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पंजाब में धुंध: ट्रेनों की रफ्तार पर लगाम.. अब 50 किमी प्रति घंटे ही दाैड़ेंगी; FSD की मदद लेंगे लोको पायलट
Sat, 16 Nov 2024 09:04 AM IST
निवेदिता वर्मा
अनिल कुमार, संवाद, फिरोजपुर (पंजाब)
अनिल कुमार, संवाद, फिरोजपुर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 16 Nov 2024 09:04 AM IST
सार
धुंध का ट्रेनों पर काफी असर पड़ रहा है। धुंध और रात के अंधेरे में लोको पायलट को सिग्नल देखने में काफी दिक्कत आ रही है इसलिए लोको पायलटों को हिदायत दी है कि धुंध में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 किमी मीटर और मालगाड़ियों की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखें।
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घनी धुंध के बीच गुजरती ट्रेन।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब में धुंध ने रेलगाड़ियों के पहियों की रफ्तार धीमी कर दी है। लोको पायलटों को हिदायत जारी की गई हैं कि धुंध में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 और मालगाड़ियों की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखें। इसके अलावा जीपीएस फाॅग सेफ्टी डिवाइस (एफएसडी) धुंध में लोको पायलट को ट्रेन चलाने में मदद करेगा।
रेल डिवीजन फिरोजपुर के मैकेनिकल विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि धुंध का ट्रेनों पर काफी असर पड़ रहा है। धुंध और रात के अंधेरे में लोको पायलट को सिग्नल देखने में काफी दिक्कत आ रही है इसलिए लोको पायलटों को हिदायत दी है कि धुंध में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 किमी मीटर और मालगाड़ियों की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखें। रास्ते में कहीं पर थोड़ा बहुत साफ मौसम होने पर ट्रेन को 75 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ज्यादा न दौड़ाएं। धुंध में ट्रेन चलाने के लिए जीपीएस फाॅग सेफ्टी डिवाइस का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई बार रास्ते में घनी धुंध होने के चलते उक्त यंत्र सही से काम नहीं कर पाता। ऐसे में विद्युतीकरण ट्रैकों के पोलो पर सिग्मा चिन्ह लगा होता है, जो दूर से चमकता है, इससे लोको पायलट को आने वाले सिग्नल की दूरी का अनुमान हो जाता है। इसे देखकर लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार धीमी कर सिग्नल तक पहुंचता है और सिग्नल क्लीयर होने पर ट्रेन को आगे बढ़ाता है। रेल डिवीजन फिरोजपुर के अधिकारियों ने धुंध में फिरोजपुर-लुधियाना, जालंधर, बठिंडा, फाजिल्का रेल सेक्शन के अलावा अन्य सेक्शनों में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है। अधिकारी ने बताया कि लोको पायलटों को यह भी कहा गया है कि जहां धुंध बहुत ज्यादा है वहां पर खुद ट्रेन की रफ्तार निश्चित करें।
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रेल डिवीजन फिरोजपुर के मैकेनिकल विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि धुंध का ट्रेनों पर काफी असर पड़ रहा है। धुंध और रात के अंधेरे में लोको पायलट को सिग्नल देखने में काफी दिक्कत आ रही है इसलिए लोको पायलटों को हिदायत दी है कि धुंध में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 किमी मीटर और मालगाड़ियों की गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखें। रास्ते में कहीं पर थोड़ा बहुत साफ मौसम होने पर ट्रेन को 75 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ज्यादा न दौड़ाएं। धुंध में ट्रेन चलाने के लिए जीपीएस फाॅग सेफ्टी डिवाइस का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
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कई बार रास्ते में घनी धुंध होने के चलते उक्त यंत्र सही से काम नहीं कर पाता। ऐसे में विद्युतीकरण ट्रैकों के पोलो पर सिग्मा चिन्ह लगा होता है, जो दूर से चमकता है, इससे लोको पायलट को आने वाले सिग्नल की दूरी का अनुमान हो जाता है। इसे देखकर लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार धीमी कर सिग्नल तक पहुंचता है और सिग्नल क्लीयर होने पर ट्रेन को आगे बढ़ाता है। रेल डिवीजन फिरोजपुर के अधिकारियों ने धुंध में फिरोजपुर-लुधियाना, जालंधर, बठिंडा, फाजिल्का रेल सेक्शन के अलावा अन्य सेक्शनों में पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है। अधिकारी ने बताया कि लोको पायलटों को यह भी कहा गया है कि जहां धुंध बहुत ज्यादा है वहां पर खुद ट्रेन की रफ्तार निश्चित करें।
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