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Water Crisis : पंजाब में पानी के लिए मच सकता है हाहाकार, 300 से 500 फुट तक गिरा जलस्तर

Sun, 16 Oct 2022 04:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 16 Oct 2022 04:16 AM IST
सार

Water Crisis : पांच नदियों के पानी वाला क्षेत्र है पंजाब और पानी को लेकर हरियाणा व दिल्ली में जंग चल रही है। लेकिन पंजाब की जमीनी हकीकत यह है कि पंजाब में पानी को लेकर अंदरूनी जंग के आसार बनते जा रहे हैं। पंजाब का पानी खत्म होता जा रहा है।

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Water Crisis : There may be an outcry for water in Punjab
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

पांच नदियों के पानी वाला क्षेत्र है पंजाब और पानी को लेकर हरियाणा व दिल्ली में जंग चल रही है। लेकिन पंजाब की जमीनी हकीकत यह है कि पंजाब में पानी को लेकर अंदरूनी जंग के आसार बनते जा रहे हैं। पंजाब का पानी खत्म होता जा रहा है। जिस प्रदेश का नाम ही पांच नदियों के पानी के ऊपर रखा गया, अब वो बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाला है।

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पानी का स्तर इस कदर गिर चुका है कि राज्य के कई इलाके डार्क जोन में चले गए हैं। पंजाब में सतलुज, ब्यास और रावी नदियां ही सिंचाई का साधन हैं। एक वक्त था जब पंजाब में नहरों का जाल बिछा था। सिंचाई के लिए किसानों को पानी की कोई कमी नहीं थी। आज नहरें सूख चुकी हैं। नदियों की हालत अच्छी नहीं रही। एक के बाद पंजाब के इलाकों में पानी का संकट पैदा होता जा रहा है।
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हालात कितने खराब 
1976 में शाहकोट के एक नामवर किसान हरबंस सिंह चंदी ने अपने खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल लगवाया था तो पानी 30 फुट पर ही मिल गया था। जहां पहले 30 फुट पर पानी निकल आता था वहां ट्यूबवेल के लिए अब 300 फुट का बोरवेल करना पड़ रहा है। चंदी आज भी सैकड़ों एकड़ में खेती करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि 60 साल में पानी काफी खराब हुआ है, पानी में आगे हालात खराब होते दिखाई दे रहे हैं। मालवा इलाके में सिंचाई के पानी के लिए पहले ट्यूबवेल की जरूरत नहीं थी, नहरों से हफ्ते में एक बार सिंचाई का पानी मिल जाया करता था, लेकिन अब नहरें सूख चुकी हैं। सीएम भगवंत मान का जिला संगरूर पंजाब के डार्क जोन में आ चुका है। संगरूर के ज्यादातर गांवों में ग्राउंड वाटर का लेवल 350 से 500 फुट नीचे चला गया है।
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पंजाब ट्यूबवेल कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन जगबीर बराड़ का कहना है कि तेजी से पंजाब की धरती के नीचे से पानी गायब होता जा रहा है, वह दिन दूर नहीं जब पंजाब की धरती रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगी। अगले 20-25 साल में सूख चुके होंगे। यह रिपोर्ट चिंताजनक है और पंजाब तो खुद पानी की जंग लड़ने जा रहा है। बराड़ का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में जानकारी हासिल की थी कि पंजाब के 138 ब्लॉक में से 110 ब्लॉक में भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल हो रहा है।

यहां भूजल के स्तर को बनाए रखने की सख्त जरूरत है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दरअसल, नब्बे के दशक में पंजाब सरकार ने सिंचाई के लिए बिजली के इस्तेमाल में किसानों को सब्सिडी देनी शुरू की थी। इसके बाद किसानों में ट्यूबवेल के जरिये सिंचाई की परंपरा बढ़ती ही चली गई। नब्बे के दशक के पहले 42 फीसदी खेतों में सिंचाई के लिए नहर के पानी का इस्तेमाल होता था। अब 72 फीसदी खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल का सहारा लिया जाता है और नहरों के पानी के जरिये सिर्फ 28 फीसदी खेतों की सिंचाई होती है।

1980 में पंजाब में ट्यूबवेल की संख्या 1 लाख 90 हजार थी जो किअब  बढ़कर 15 लाख हो चुकी है, इसमें 13 लाख ट्यूबवेल बिजली के जरिये चलते हैं और बाकी के ट्यूबवेल डीजल इंजन के जरिये। 

जालंधर में सर्फेस वाटर प्रोजेक्ट, 9 ब्लाक खतरे में
वाटर संसाधन डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के अनुसार हर साल जालंधर में 36 सेंटीमीटर ग्राउंड वाटर लेवल गिर रहा है। 10 में से 9 ब्लाक क्रिटिकल जोन में पहुंच गए हैं। इनमें वाटर लेवल 400-500 फुट तक पहुंच गया है। निगम एवरेज 550-600 फीट पर बोरिंग कर ट्यूबवेल फिट कर रहा है। साल 2000 में जालंधर में पानी का लेवल सालाना 3 से 4 इंच तक गिर रहा था। जालंधर में केवल आदमपुर ब्लाक खतरे से बाहर है। यहां पर पानी पौने चार सौ फुट तक मिल जाता है। सिटी में एवरेज पानी का लेवल 450 फुट पर पहुंच गया है। सेहतमंद पानी लेना है तो 500 फुट नीचे जाना होगा। जिले में शाहकोट, भोगपुर, नकोदर, लोहियां, कैंट जैसे ब्लाकों में खतरनाक लेवल पहुंच चुका है।


हालात खतरनाक होते देखकर जालंधर में नहरी पानी पीने लाने का प्रोजेक्ट पूरा हो रहा है, ताकि पानी की किल्लत से परेशानी न हो। जालंधर में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए सतलुज दरिया से बिस्त दोआब नहर और पाइप लाइन से वाटर सप्लाई के लिए 1400 करोड़ रुपये के सरफेस वाटर प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। सतलुज का पानी पीने के लिए जालंधर नहरों के जरिये लाया जाएगा।

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