सत्ता की चाबी: क्या इस बार पंजाब का किला जीत लेंगे केजरीवाल, सर्वे के नतीजों से उत्साहित है आम आदमी पार्टी
सर्वे में पंजाब में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 35.1 फीसदी वोट हासिल होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद कांग्रेस को 28.8 फीसदी, शिरोमणि अकाली दल को 21.8 फीसदी और भाजपा को 7.3 फीसदी मत मिलने का अनुमान लगाया गया है...
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भाजपा-कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल अरविंद केजरीवाल पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि वे दिल्ली को छोड़कर देश के किसी भी दूसरे राज्य में सफल नहीं हो पाए। लेकिन एक सर्वे में पंजाब में आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलने के बाद इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अरविंद केजरीवाल का केवल दिल्ली तक सीमित रहने का ठप्पा हट सकता है। 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में आम आदमी पार्टी को 35.1 फीसदी वोटों के साथ 51 से 57 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। यानी आम आदमी पार्टी सत्ता तक पहुंच सकती है। आप नेता इस सर्वे के नतीजे आने के बाद बेहद खुश हैं।
सर्वे में पंजाब में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 35.1 फीसदी वोट हासिल होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद कांग्रेस को 28.8 फीसदी, शिरोमणि अकाली दल को 21.8 फीसदी और भाजपा को 7.3 फीसदी मत मिलने का अनुमान लगाया गया है। इन वोटों को सीटों में तब्दील करें तो अनुमान है कि आम आदमी पार्टी को 51 से 57 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 38-46, शिरोमणि अकाली दल को 16-24 और भाजपा को अधिकतम एक सीट मिलने का अनुमान है।
आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान ने कहा है कि अभी यह शुरुआत है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आएगा, आम आदमी पार्टी के प्रति लोगों का रुझान और बढ़ेगा और उनकी पार्टी केवल अपने दम पर पंजाब में सरकार बनाएगी। आप नेता ने कहा है कि पंजाब में सरकार बनते ही किसानों से किए गए हर वादे पूरे किए जाएंगे। पंजाब के लोगों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी।
किसने किया कमाल
माना जा रहा है कि पार्टी का दिल्ली मॉडल दिल्ली में बेहद कामयाब रहा है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा ने पंजाब का चुनावी परिदृश्य बदल दिया है। आम आदमी पार्टी पूरे किसान आंदोलन के समय किसानों के साथ खड़ी रही। उसके नेता किसानों के लिए हर जगह सुविधा उपलब्ध कराते नजर आए। यही कारण है कि किसानों के बीच आम आदमी पार्टी की छवि मजबूत बन गई।
माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी को सफलता मिलने के पीछे पंजाब सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगना है। आम आदमी पार्टी लगातार इन मुद्दों पर मुखर रही है। उसने दलित छात्रों के छात्रवृत्ति में हुए कथित भ्रष्टाचार पर लगातार आवाज उठाई है। उसके नेता दलित समुदाय के बीच लगातार सक्रिय रहे हैं। पार्टी को चुनाव में इसका लाभ मिल सकता है।
पिछले चुनाव में भी बड़ी सफलता
2012 में आम आदमी पार्टी के गठन के कुछ ही समय बाद 2017 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को काफी अच्छी सफलता मिली थी। पार्टी ने पिछले चुनाव में 23.80 वोट फीसदी के साथ 20 सीटें हासिल की थीं। माना जाता है कि चुनाव के समय पार्टी के कुछ नेताओं की महत्त्वाकांक्षा से काफी नुकसान हुआ अन्यथा पिछले चुनाव में ही पार्टी बड़ी सफलता हासिल करते हुए सत्ता के करीब पहुंच सकती थी।
भाजपा ने केजरीवाल को बताया नाकाम
दिल्ली भाजपा मीडिया सेल के इंचार्ज नवीन कुमार जिंदल ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल हर जगह असफल साबित हुए हैं। केजरीवाल अपने मुहल्ला क्लीनिक की ढोल पीटते रह गए, लेकिन कोरोना काल में पूरे देश ने देखा कि केंद्र सरकार की सहायता के बिना वे अपने नागरिकों को उचित इलाज तक नहीं उपलब्ध करा पाए। हर बारिश के बाद उनकी असफलता की कहानी हर सड़क, गली, मुहल्ले में दिखाई देने लगती है। इधर दिल्ली के लोग बारिश में परेशान हो रहे हैं और उधर केजरीवाल जगह-जगह घूमकर अपना प्रचार कर रहे हैं। नवीन कुमार जिंदल ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के लोगों के टैक्स का पैसा दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार पर खर्च कर रहे हैं। उनका कामकाज करने का तरीका देश के किसी भी राज्य में सफल नहीं हो सकता। भाजपा नेता ने कहा कि सर्वेक्षण का परिणाम पंजाब के संदर्भ में सही साबित नहीं होगा।
क्या कहता है चुनावी सर्वे
एक चैनल और एक एजेंसी के सर्वे में दावा किया गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में पंजाब में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार 41.8 फीसदी वोटों के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है। उसे 260 के करीब सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। उत्तराखंड में भी भाजपा लगभग 43 फीसदी वोट और 44 से 48 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रख सकती है। मणिपुर, गोवा में भी भाजपा के सरकार में आने का अनुमान लगाया गया है।