{"_id":"1513ff33810cfb5ca7c0c709a0b7e8e6","slug":"prali-in-punjab-okays-policy-for-using-the-fields","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में पराली को खेतों में खपाने की नीति को हरी झंडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में पराली को खेतों में खपाने की नीति को हरी झंडी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 05 Jan 2014 12:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार ने सूबे में पराली को खेताें में खपाने की नीति को हरी झंडी दे दी है।
राज्य भर के प्रोग्रेसिव किसानों और कृषि विशेषज्ञों से विमर्श के बाद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने धान की पराली के प्रयोग और निपटारे संबंधी कारगर नीति तैयार करने पर अपनी सहमति दे दी।
इस नीति में धान की पराली को जलाने की बजाय खेतों में ही खपाने (इन-सिटू मैनेजमेंट) को उत्साहित करने के लिए किसानों को आवश्यक खेती मशीनरी सब्सिडी पर मुहैया करवाने पर बल दिया गया है।
पंजाब भवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कृषि विभाग द्वारा संयुक्त तौर पर करवाई गई दो दिवसीय ‘धान की पराली के प्रयोग एवं निपटारे’ के संबंध में आयोजित कांफ्रेंस ने मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की पराली को खेतों में खपाने की धारणा से किसानों को भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
इसके अलावा पराली के बढ़िया निपटारे से वातावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी, क्योंकि इससे राज्य में पर्यावरण को पैदा हो रहे गंभीर खतरे को रोका जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि किसान पक्षीय नीति अपनाने से किसानों को पराली जलाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी मुश्किल के बिना आगामी फसल की बिजाई कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पराली को खेतों में खपाने से खादों की खपत में 25 फीसदी की कमी आएगी और इससे राज्य के किसानों को वार्षिक लगभग 400 करोड़ रुपये का लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने वित्तायुक्त विकास को परिणाम मुखी ढंग से धान की पराली को खेतों में खपाने की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पैडी स्ट्राअ रिपर, मल्चर, चॉपर और शरेडर जैसे कृषि औजार वित्त स्थानीय किसानों की जरूरतों के अनुसार बदलाव करवाने के निर्देश दिए।
उन्होंने गड़वासू के डीन अनुसंधान को कहा कि वह धान की पराली को पशुओं के चारे के लिए उचित तौर पर प्रयोग में लाने के बारे में सुझाव दें क्योंकि उसमें पौष्टिक तत्व होते हैं जो दूध उत्पादन की बढ़ोतरी में सहायक होने के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
इसके बाद मुख्य संसदीय सचिव स. गुरबचन सिंह बब्बेहाली ने कृषि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री राहत फंड के लिए 26, 64, 272 रुपये का चैक मुख्यमंत्री को भेंट दिया।
इस बैठक में पूर्व मंत्री जत्थेदार तोता सिंह, मुख्य संसदीय सचिव एनके शर्मा, पंजाब राज्य कृषि आयोग के चेयरमैन डॉ. जीएस कालकट, वित्तायुक्त विकास सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसके संधू, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सीमा जैन, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव गगनदीप सिंह बराड़, निदेशक कृषि डॉ. मंगल सिंह संधू, पंजाब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन रविंद्र सिंह, पेडा के सीईओ बल्लौर सिंह और निदेशक बागवानी डॉ. लाजविंद्र सिंह बराड़ भी उपस्थित थे।
विज्ञापन
राज्य भर के प्रोग्रेसिव किसानों और कृषि विशेषज्ञों से विमर्श के बाद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने धान की पराली के प्रयोग और निपटारे संबंधी कारगर नीति तैयार करने पर अपनी सहमति दे दी।
इस नीति में धान की पराली को जलाने की बजाय खेतों में ही खपाने (इन-सिटू मैनेजमेंट) को उत्साहित करने के लिए किसानों को आवश्यक खेती मशीनरी सब्सिडी पर मुहैया करवाने पर बल दिया गया है।
विज्ञापन
पंजाब भवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कृषि विभाग द्वारा संयुक्त तौर पर करवाई गई दो दिवसीय ‘धान की पराली के प्रयोग एवं निपटारे’ के संबंध में आयोजित कांफ्रेंस ने मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की पराली को खेतों में खपाने की धारणा से किसानों को भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
इसके अलावा पराली के बढ़िया निपटारे से वातावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी, क्योंकि इससे राज्य में पर्यावरण को पैदा हो रहे गंभीर खतरे को रोका जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि किसान पक्षीय नीति अपनाने से किसानों को पराली जलाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी मुश्किल के बिना आगामी फसल की बिजाई कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पराली को खेतों में खपाने से खादों की खपत में 25 फीसदी की कमी आएगी और इससे राज्य के किसानों को वार्षिक लगभग 400 करोड़ रुपये का लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने वित्तायुक्त विकास को परिणाम मुखी ढंग से धान की पराली को खेतों में खपाने की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पैडी स्ट्राअ रिपर, मल्चर, चॉपर और शरेडर जैसे कृषि औजार वित्त स्थानीय किसानों की जरूरतों के अनुसार बदलाव करवाने के निर्देश दिए।
उन्होंने गड़वासू के डीन अनुसंधान को कहा कि वह धान की पराली को पशुओं के चारे के लिए उचित तौर पर प्रयोग में लाने के बारे में सुझाव दें क्योंकि उसमें पौष्टिक तत्व होते हैं जो दूध उत्पादन की बढ़ोतरी में सहायक होने के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
इसके बाद मुख्य संसदीय सचिव स. गुरबचन सिंह बब्बेहाली ने कृषि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री राहत फंड के लिए 26, 64, 272 रुपये का चैक मुख्यमंत्री को भेंट दिया।
इस बैठक में पूर्व मंत्री जत्थेदार तोता सिंह, मुख्य संसदीय सचिव एनके शर्मा, पंजाब राज्य कृषि आयोग के चेयरमैन डॉ. जीएस कालकट, वित्तायुक्त विकास सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसके संधू, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सीमा जैन, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव गगनदीप सिंह बराड़, निदेशक कृषि डॉ. मंगल सिंह संधू, पंजाब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन रविंद्र सिंह, पेडा के सीईओ बल्लौर सिंह और निदेशक बागवानी डॉ. लाजविंद्र सिंह बराड़ भी उपस्थित थे।