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सियासी घमासान: भाजपा करौली हिंसा और कांग्रेस उठा रही ईआरसीपी का मुद्दा, जानिए क्या है पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना?

Fri, 15 Apr 2022 05:09 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Fri, 15 Apr 2022 05:09 PM IST
सार

करौली हिंसा और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर राजस्थान की सियासत गरमाई हुई है। भाजपा करौली हिंसा को लेकर सरकार पर हमलावर है तो वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के नेता केंद्र सरकार और प्रदेश के नेताओं पर निशाना साध रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से जुड़े सवाल का देंगे, पढ़ें विस्तृत जानकारी

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Full Details of East Rajasthan Canal Project
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के बारे में सब कुछ जानिए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ईआरसीपी यानी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने हैं। योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। राजस्थान सरकार के एक मंत्री के बयान पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री ने तीखी प्रतिक्रया दी।

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इसके बाद से विवाद और बढ़ गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत आमने-सामने आ आए। उधर, करौली में हिंदू नव वर्ष पर निकाली गई रैली पर पथराव के बाद हुईं हिंसा को लेकर भाजपा प्रदेश सरकार पर हमलावर है। भाजपा नेता सरकार पर तुष्टीकरण करने का आरोप लगा रहे हैं।   

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केंद्रीय मंत्री शेखावत के दावे पर मुख्यमंत्री गहलोत ने उनसे राजनीति से सन्यास लेकर संकल्प पूरा करने की बात कही। इसके बाद दोंनों नेताओं में ट्विटर पर वॉर छिड़ गया। एक के बाद एक बयान दिए जाने लगे। यह सब करीब पिछले एक हफ्ते से चला आ रहा है। सीएम गहलोत और कांग्रेस पार्टी के नेता लगातार ईआरसीपी का मुद्दा उछाल रहे हैं। अभी हाल ही में दिए एक बयान में अशोक गहलोत ने कहा कि अगर ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया तो भाजपा के खिलाफ प्रदेश में एक बहुत बड़ा मुद्दा बन सकता है।

करीब एक हफ्ते से चल रहे सीयासी बयानबाजी के बीच हम यहां आपको बताएंगें कि ईआरसीपी राजस्थान और वहां के लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है? प्रदेश के किन जिलों में इस योजना का लाभ मिलेगा? जल संकट से जूझ रहे लोगों के लिए यह कितना फायदेमंद होगा? किन जिलों के किसानों के लिए योजना वरदान साबित होगी? तो आइए अब आपको सिलसिलेवार तरीके से पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के बारे में बताते हैं। 

ईआरसीपी क्या है?
प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का खाका तैयार किया गया था। बताया जाता है कि यह परियोजना उन्हीं की देन हैं। इसके अंतर्गत पार्वती, चंबल और कालीसिंध नदी को जोड़ने की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसके जरिए पूर्वी राजस्थान के जयपुर, अजमेर, करौली, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, अलवर, बारा, झालावाड़, भरतपुर, धौलपुर, बूंदी और कोटा को जल संकट से छुटकारा मिलेगा। पेयजल के साथ किसानों को सिंचाई के लिए भी जरूरत का पानी मिल सकेगा।  

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कितना खर्च और क्या फायदा?
ईआरसीपी योजना के लिए 40 हजार करोड़ का बजट तय किया गया है। प्रदेश का 23.67 फीसदी इलाका इस योजना के अंतर्गत आएगा। राज्य के 41.67 फीसदी आबादी को इसका फायदा मिलेगा। दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा। इसे पूरा करने के लिए सात साल का लक्ष्य तय किया गया है। इसका काम तीन चरणों में किया जाएगा। 

राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग क्यों?
ईआरसीपी योजना को पूरा करने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये चाहिए। प्रदेश सरकार इतने बड़े खर्च वाली परियोजना को खुद के दम पर पूरा नहीं कर सकती। इस कारण से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्र सरकार से बार-बार ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घाषित करने की मांग कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर देती है तो इसमें खर्च होने वाली 90 फीसदी रकम उसे ही देनी होगी। ऐसे में केंद्र के सहयोग से यह योजना आसानी से पूरी हो जाएगी। 

परियोजना के तहत क्या बनेगा?
26 छोटे और बड़े बांधों का निर्माण किया जाएगा। जिससे दो लाख हेक्टेयर नए कमांड क्षेत्र के साथ 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई में सुधार आएगा। करीब 1268 किलोमीटर लंबा कैनाल भी विकसित किया जाएगा। 

इन नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा
परियोजना के तहत कालीसिंध, कुन्नू, कुल, पार्वती और मेज नदी सब बेसिन का पानी बनास, पार्वती, कालीसिंध, मोरेल, बाणगंगा व गंभीर नदी सब बेसिन में पहुंचाया जाना है।  

पानी का ऐसे होगा बंटवारा

  • 1723 एमसीएम पीने का पानी के लिए
  • 1500 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए
  • 284.4 एमसीएम पानी उद्योगों के लिए


पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था
इस विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा था कि राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के बाद से कोई बड़ा सिंचाई और पेयजल प्रोजेक्ट नहीं आया है। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) की मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसके बाद उन्होंने परियोजना के अध्ययन की बात कही थी। 

सीएम अशोक गहलोत क्या कह रहे  
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि राजस्थान जैसे जल अभावग्रस्त राज्य के लिए परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा नहीं दिया जाएगा तो किसे मिलेगा? यहां के सांसद केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत हैं पर वो राज्य के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। सरकार के सीमित संसाधनों से इस परियोजना को पूरा करने में 15 साल लग जाएंगे और इसकी लागत भी बढ़ती जाएगी। केंद्र इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करता है तो ग्रांट मिलने से काम तेजी और कम लागत में काम हो सकेगा।  
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