में कहां पर किस हिसाब से जाना है। हम उनको इस माध्यम से बताएंगे। हमने दर्शनार्थियों से विनम्र निवेदन किया है।