Punjab Roadways Strike: डिपो पर खड़ी रहीं 700 बसें, पहले दिन पीआरटीसी को 90 लाख रुपये का नुकसान
परिवहन विभाग ने हड़ताल से राज्य में परिवहन व्यवस्था बाधित नहीं होने का दावा किया है। विभागीय अधिकारियों ने नौ जिलों पटियाला, संगरूर, बरनाला, लुधियाना, कपूरथला, मानसा, मोहाली, बठिंडा और फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नरों को पत्र भेज संबंधित जिलों के बस अड्डों की सुरक्षा की मांग की थी।
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विस्तार
पंजाब रोडवेज पनबस और पीआरटीसी के कच्चे (संविदा) कर्मचारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। बस स्टैंड डिपो के समक्ष धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ कर्मचारियों ने रोष जताया। बसों का चक्का जाम होने की वजह से बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा। रोजाना बस में सफर कर अपने काम पर जाने वाली महिलाओं पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है। महिलाओं को घंटों बस का इंतजार करना पड़ा।
मुक्तसर में रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश सरपरस्त कमल कुमार, अध्यक्ष हरजिंदर सिंह, सचिव तरसेम सिंह, सहायक सचिव बलकार सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों की मांगों को अनदेखा कर रही है। कर्मचारी वर्ष 2007-08 से विभाग में आउटसोर्सिंग के तहत नाममात्र वेतन पर कार्य कर रहे हैं। जब कर्मचारियों के हितों और उन्हें पक्का करने की बात आती है तो सरकार ये कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि ये तो आउटसोर्सिंग पर रखे गए हैं।
कर्मचारियों ने मांगे न माने जाने पर 07 सितंबर को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के निवास का घेराव करने की चेतावनी दी है।
पंजाब रोडवेज पनबस कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के नेता रेशम सिंह ने कहा कि अगर कैप्टन सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वो राज्य के सभी नेशनल हाईवे जाम करेंगे।
बठिंडा डिपो अध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से ट्रांसपोर्ट विभाग के कच्चे कर्मियों की मांगों का पिछले लंबे समय से हल नहीं किया जा रहा। कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर बार-बार सरकार एवं ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ बैठक की लेकिन न तो सरकार ने कोई हल किया और न ही संबंधित मंत्री ने उनकी मांगों को पूरा किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि अब वे प्रदेश सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई के लिए मैदान में उतर चुके हैं।
बसों का चक्काजाम, छह लाख का नुकसान
पठानकोट रोडवेज की सरकारी बसें न चलने से पहले ही दिन करीब छह लाख रुपये का नुकसान हो गया। सरकारी बस सर्विस बाधित होने की वजह से पास होल्डर और महिला यात्रियों को ज्यादा परेशानी हुई। पंजाब रोडवेज पठानकोट डिपो के जनरल मैनेजर दर्शन सिंह गिल ने बताया कि हड़ताल के कारण पहले दिन 13 बस चल सकीं। यहां 90 रूट हैं, इससे चंडीगढ़ के लिए तीन, अमृतसर और जालंधर के लिए पांच-पांच बसें चलीं। हड़ताली कर्मियों की विभाग के उच्चाधिकारियों से बात चल रही है। उम्मीद है कि मसले का हल निकल आएगा।
अमृतसर से चलने वाली 300 से ज्यादा बसों में से 130 बसों का चक्का जाम रहा। प्रदेश के सीनियर प्रधान जोध सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी चालकों और कंडक्टरों ने अमृतसर के डिपो के गेट के पास पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जोध सिंह ने बताया कि पंजाब में 10 हजार सरकारी बसों के चलते पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करें।
