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बहिबल गोलीकांड: सुखबीर बादल का आरोप, आरोपी एसपी को बहाल कर चन्नी सरकार ने दिए मेरे परिवार को फंसाने के आदेश

Sun, 07 Nov 2021 08:25 PM IST
अनुराग सक्सेना फगवाड़ा, पीटीआई
फगवाड़ा, पीटीआई Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 07 Nov 2021 08:25 PM IST
सार

बादल ने दावा किया कि वे इस मुद्दे पर ना तो बचाव की मुद्रा में हैं ना ही आशंकित हैं लेकिन उन्हें चन्नी और पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के बयान हास्यास्पद लग रहे हैं।

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Sacrilege case Sukhbir Badal allegation on Punjab government instructed DGP to frame my family
सुखबीर बादल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को आरोप लगाया कि चरणजीत सिंह चन्नी सरकार ने बादल परिवार को बेहबल कलां बेअदबी मामले और कोटकपुरा फायरिंग मामले में फंसाने के लिए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है।

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शिअद प्रमुख ने यहां संवाददाताओं से कहा कि चन्नी सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। बादल ने दावा किया कि वे इस मुद्दे पर ना तो बचाव की मुद्रा में हैं ना ही आशंकित हैं लेकिन उन्हें चन्नी और पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के बयान हास्यास्पद लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे चिंता नहीं कि वे हमें फंसा देंगे लेकिन मैं उन्हें आगाह करता हूं कि किसी को झूठे मामले में फंसाना पाप और अपराध है।
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शिअद प्रमुख ने कांग्रेस सरकार और डीजीपी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बादल परिवार को फंसाने के लिए झूठे गवाह तैयार किए गए तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। बादल ने अपने सूत्रों का नाम सार्वजनिक करने से इंकार करते हुए कहा, ''डीजीपी और उनकी टीम को बादल परिवार को इस केस में फंसाने के लिए झूठा गवाह तैयार कर सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज कराने का निर्देश मिला है।''

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उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता पिछले साडे़ चार साल से इस मुद्दे पर चिल्ला रहे हैं और बादल परिवार को फंसाने के लिए दो बार प्रयास कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी और आप नेता कुंवर विजय प्रताप सिंह ने हमें फंसाने के लिए सारे प्रयास कर लिए लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी रिपोर्ट को खारिज कर दिया क्योंकि वह राजनीतिक उद्देश्य से तैयार की गई थी।

साल 2015 में कोटकपुरा और बेहबल कलां पुलिस गोलीकांड की जांच करने के लिए तैयार विशेष जांच टीम (एसआईटी) में सिंह भी थे। उन्होंने इसी साल अप्रैल में समयपूर्व रिटायरमेंट ले लिया था जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदकोट जिला में गुरु ग्रंथ साहिब की कथित बेअदबी के बाद कोटकपुरा गोलीकांड में पूर्ववर्ती पंजाब सरकार द्वारा दाखिल की गई एसआईटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। वे जून में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। घटना के समय बादल उप मुख्यमंत्री थे तथा गृह मंत्रालय उनके पास था। शिअद प्रमुख ने दावा किया कि चन्नी और डिप्टी सीएम अब पांच सदस्यीय एसआईटी की बैठक में शामिल हो रहे हैं और इस मामले में स्वतंत्र जांच कराने के हाईकोर्ट के निर्देश का उल्लंघन कर रहे हैं।

अकाली समर्थित सरकार के कार्यकाल पर गोलीकांड होने पर दुख जताते हुए बादल ने दोषियों और इस मामले में राजनीति करने वालों को दंड देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंजाबी और पंथ दोषियों को जेल की सलाखों में देखना चाहते हैं और इस मामले में राजनीति नहीं चाहते हैं।

ये था मामला
गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से एक जून 2015 को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप चोरी किया गया था और कुछ समय बाद 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर पावन स्वरूप की बेअदबी की गई। इन घटनाओं का लोगों ने जमकर विरोध किया। 14 अक्तूबर 2015 को पुलिस फायरिंग में किशन भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी। दोनों बरगाड़ी बेअदबी मामले के विरोध में सिख जत्थेबंदियों के शांतिपूर्ण धरने में शामिल थे।

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