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Rajasthan: गहलोत-पायलट समझौते के बाद BJP ने विधानसभा सत्र-चुनाव को लेकर बनाई रणनीति, इस तरह कांग्रेस को घेरेगी

Tue, 11 Jul 2023 09:27 AM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 11 Jul 2023 09:27 AM IST
सार

सवाईमाधोपुर में हुई भाजपा की दो दिवसीय विजय संकल्प बैठक में बड़ी रणनीति तैयार की गई है। जिसके तहत 18 जुलाई को अजमेर में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। विधानसभा के 14 जुलाई से शुरू होने जा रहे सत्र में भी भाजपा आरपीएससी पेपर लीक, भ्रष्टाचार, कुशासन और महिला अत्याचार-रेप के मुद्दे को उठाएगी।

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After the Gehlot-Pilot agreement BJP raised issue of unemployed and paper leak Case in Rajasthan assembly
भाजपा (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI

विस्तार

कांग्रेस आलाकमान की मध्यस्थता में सचिन पायलट के अशोक गहलोत से समझौता करने के बाद पायलट राजस्थान के बेरोजगार युवाओं और पेपर लीक प्रभावितों के मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। इससे लाखों बेरोजगार युवाओं और उनके अभिभावकों में नाराजगी पनप रही है। जिसे बीजेपी ने भांप लिया है। इस मुद्दे को टेक ओवर करते हुए अब भाजपा बेरोजगार युवाओं की आवाज बनने के लिए उसी अजमेर जिले से जन आंदोलन की शुरुआत करने जा रही है, जहां से सचिन पायलट ने अपनी ही गहलोत सरकार के एक्शन नहीं लेने पर पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं को साथ लेकर जन संघर्ष पैदल यात्रा जयपुर तक निकाली थी।

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सवाईमाधोपुर में हुई भाजपा की दो दिवसीय विजय संकल्प बैठक में भीतरखाने बड़ी रणनीति तैयार की गई है। जिसके तहत भाजपा 18 जुलाई को अजमेर में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी। जिसमें पार्टी के तमाम कद्दावर नेता मौजूद रहेंगे। आरपीएससी पेपर लीक, भ्रष्टाचार, कुशासन और महिला अत्याचार-रेप के मुद्दे को विधानसभा के 14 जुलाई से शुरू होने जा रहे सत्र में भी पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। 18 जुलाई को भाजपा सड़कों पर उतरकर अजमेर से आंदोलन का शंखनाद करेगी।
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युवाओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे को भाजपा ने इसलिए लपका है , क्योंकि 60 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवा वर्षभर में परीक्षा देते हैं। उनके परिवार और अभिभावक भी परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक व बेरोजगारी से परेशान हैं। पेपर लीक और नकल की घटनाओं से परीक्षा एजेंसी आरपीएससी और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की साख बहुत गिरी है। ये दोनों संस्थाएं अजमेर में हैं। आरपीएससी के सदस्य बाबुलाल कटारा की गिरफ्तारी तक हो गई। राजस्थान पुलिस एसओजी के अलावा ईडी अलग से मामले की जांच में जुटी है।
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इन नेताओं ने बेरोजगारों के मुद्दे पर आंदोलन का फैसला करवाया 
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में बड़ा विरोध प्रदर्शन पिछले दिनों रीट पेपर लीक मामले में जयपुर में हुआ था। जिसमें पूनिया के पैर में फ्रेक्चर भी हो गया था। तब राजेन्द्र राठौड़, किरोड़ीलाल मीणा भी आंदोलन में पहुंचे, लेकिन अन्य कई सीनियर नेता आंदोलन में नहीं पहुंचे थे। इसके बाद सचिन पायलट ने कांग्रेस में रहकर यह मुद्दा उठाया, तो युवाओं समेत पूरे प्रदेश का ध्यान उनकी ओर तेजी से गया। क्योंकि, सचिन पायलट यूथ की आवाज उठा रहे थे और गहलोत सरकार को लगातार हिला रहे थे। लेकिन, पायलट ने पिछले दिनों 15 दिन के अपने अल्टीमेटम का समय खत्म होने के बाद पूर्व घोषित कोई आंदोलन नहीं किया और आखिरकार समझौता कर घोषणा कर दी कि गहलोत के साथ मिलकर चुनाव प्रचार करेंगे।

ऐसे में युवाओं में उनके बारे में एक नैरेटिव बन गया, जो नेगेटिव रहा। भाजपा नेताओं और किरोड़ीलाल मीणा ने भी कहा कि कांग्रेस आलाकमान ने पायलट के पैरों के छालों पर न जाने कौनसी मेहंदी लगा दी है कि वे समझौता करके बैठ गए हैं। वे सत्ता में आने और कुर्सी के लिए लड़ाई लड़ रहे थे, उन्होंने युवाओं को गुमराह किया है। सांसद और केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य किरोड़ीलाल मीणा, नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, उपनेता सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने इस मुद्दे को गहलोत-पायलट समझौते के बाद तुरंत लपकते हुए आंदोलन की रणनीति तैयार की, तो विजय संकल्प बैठक में यह प्रस्ताव सभी को पसंद आया। जिसके बाद नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दे दी।

क्यों भाजपा के लिए पेपरलीक और बेरोजगारों का मुद्दा चुनावी लिहाज से अहम?
सचिन पायलट ने जयपुर के भांकरोटा में 15 जून को जनसभा कर युवाओं से वादा किया था कि 'पैरों के छालों की कसम मैं अब पीछे नहीं हटूंगा।' 15 दिन का अल्टीमेटम सरकार को देते हुए 3 मुख्य मांगें रखी थीं। जिनमें पेपर लीक प्रभावितों को आर्थिक मुआवजा देने, आरपीएससी भंग कर आमूलचूल परिवर्तन इसके पदाधिकारियों और सदस्यों की नियुक्तियों में करने, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पिछले कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार और घोटालों की जांच कराने की मांग रखी थी।

