दौसा में बैंक घोटाले का मामला: फर्जी एनओसी से बैंक को 12.14 लाख का नुकसान, मैनेजर समेत तीन को 7 साल की जेल
दौसा के लालसोट स्थित बैंक शाखा में 12.14 लाख रुपये के घोटाले में जयपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन लोक सेवकों को दोषी ठहराया। तीनों को 7-7 साल के कठोर कारावास और 85-85 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
विस्तार
दौसा जिले के लालसोट स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिवसिंहपुरा शाखा में हुए 12.14 लाख रुपये के घोटाले में जयपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन लोक सेवकों को बैंक धोखाधड़ी का दोषी मानते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास और 85-85 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। फैसला 18 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
2019 में सामने आया था मामला
मामला वर्ष 2019 का है। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन उप महाप्रबंधक ने बैंक में हुई गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद 1 फरवरी 2019 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि लालसोट की शिवसिंहपुरा शाखा में बैंक कर्मचारियों ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया था। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का बाद में पंजाब नेशनल बैंक में विलय हो गया।
फर्जी एनओसी जारी कर बैंक को 12.14 लाख का नुकसान
सीबीआई की जांच के अनुसार, शाखा में तैनात स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी किए। किसानों ने बैंक से ऋण लिया था और इसके बदले अपनी जमीन बैंक के पास गिरवी रखी थी। ऋण चुकाने के बाद ही जमीन से संबंधित दस्तावेज और प्रतिभूतियां रिलीज की जानी थीं। आरोप था कि मुरारी लाल मीणा ने बकाया ऋण होने के बावजूद दस्तावेजों में ऋण चुकता दिखाया और फर्जी एनओसी जारी कर दी। इसके आधार पर गिरवी रखी गई प्रतिभूतियां और जमीनें रिलीज कर दी गईं। जांच के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े से बैंक के तीन अलग-अलग ऋण खातों में कुल 12,14,660 रुपये 71 पैसे का नुकसान हुआ।
पढे़ं: छापे-नोटिस-गिरफ्तारी और आधी रात में कोर्ट, जानें चुनाव मैनेजमेंट की पूरी कहानी
शाखा प्रबंधक और चपरासी भी दोषी
सीबीआई जांच में शाखा प्रबंधक रामजी लाल मीणा और चपरासी-सह-हाउसकीपर थान सिंह लश्कर की भूमिका भी सामने आई। अभियोजन के अनुसार, शाखा प्रबंधक की मिलीभगत के बिना एनओसी जारी करना और सिक्योरिटी रिलीज करना संभव नहीं था। वहीं, थान सिंह लश्कर ने फाइलों में हेरफेर करने में मदद की। सीबीआई ने 5 मई 2022 को तीनों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। तीनों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अमानत में खयानत, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया।
20 से ज्यादा गवाह और दस्तावेज बने आधार
जयपुर की विशेष सीबीआई अदालत में मामले की सुनवाई करीब चार साल चली। अभियोजन पक्ष ने 20 से अधिक गवाह पेश किए। फर्जी एनओसी, बैंक रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। बचाव पक्ष की ओर से इसे लापरवाही बताया गया, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी जनता के धन और बैंक की संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। अदालत ने तीनों दोषियों रामजी लाल मीणा, मुरारी लाल मीणा और थान सिंह लश्कर को 7-7 साल के कठोर कारावास और 85-85 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं चुकाने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फैसले के बाद तीनों दोषियों को अदालत से ही हिरासत में लेकर जयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।