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Ajmer News: अजमेर दरगाह विवाद मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, नए पक्षकार शामिल किए, 22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
Fri, 08 May 2026 01:18 PM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 01:18 PM IST
सार
अजमेर दरगाह में हिंदू मंदिर होने के दावे को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में अदालत ने कई नए पक्षकारों को मामले में शामिल करने की अनुमति दी है, जबकि कुछ आवेदनों को खारिज करते हुए उन पर जुर्माना भी लगाया है।
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अजमेर दरगाह मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में हिंदू मंदिर होने के दावे से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत ने अहम आदेश जारी किए हैं। सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, अजमेर (पश्चिम) ने मामले में कई नए पक्षकारों को शामिल करने की अनुमति दी है, जबकि कुछ आवेदनों को खारिज करते हुए संबंधित प्रार्थियों पर जुर्माना भी लगाया है।
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यह आदेश भगवान श्री संकटमोचन व अन्य बनाम दरगाह कमेटी अजमेर व अन्य मामले में दिया गया। लंबे समय से चर्चा में बने इस विवाद में अदालत के ताजा फैसले के बाद एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।
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अदालत ने किन्हें बनाया पक्षकार
अदालत ने हिंदू सेना से जुड़े विष्णु गुप्ता पक्ष के साथ राजवर्धन सिंह परमार को वादी पक्ष में शामिल करने की अनुमति दी है।
इसके अलावा अदालत ने मोईनिया फखरिया चिश्ती खुद्दाम ख्वाजा साहिब सैयदजादगान, दीवान सैयद जैनुल आबेदीन और अंजुमन यादगार चिश्तियां शेखजादगान खुद्दाम ख्वाजा साहिब सहित कई संगठनों और प्रतिनिधियों को प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है।
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साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी दरगाह कमेटी और अन्य संबंधित पक्षों को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने कहा कि विवाद की प्रकृति को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों की सुनवाई जरूरी है, ताकि मामले का निष्पक्ष निस्तारण हो सके।
वादी पक्ष को दिए निर्देश
अदालत ने वादी पक्ष को अगली तारीख से पहले संशोधित दस्तावेज पेश करने और नए पक्षकारों को वाद पत्र व अन्य जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
9 आवेदनों को खारिज कर लगाया जुर्माना
सुनवाई के दौरान अदालत ने कुछ आवेदकों के आवेदन खारिज करते हुए उन पर जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि कई लोगों ने बिना पर्याप्त आधार के खुद को पक्षकार बनाने के लिए आवेदन दिए, जिससे न्यायालय का समय खराब हुआ।
अदालत ने कुल 9 प्रार्थियों के आवेदन खारिज करते हुए प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस तरह कुल 2.70 लाख रुपये की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अजमेर में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
अगली सुनवाई 22 जुलाई को
अदालत ने बताया कि मामले में आदेश 7 नियम 11 सीपीसी से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर बहस पूरी हो चुकी है। अब अन्य लंबित मामलों पर आगे नियमानुसार सुनवाई होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े इस विवाद पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।