सीएम गहलोत ने पायलट की तीनों मांगों को ठुकरा दिया और ऐसी मांग को विपक्ष की बुद्धि का दिवालियापन तक कह दिया।  समझौते के बाद सीएम गहलोत ने अपने हिसाब से  पेपरलीक पर आजीवन कारावास का सख्त बिल विधानसभा में लाने की बात कही। प्रभारी रंधावा ने कहा कि आरपीएससी में योग्य लोगों की नियुक्तियां भी जल्द कर दी जाएंगी। वसुंधरा राजे के शासनकाल के घोटालों की जांच पर किसी ने एक शब्द नहीं कहा। क्योंकि गहलोत पहले ही कह चुके थे कि राजे के खिलाफ कोई मामला पेंडिंग नहीं है। कुछ है तो पायलट सामने लाकर बताएं, विधानसभा में ऐसा कोई मामला सबूतों के साथ उन्होंने पिछले साढ़े 4 साल में क्यों नहीं उठाया ?

पायलट खेमे के विधायकों ने भी अब चुप्पी साध ली
जयपुर के भांकरोटा में हुई सभा में सचिन पायलट के साथ उनके खेमे के विधायकों ने भी जमकर गहलोत सरकार को घेरा था। मुकेश भाकर ने कहा था याचना नहीं अब रण होगा। मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा ने कहा था हमारी पार्टी कांग्रेस की सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वेदप्रकाश सोलंकी, मंत्री हेमाराम चौधरी समेत अन्य ने भी सीएम गहलोत पर सियासी वार किए थे। उनके लगाए आरोपों को भी बेबुनियाद बताया था। लेकिन अब पायलट खेमे के सभी विधायकों ने भी चुप्पी साध ली है। वो भी पायलट के साथ अब अपनी फेस सेविंग कर रहे हैं।

गहलोत सरकार को सदन के अंदर और बाहर घेरेगी बीजेपी
2 दिन की विजय संकल्प बैठक के बाद अब चुनावी मोड पर भाजपा एक्शन में दिखेगी। हर बूथ पर चुनावी जीत का संकल्प पार्टी ने लिया है। पेपर लीक, भ्रष्टाचार, कुशासन, बिगड़ी कानून व्यवस्था, अपराध का ग्राफ, किसान कर्जमाफी, बारिश में आपदा प्रबंधन की खुली पोल, टूटी सड़कें समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर भाजपा 14 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र में कांग्रेस को जहां सदन के अंदर प्रश्नों से घेरेगी, वहीं बड़े मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग रखकर सरकार से जवाब भी मांगा जाएगा।

सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। क्योंकि चुनाव से पहले यह अंतिम सत्र की बैठक होगी।  इसके साथ ही सत्र के दौरान सड़कों पर भाजपा पार्टी की ओर से आंदोलन किए जाएंगे। 18 जुलाई को अजमेर में बड़ा प्रदर्शन करने की भाजपा घोषणा कर चुकी है। आगामी दिनों में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और केंद्रीय मंत्रियों के राजस्थान में दौरे और प्रवास होंगे। जनसभाएं और प्रेसवार्ता होंगी। हिंदुत्व, तुष्टिकरण, आदिवासी, दलित और महिलाओं के मुद्दे पर भी जमकर गहलोत सरकार को भाजपा घेरेगी।

विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव में जीत की तैयारी 
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि बैठक में महिला विरोधी और दलित विरोधी प्रदेश की कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया । तुष्टिकरण और परिवारवाद की राजनीति को समाप्त करने का भी संकल्प भी बैठक में लिया गया । 18 जुलाई को अजमेर में युवाओं के मुद्दे पर भाजपा विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस के कुशासन, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं को छात्रवृत्ति नहीं देने के खिलाफ अजमेर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में विभिन्न मुद्दों पर भाजपा द्वारा कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा जाएगा।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से किए गए वादे अधूरे हैं। बजट घोषणाएं और जन घोषणा पत्र के वादे भी अधूरे हैं। हम तमाम मुद्दों पर रोजाना प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सदन में घेरेंगे। कुशासन, जंगल राज व्यवस्था , लुटता- पिटता नौजवान, आरपीएससी की गिरती हुई साख,  परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा की मात्र गिरफ्तारी के बाद जांच आगे नहीं बढ़ना समेत तमाम मुद्दों पर बीजेपी प्रदेश कांग्रेस सरकार को घेरने का काम करेगी।


12 जुलाई को झुंझनूं में भाजपा का महाघेराव
भाजपा ने यह भी निर्णय लिया है कर्जमाफी के नाम पर वादाखिलाफी के शिकार हुए किसान 12 जुलाई को झुंझनूं में सरकार का महाघेराव करेंगे। किसानों के साथ गहलोत सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर धोखा किया। जिसके चलते आज प्रदेश में हजारों किसानों की जमीनें नीलाम हो गई हैं। वहीं प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता नहीं मिलने और पेपर लीक से लाखों विद्यार्थियो में आक्रोश व्याप्त है। इसलिए 18 जुलाई को अजमेर में आरपीएससी के बाहर युवा गहलोत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सरकार को उखाड़ फेकने का संकल्प लेंगे। इन दोनों कार्यक्रमों में भाजपा किसान मोर्चा और भाजपा युवा मोर्चा की बड़ी भूमिका रहेगी।

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