क्रिकेट के चौके की तरह है 'सिद्धू' का इस्तीफा: नवजोत के शॉट का अंदाजा ‘कांग्रेस’ को भी नहीं रहा
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सिद्धू, कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री का रैंक दिया गया। लेकिन सिद्धू और अमरिंदर खेमे के बीच पटरी नहीं बैठी। जानकारों ने इन दोनों के बीच दूरी की वजह अमृतसर नगर निगम चुनाव को बताया था। सिद्धू की कार्यप्रणाली को लेकर कैप्टन खुश नहीं थे। उनके बीच, खासतौर से खनन जैसे मुद्दों पर छत्तीस का आंकड़ा बना रहा...
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पंजाब कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे ने कांग्रेसी खेमे के अलावा केंद्र की सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को लेकर ट्वीट कर दिया है कि मैंने पहले ही कहा था कि यह व्यक्ति पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य के लिए ठीक नहीं है। क्रिकेट से राजनीति में कदम रखने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के साथ 'इस्तीफों' की लंबी फेहरिस्त है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने, सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले मिलना और राहुल गांधी को लेकर यह कहना, 'राहुल गांधी मेरे कैप्टन हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह सेना में कैप्टन रहे हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह के भी कैप्टन राहुल गांधी ही हैं। इस तरह की बयानबाजियों की एक लंबी कड़ी है। भारतीय क्रिकेट टीम जब 1996 में इंग्लैंड दौरे पर गई थी, तो नवजोत सिंह सिद्धू की कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन से नहीं बनी। नतीजा, वे नाराज होकर बीच में ही स्वदेश लौट आए थे। तब से लेकर अब तक सिद्धू कई बार इस्तीफा दे चुके हैं।
बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने 2004 में भाजपा टिकट पर अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। सिद्धू के खिलाफ एक पुराना आपराधिक मामला चल रहा था। उसमें गुरनाम सिंह नाम के शख्स की मौत हो गई थी। साल 2006 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को तीन साल कैद की सजा सुनाई। इसके तुरंत बाद सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया था। अप्रैल, 2016 में सिद्धू को राज्यसभा में भेजा गया। उस वक्त भी सिद्धू को तीन महीने बाद ही इस्तीफा देना पड़ा था। सिद्धू ने तब कहा था कि वे पंजाब से जुड़े हैं। लोगों के बीच में रह कर काम करना चाहते हैं। हालांकि इसके पीछे कुछ राजनीतिक कारण बताए गए थे। उस समय सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू, जिन्हें पंजाब सरकार में मुख्य संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था, उन्होंने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जिस वक्त सिद्धू और उनकी पत्नी ने इस्तीफा दिया तो यह कयास लगाए जाने लगे थे कि वे देर-सवेर आम आदमी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं से उनकी मुलाकात भी हुई थी। जानकारों का कहना है कि सिद्धू चाहते थे कि 'आप' उन्हें पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। इस पर 'आप' नेतृत्व राजी नहीं हुआ और बात बिगड़ गई। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सिद्धू, कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार बन गई। सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री का रैंक दिया गया। लेकिन पार्टी संगठन की गतिविधियों को लेकर सिद्धू और अमरिंदर खेमे के बीच पटरी नहीं बैठी। जानकारों ने इन दोनों के बीच दूरी की वजह अमृतसर नगर निगम चुनाव को बताया था। सिद्धू की कार्यप्रणाली को लेकर कैप्टन खुश नहीं थे। उनके बीच, खासतौर से खनन जैसे मुद्दों पर छत्तीस का आंकड़ा बना रहा। कांग्रेस नेतृत्व से सलाह कर कैप्टन अमरिंदर ने अपनी कैबिनेट में सिद्धू का विभाग बदल दिया। नवजोत सिंह सिद्धू ने इसका विरोध किया और तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया।
पिछले दिनों पंजाब में हुए घटनाक्रम के बाद सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि उन्हें यह पद कैप्टन अमरिंदर सिंह से बिना सलाह किए प्रदान किया गया था। सिद्धू ने कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। उसके बाद उनके नाम की घोषणा कर दी गई। इसके बाद भी सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच विवाद नहीं थम सका। यहां तक कि दोनों नेताओं के बीच सामान्य बातचीत भी बंद हो गई थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वे सिद्धू के साथ तब तक बैठक नहीं करेंगे, जब तक वे अपने 'अपमानजनक ट्वीट्स' के लिए उनसे माफी नहीं मांग लेते। पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने के बाद यह माना जा रहा था कि अब कांग्रेस पार्टी में चल रहा विवाद थम जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मंगलवार दोपहर को जब सिद्धू का इस्तीफा वायरल हुआ तो खुद कांग्रेस पार्टी हैरान रह गई। पार्टी नेताओं के पास फौरी तौर पर सिद्धू के इस्तीफे को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं था।