बीकानेर: ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में भारत-अमेरिका की सैन्य ताकत का प्रदर्शन, महाजन रेंज पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर
बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को निरीक्षण किया। उन्होंने दोनों देशों के सैनिकों को साथ प्रशिक्षण करते देखा और तैयारियों की जानकारी ली।
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अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आज गुरुवार को राजस्थान में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' का निरीक्षण किया और दोनों देशों के सैनिकों की संयुक्त तैयारियों को देखा। राजदूत गोर ने महाजन क्षेत्र में चल रहे इस अभ्यास स्थल पर पहुंचकर दोनों थल सेनाओं की युद्ध क्षमताओं का मूल्यांकन किया। उन्होंने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास करते देखकर दोनों देशों के रक्षा संबंधों की मजबूती पर प्रसन्नता व्यक्त की। राजदूत गोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब तक के सबसे मजबूत दौर में पहुंच चुकी है। उन्होंने इस संयुक्त सैन्याभ्यास को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया।
अनुभवों से सीख रही दोनों देशों की सेनाएं
राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस युद्ध अभ्यास में दोनों देशों की थल सेनाओं के जवान हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी राजदूत गोर ने सैन्य कमांडरों से मुलाकात की और अभ्यास के दौरान अपनाई जा रही आधुनिक युद्ध रणनीतियों की विस्तृत जानकारी ली। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद विरोधी अभियानों में अंतर-संचालनीयता बढ़ाना और जटिल रेगिस्तानी परिस्थितियों में संयुक्त सैन्य अभियानों को अंजाम देना है।
राजदूत गोर ने सैनिकों के उच्च स्तरीय अनुशासन और उन्नत तकनीकी समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के अनुभवों से सीख रही हैं, जिससे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई दिशा मिल रही है। रक्षा अधिकारियों ने राजदूत को बताया कि अभ्यास के दौरान अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन तकनीक और संयुक्त कमान प्रणालियों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा रहा है।
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द्विपक्षीय संबंधों और सुरक्षा पर जोर
राजदूत गोर ने सैन्य दल को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ न होकर क्षेत्र में वैश्विक नियमों पर आधारित व्यवस्था की रक्षा के लिए है। जब दोनों देशों के सैनिक मैदान में एक साथ काम करते हैं, तो वे दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देते हैं कि लोकतंत्र और साझा मूल्य हमेशा एकजुट रहेंगे। उन्होंने भारतीय सेना के आतिथ्य और उच्च पेशेवर मानकों की खुले दिल से प्रशंसा की।
भावी रक्षा सहयोग और रणनीतिक लक्ष्य
अमेरिकी दूतावास के अनुसार राजदूत गोर का यह दौरा भारत-अमेरिका रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। सैन्य प्रवक्ताओं ने जानकारी दी कि युद्ध अभ्यास 2026 के माध्यम से दोनों थल सेनाएं जटिल परिस्थितियों में संचार नेटवर्क स्थापित करने और त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता को परख रही हैं। राजदूत गोर ने दोनों देशों के रक्षा नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसे अभ्यास और अधिक गहन और व्यापक होंगे।