डिपो पर खड़ी रहीं 700 बसें
ठेका और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) को पहले दिन ही लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा। हड़तालियों में बड़ी संख्या में चालक और परिचालकों के शामिल होने की वजह से पीआरसीटी के बेड़े में शामिल आधी से ज्यादा बसें रूटों पर नहीं भेजी जा सकीं। फिलहाल कर्मचारियों ने हड़ताल के बेमियादी होने की घोषणा कर रखी है। ऐसे में यह नुकसान आने वाले दिनों में करोड़ों में जाने की आशंका है। इससे कारपोरेशन मैनेजमेंट काफी चिंतित है।
इस संबंध में पीआरटीसी के जनरल मैनेजर सुरिंदर सिंह का कहना है कि उम्मीद है कि ठेका कर्मचारियों की हड़ताल जल्द खत्म होगी। वरना नुकसान काफी हो सकता है। अकेले लुधियाना डिपो को पहले ही दिन लगभग 20 लाख रुपये का झटका लगा है। हड़ताल के कारण लुधियाना डिपो से सिर्फ 10 फीसदी सरकारी बसें चल रही हैं। सरकारी बस कर्मचारियों की इस हड़ताल का निजी बस चालकों ने खूब फायदा उठाया।
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक हड़ताल के कारण पंजाब के अलग-अलग डिपो पर 700 बसें खड़ी रहीं, जबकि केवल 400 बसें ही रेगुलर स्टाफ के सहारे विभिन्न रूटों पर चलाई जा सकीं। ऐसे में पीआरटीसी को हड़ताल के पहले ही दिन 90 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इनमें 60 लाख पीआरटीसी को नकद में मिलना था जबकि 30 लाख महिलाओं को मुफ्त दी जा रही बस सफर सुविधा का है, जिसका भुगतान पंजाब सरकार की ओर से बाद में किया जाता है। इस समय कारपोरेशन को बसों से रोजाना करीब एक करोड़ 40 लाख की आमदनी हो रही है।
ठेका मुलाजिमों ने किया एलान, आज मोती महल का घेराव कर पक्का मोर्चा लगाएंगे
पनबस, पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर सोमवार को ठेका व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने कामकाज छोड़कर सीएम सिटी में बस अड्डे के अंदर जोरदार धरना दिया। इस मौके पर सरकार से वादे मुताबिक सभी ठेका व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। इसे लेकर मंगलवार को मोती महल का घेराव करके पक्का मोर्चा शुरू करने का एलान किया गया।
अमृतसर में लिपिक स्टाफ ने चलाईं बसें
अमृतसर में तो बस चालकों और कंडक्टरों की हड़ताल का एक और पहलू भी सामने आया। रोडवेज के अधिकारियों ने पिछले लंबे समय से दफ्तरों में काम कर रहे अपने लिपिक स्टाफ को बसों को चलाने पर लगा दिया। गुलजार सिंह ने बताया कि उन्होंने कई साल बाद बस चलाई, क्योंकि वे लंबे समय से दफ्तरी काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने उन्हें बस चलाने की जिम्मेदारी दी है तो वे बसों को चला रहे हैं।
यात्री हुए परेशान
जालंधर की बुजुर्ग पूर्ण लता ने बताया कि वह सुबह ही जालंधर से अमृतसर अपने रिश्तेदार के पास आई थी। बस चालकों व कंडक्टरों की हड़ताल के चलते दो घंटे में बस मिली। जबकि अन्य दिनों में हर पांच मिनट बाद बस स्टैंड से एक सरकारी बस निकलती है।
वही धारीवाल की प्रभजोत कौर ने बताया कि रोडवेज के चालकों का हड़ताल का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। वैसे तो रूटीन में वे सरकारी बस में जीरो टिकट लेकर सफर करती थी लेकिन सोमवार टिकट लेकर भी बस में सवार होने के लिए करीब तीन से चार घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
तरनतारन की सुमन ने बताया कि वह अमृतसर में एक प्राइवेट बैंक में काम करती हैं। बैंक में समय पर पहुंचने के लिए वह सुबह एक घंटा पहले घर से निकल पड़ी। इसके बावजूद बैंक पहुंचने में पौना घंटा देरी हो गई। इसी तरह स्नेहलता ने बताया कि वह बटाला में एक स्कूल में अध्यापिका है। उन्हें पता था कि सोमवार को बस चालकों की हड़ताल है तो उन्होंने सरकारी बस के बजाय निजी बस में सफर करना बेहतर समझा।