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अनोखा फैसला: शौचालय नहीं तो उस घर के लड़के से शादी नहीं

Fri, 24 Jul 2015 09:06 AM IST
Updated Fri, 24 Jul 2015 09:06 AM IST
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Girls will not marry in those house in which there is no toilet
राजस्थान की एक पंचायत ने एक अनोखा फैसला लेते हुए खाप पंचायतों को सबक दिया है कि तानाशाही फैसले छोड़ अब सामाजिक फैसले लेने का वक्त आ गया है। जालौर जिले की आनवलोज ग्राम पंचायत ने फैसला किया है कि कोई भी अपनी बेटी की शादी उस लड़के से नहीं करेगा, जिसके घर शौचालय नहीं होगा। इस ग्राम पंचायत की महिला सरपंच ममता विश्नोई ने यहां यह नियम लागू किया है।
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राजस्थान सरकार ने ग्राम पंचायत चुनाव व स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के लिए शौचालय होने की शर्त लागू कर दी है, वहीं अब आनवलोज ग्राम पंचायत ने शौचालय नहीं होने पर बेटी की शादी नहीं करने के फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की गरिमा बढ़ाने और स्वच्छता का पैगाम दिया है। प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित जालौर जिला राजस्थान के पिछड़े जिलों में आता है। इस ग्राम पंचायत में चार गांव आते हैं।
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ग्राम पंचायत ने नियम तोडऩेवाले परिवार पर ही नहीं, बल्कि हलवाई व पंडित पर भी जुर्माने का प्रावधान रखा है। नियमानुसार जो भी परिवार अपने पुत्र की शादी करेगा, पहले उसे शपथ पत्र पर देना होगा कि उसके घर में शौचालय चालू हालत में है। तब ग्राम पंचायत संबंधित परिवार को लड़के की शादी के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देगी। इस एनओसी का उल्लेख निमंत्रण पत्र में भी करना होगा।
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परिजन ही नहीं, हलवाई व पंडित को भी दण्ड

Girls will not marry in those house in which there is no toilet

ग्राम पंचायत ने नियम तोडऩेवाले परिवार पर ही नहीं, बल्कि हलवाई व पंडित पर भी जुर्माने का प्रावधान रखा है। नियमानुसार जो भी परिवार अपने पुत्र की शादी करेगा, पहले उसे शपथ पत्र पर देना होगा कि उसके घर में शौचालय चालू हालत में है। तब ग्राम पंचायत संबंधित परिवार को लड़के की शादी के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देगी। इस एनओसी का उल्लेख निमंत्रण पत्र में भी करना होगा।

इस ग्राम पंचायत को सरकार का भी सहयोग मिला रहा है। जिला कलक्टर ने इस ग्राम पंचायत को हर घर में शौचालय बनाने के लिए 55 लाख रुपए जारी किए हैं। ग्रामीणों ने शौचालय बनवाना शुरू भी कर दिया है। इससे पूर्व  शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी अधिकारियों को सरकार स्वच्छ भारत अभियान को राजस्थान में स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा  बनाने के निर्देश दे चुके हैं।

पहले पानी के कारण नहीं मिलती थी बहुएं

करीब आठ वर्ष पहले इस जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के अभाव के कारण ग्रामीण अपनी बेटियों की शादी दूसरे जिलों में करते थे। यहां महिलाओं को पानी सिर पर मटकी रखकर काफी दूर से लाना पड़ता था। अब वर्ष 2006 में गुजरात से नर्मदा नगर का पानी आने से स्थानीय युवाओं के अविवाहित रहने की समस्या धीरे-धीरे दूर हुई।

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