राजस्थान: रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस पर CM भजनलाल का संदेश, नई पीढ़ी से किया खास आह्वान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस के अवसर पर राजस्थान के लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसे भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पर्व राजस्थान और देश की समृद्ध संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों का परिचायक है। वहीं, संस्कृत दिवस पर उन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए नई पीढ़ी से इसके संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 28 अगस्त को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति का भी परिचायक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार हमें यह याद दिलाता है कि भारतीय परंपरा में रिश्तों का विशेष महत्व है। इन रिश्तों को केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि मन, कर्म और वचन से निभाया जाता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस पावन पर्व को आपसी प्रेम, विश्वास और भाईचारे की भावना के साथ मनाने की अपील की।
संस्कृत ने ज्ञान की समृद्ध परंपरा को सहेजा
मुख्यमंत्री ने संस्कृत दिवस, जो श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है, पर भी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीन भाषाओं में से एक होने के साथ ही अनेक भाषाओं की जननी भी है। संस्कृत ने धर्म और दर्शन के साथ-साथ चिकित्सा, योग, संगीत और साहित्य से जुड़े ज्ञान को भी सदियों से सहेजकर रखा है।
नई पीढ़ी से संस्कृत के संवर्धन का आह्वान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की नव पीढ़ी से संस्कृत भाषा के संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए दोनों पर्वों को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर बताया।