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राजस्थान: AI की मदद से बना फर्जी RGHS अफसर, ऑडिट के नाम पर अस्पताल से मांगी रिश्वत; 40 हजार लेते ACB ने दबोचा

Tue, 22 Sep 2026 09:12 PM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Tue, 22 Sep 2026 09:12 PM IST
सार

राजस्थान में ठगी का एक हाईटेक मामला सामने आया है। एक रिसेप्शनिस्ट ने AI की मदद से खुद को राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) का अफसर बना लिया और प्राइवेट अस्पतालों से ऑडिट के नाम पर वसूली शुरू कर दी।

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*AI Conman Busted in Jaipur: Dausa Receptionist Caught Taking Rs 40,000 Bribe Posing as Fake RGHS Officer
ठग मनीष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में ठगी का एक हाईटेक मामला सामने आया है। एक निजी अस्पताल के रिसेप्शनिस्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से खुद को राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) का अधिकारी बताकर निजी अस्पतालों से वसूली शुरू कर दी। आरोपी फर्जी आईडी कार्ड और ऑडिट लेटर तैयार कर अस्पताल संचालकों को कार्रवाई का डर दिखाता था। ACB ने जाल बिछाकर आरोपी को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी दौसा जिले का रहने वाला है।

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रिसेप्शनिस्ट ने खुद को बताया RGHS का अधिकारी
ACB के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीष कुमार शर्मा पुत्र गिर्राज पंचौली के रूप में हुई है। वह दौसा जिले के पंचौली ढाणी, लांका-बहरावंडा का मूल निवासी है। उसका वर्तमान पता जयपुर के जगतपुरा स्थित बंशीपुरी प्रथम का है। आरोपी जयपुर के मालवीय नगर स्थित एक निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करता था। आरोपी ने AI टूल की मदद से दो फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इनमें संतोष कुमार शर्मा के नाम से RGHS के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर का फर्जी आईडी कार्ड और पत्र क्रमांक 3350, दिनांक 22 अगस्त 2026 शामिल है। यह फर्जी पत्र SKI हॉस्पिटल, डीडवाना, नागौर के नाम जारी किया गया था।
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ऑडिट और अस्पताल से बाहर करने का डर दिखाया
आरोपी ने इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए डीडवाना स्थित SKI हॉस्पिटल के संचालक को डराया कि अस्पताल का RGHS ऑडिट होने वाला है। उसने कहा कि ऑडिट में गड़बड़ी मिलने पर अस्पताल को RGHS की सूची से हटा दिया जाएगा। इसके बाद आरोपी ने पहले 35 हजार रुपए मांगे। बाद में रकम बढ़ाकर 45 हजार रुपए कर दी। बातचीत के बाद 40 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इस पर अस्पताल संचालक ने ACB जयपुर नगर-तृतीय में शिकायत दर्ज कराई।
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40 हजार रुपए लेते ACB ने पकड़ा
शिकायत मिलने के बाद DIG द्वितीय ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में ASP ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में ट्रैप टीम गठित की गई। आरोपी जैसे ही परिवादी से 40 हजार रुपए लेने पहुंचा, ACB टीम ने उसे पकड़ लिया। रिश्वत की रकम बरामद करने के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।

नाम और पद दोनों निकले फर्जी
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कोई लोक सेवक नहीं है। वह न तो UDC है और न ही RGHS का डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर। उसका वास्तविक काम निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट का था। बताया जा रहा है कि उसने RGHS की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा और इसी जानकारी का इस्तेमाल कर ठगी की योजना बनाई।

प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और प्रतिरूपण का सामने आया है। आरोपी के सरकारी कर्मचारी नहीं होने के कारण ACB ने उसे ज्योति नगर थाना पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।



कई और अस्पतालों से वसूली की आशंका
ACB को आशंका है कि आरोपी ने इसी तरह अन्य अस्पतालों से भी पैसे ऐंठे हो सकते हैं। उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और प्रिंटर की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और किन-किन अस्पतालों से संपर्क किया। ACB ने RGHS से जुड़े अस्पतालों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति ऑडिट या बिल पास कराने के नाम पर पैसे मांगता है तो इसकी सूचना तुरंत ACB हेल्पलाइन 1064 या 94135-02834 पर दें। किसी भी संदिग्ध पत्र या दस्तावेज पर भरोसा करने से पहले RGHS मुख्यालय से उसका सत्यापन करें।

AI से फर्जी दस्तावेज बनाने का नया तरीका
यह मामला दिखाता है कि ठग अब AI टूल का इस्तेमाल कर सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी आईडी कार्ड और दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। इससे असली और नकली दस्तावेज में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब यह भी जांच की जा रही है कि उसने AI की मदद से कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इस तरीके से कितनी रकम की वसूली की।

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