Manasingh Wala: पंजाब के इस गांव में हैं सभी सुविधाएं, शॉपिंग के लिए भी नहीं जाना पड़ता शहर, देश के सर्वश्रेष्ठ दस गांवों में है शामिल
गांव की सभी गलियां पक्की हैं। छप्पड़ की मरम्मत के लिए 66 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, जिसमें 25 कमरे हैं। इसमें करीब 300 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में लड़कियों की संख्या ज्यादा है।
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फिरोजपुर से 15 किलोमीटर दूर बसा गांव माणासिंह वाला को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। साफ सुथरी सड़कें, पक्की गलियां, बड़ी बड़ी कोठियां, हर घर के सामने लटकी हुई नेम प्लेट। हरे भरे पेड़ों की बहुतायत वाला यह गांव तमाम सुविधाओं से लैस है। कमाल की बात तो यह है कि यहां एक शॉपिंग मॉल भी है। गांव के लोगों को शहर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। देश भर के टॉप टेन गांवों में यह दसवें नंबर पर था।
फिरोजपुर-मोगा जीटी रोड स्थित गांव प्यारेआना से तीन किलोमीटर अंदर की तरफ यह गांव पड़ता है। दो किलोमीटर पहले से ही कोठियां दिखने लगती हैं। गलियों व सड़कों के किनारे बेंच लगी हैं। गांव में पेड़ों के कारण भरपूर हरियाली है। ग्रामीणों को पक्षियों से इतना प्यार है कि उन्होंने हाथ से घोंसले बनाकर पेड़ों पर टांग रखे हैं। इनमें पक्षी बैठे रहते हैं। लगभग तीन साल पूर्व ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देशभर के पचास हजार गांवों का सर्वे किया था। हर सहूलियत उपलब्ध होने के चलते इस गांव को अवॉर्ड दिया गया था।
गांव की सभी गलियां पक्की हैं। छप्पड़ की मरम्मत के लिए 66 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, जिसमें 25 कमरे हैं। इसमें करीब 300 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। स्कूल में विज्ञान, पंजाबी व गणित वाटिका स्थापित की है। गांव में एक प्राइवेट शॉपिंग मॉल भी है, जिसमें हर प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध हैं। इस मॉल का फायदा माणा सिंह वाला के आसपास के करीब पंद्रह गांव लेते हैं।
सरपंच बोले-विकास में इस्तेमाल होती है ग्रांट
सरपंच निर्मल सिंह का कहना है कि उनके गांव को सरकारी की तरफ से जो ग्रांट मिलती है, उसका सही इस्तेमाल किया जाता है। गांव की आबादी 3500 है। लोगों की सहूलियतों को मद्देनजर रखते हुए गांव में प्रत्येक सुविधा मुहैया करवाई गई है। यहां दाना मंडी व सब्जी मंडी भी है। बैंक, डाकघर, पशुओं का अस्पताल के अलावा तमाम सुविधाएं हैं। इसीलिए उनके गांव को केंद्र सरकार से अवॉर्ड मिला था। उनका गांव देशभर में दसवें स्थान पर था। गांव की सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है। दो सांझी छत हैं, यहां पर बैठकर लोग मनोरंजन करते हैं।
गांव में हर चीज उपलब्ध, शहर जाने की जरूरत ही नहीं
ग्रामीण गुरजीत सिंह का कहना है कि इस गांव में प्रत्येक सुविधा है, यहां के लोगों को शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां खुले शॉपिंग मॉल में बच्चों की पढ़ाई लिखाई के सामान से लेकर हर चीज मिलती है। आसपास के गांव वाले भी अपनी जरूरत का सामान यहां से खरीदकर ले जाते हैं।
गांव माणा सिंह वाला कम नहीं है शहर से
गांव माणा सिंह वाला में सुंदर-सुंदर कोठियां बनी हैं। प्रत्येक कोठी के अंदर और बाहर पेड़ लगे हैं ताकि वातावरण शुद्ध रहे। सड़कें व गलियां साफ-सुथरी होने के अलावा लाइटें लगी हुई हैं। सड़क व गलियों में बैठने के लिए बेंच लगे हैं। प्रत्येक चौक पर रिफ्लेक्टर लगे हैं ताकि किसी भी गली व सड़क से आ रहा वाहन दिख सके। यहां के लोग गांव की सफाई की तरफ खास ध्यान रखते हैं। गांव में किसी जगह पर भी गंदगी नहीं है।
गांव में हैं ये सुविधाएं
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, प्राइमरी स्कूल, बैंक, डाकघर, सहकारी समिति, एटीएम, शॉपिंग माल, डिस्पेंसरी, पशु अस्पताल, सब्जी मंडी, दाना मंडी, तीन गुरुद्वारे, दो चर्च, सीवरेज सिस्टम, आरओ सिस्टम, बिजलीघर, फोकल प्वाइंट, जल घर, पानी निकासी का बढ़िया इंतजाम, पंचायत घर, दो सांझी छत, आंगनबाड़ी केंद्र व श्मशानघाट है।